KhbarExpresswww.khabarexpress.com

RajB2B Promote your business here

Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now
Search Photo  
RSS Wednesday, February 15, 2012



Vartmaan Sahitya ::February, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner

’विश्व शान्ति में धर्मों की भूमिका‘ पर सम्मेलन रामेश यादव
More Articles

जगराओं ः फोकलोर रिसर्च अकादमी, अमृतसर, हिन्दी-पाक दोस्ती मंच, सप्रिंगडेल एजुकेशन सोसाइटी (पुनरज्जोत) के संयुक्त तत्त्वाधान में एक सम्मेलन किया गया। इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि डॉ. फशरूकश् अब्दुल्ला (भूपपूर्व मुख्यमंत्राी, जम्मू कश्मीर), विशेष अतिथि पाकिस्तान के चौधरी मंजूर अहमद (एम.एन.ए.), जनाब हाफिजष् हुसैन अहमद (एम.एन.ए., कोयटा), कैप्टन कंवलजीत सिंह (जनरल सेक्रेटरी, एस.ए.डी., प्रधानगी), जनाब ए.आर. शाहीन (एस.पी., जम्मू कश्मीर) का रामेश यादव की तरफश् से हार्दिक अभिनन्दन किया गया। फोकलोर रिसर्च अकादमी की अगुवाई में विश्व शान्ति में धर्मों की भूमिका, सम्मेलन का उद्घाटन सारे धर्मों के अगुओं ने ज्योति जलाकर किया। इस सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर के भूतपूर्व मुख्यमंत्राी डॉ. फशरूकश् अब्दुल्ला ने कहा कि दुनिया में अमन (शान्ति) तब ही होगा, जब हमारे दिल में सुकून होगा। दिल में सुकून समझने और सामाजिक जष्रूरतें पूरी होने के साथ ही आ सकता है। उन्होंने कहा कि ईट के धार्मिक स्थानों पर ईश्वर वास नहीं करता, ईश्वर तो इन्सान के दिलों में है। इसलिए इन्सानियत ही सबसे बडा धर्म होना चाहिए। अयोध्या से पधारे महन्त फरारी बाबा ने कहा कि जहां ’मेरा‘ और ’मैं‘ पैदा हो जाता है, वहां खुद-ब-खुद ही दूसरा आ जाता है। उन्होंने कहा कि हर धर्म ’मैं‘ को ख्ात्म करके मनुष्यता के भले की बात करता है, लेकिन आज धर्मों के नाम पर लडी जा रही लडाई के पीछे राजनीतिक स्वार्थ ही है। आज खेद इस बात का है कि बोलने वाले बहुत हो गये हैं, और सुनने वाले कम हैं। इसका कारण अहंकार और ’मैं‘ है। यहीं ’मैं‘ सबसे खतरनाक है। उन्होंने कहा कि अब तक धर्मों के पागलों ने छोटी लडाइयां ही दी हैं, पर भविष्य में होने वाली ग्लोबलाइजेशन की लडाई विश्व के लिए तबाही साबित होगी। ’बौद्ध धर्म‘ के लामा लोब जांग ने कहा कि आज के युग में शिल्प विज्ञान की सुविधाओं से फशयदे और शान्ति अस्थायी हैं। जबकि स्थायी शान्ति आध्यात्मिक तरक्की से ही की जा सकती है। मौलाना डॉ. जैसमीन अली उसमानी जो कि उर्दू अकादमी, लखनऊ और बरेली मदरसों के अगुवा हैं, ने दोनों देशों के बीच शान्ति और खुशहाली के लिए अपने विचार रखे और सम्मेलन के दौरान अमन (शान्ति) पर जोर दिया और फोकलोर रिसर्च अकादमी के आगुवाओं को बधाई दी। पाकिस्तान से आए हाफिजष् हुसैन अहमद (एम.एन.ए.) एवं चौधरी मंजूर अहमद (एम.एन.ए.), कसूर पाकिस्तान के भाषण के दौरान तो सारा हॉल ही बार-बार तालियों से गूंजता रहा। उन्होंने कहा कि एटम बम्बों पर अरबों खर्च करके भी हमारे मुल्क ने हमें अनपढता, बेरोजष्गारी और भुखमरी दी है। पाकिस्तान में पैदा होने वाला बच्चा अपने सिर पर ३२०००/- रुपये का और हिन्दुस्तान में ४०,०००/- रुपये का कर्ज लेकर जन्म लेता है, जबकि उसका कसूर कोई नहीं है। उन्हने कहा कि अगर लडना ही है तो इन सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध लडा जाए। यह काम किसी भी मुल्क की सरकार