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Vartmaan Sahitya ::February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner दो-दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद एवं कवि-सम्मेलन
डॉ. रवीन्द्रनाथ मिश्र
हिन्दी की शैक्षणिक-साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ’प्रयास‘ ने भारतीय भाषाओं के पारस्परिक सहयोग एवं राष्ट्रीय एकता को बढावा देने के लिए ’अंतिम दो दशक का भारतीय साहित्य‘ विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद एवं कवि-सम्मेलन का आयोजन किया। प्रख्यात समालोचक प्रो. परमानंद श्रीवास्तव ने संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कहा कि गद्य हमारे समय की सबसे बडी शक्ति है। हिन्दी के बहुत से कवि एवं कवयित्रिायों द्वारा गद्यात्मक कविताएं लिखी जा रही हैं। अंतिम दशक का साहित्य कई मायनों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। मुख्य अतिथि श्री मनोहर पर्रीकर, पूर्व मुख्यमंत्राी, गोवा सरकार ने कहा कि मेरी भाषा कोंकणी है इसलिए, जब हम दूसरी भाषा में बात