नहीं करेगी, क्योंकि सरकार की तो, खुद की रोटी इससे चलती है। यह काम तो दोनों मुल्कों के लोगों को ही करना पडेगा। शिरोमणि अकाली दल के जनरल सेक्रेटरी कैप्टन कंवलजीत सिंह ने कहा कि कोई भी धर्म इन्सान को मारने की आज्ञा नहीं देता। तीन शक्तिय के प्रबल होने पर इन्सानियत का कत्ल होता है और वे हैं-लोभ, मोह और अहंकार। भूतपूर्व सांसद जगमीत सिंह बराड ने कहा कि हिन्द-पाक दोस्ती के साथ-साथ दक्षिण एशिया के क्षेत्रा में अमन की खातिर जब उन्होंने अकादमिक अगुवाओं के साथ मिलकर ११ साल पहले सरहद पर मोमबत्तियां जलानी शुरू कीं तो कुछ लोगों ने इसको पागलपन कहा था, पर आज यह दोस्ती जष्रूरत बन गई है। हर तरफश् से धर्मों के द्वारा विश्व शान्ति करने की मांग हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारे आंसू अमेरिका को नहीं पोंछने आना, ये हमें खुद ही पोंछने पडेंगे। केसगढ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी तरलोचन सिंह ने कहा कि सिक्ख धर्म तो शुरू से ही ’सरबत के भले‘ का सन्देशा देता है और हर सिक्ख अरदास में यही मांगता है। इस विषय पर डॉ. जोध सिंह ने पर्चा पढा, जबकि निर्मला देशपांडे (एम.पी., राज्य सभा) ने मोबाइल पर ही अपना सन्देश दिया। पुण्य-प्रज्ञा ने इस मौके पर आचार्य महाप्रज्ञा की विशेष तौर से भेजी कविता ’शान्ति का सन्देश‘ सुनायी। हिन्द-पाक के दोस्ती मंच के जनरल सेक्रेटरी सतनाम सिंह माणक ने सम्मेलन की प्रबन्धक जत्थेबन्दियों की तरफ से दोनों मुल्कों में शान्ति स्थापित करने के लिए किए गए यत्नों पर रोशनी डाली और सम्मेलन के मुख्य विषय पर विचार प्रकट किया। परमजीत सिंह गंडीविन्ड, रंजीव शर्मा, ओंकार सिंह राजाताल, सिंह गुरुदेव सिंह, महिलांवाला, दिलबाग ंसह झबाल, दिलबाग सिंह सरकारिया, रंजीत सिंह राणा के अतिरिक्त आए हुए धार्मिक और राजनीतिक नेताओं को शान्ति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। सम्मेलन की समाप्ति के बाद से सारे धार्मिक नेताओं ने सफश्ेद रंग के कबूतर उडाकर विश्व शान्ति का सन्देश दिया। प्रधान, फोक्लोर रिसर्च अकादमी (रजि.)



Discuss this topic on KhabarExpress Forum 

Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 


October, 2006 <br> Sponsered by : Decor Home, BikanerOctober, 2006
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
January, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerJanuary, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
February, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerFebruary, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
March, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerMarch, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
April, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerApril, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
May, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerMay, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
June, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerJune, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ? | News Ticker
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Nagar Ek - Nazaare Anek, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares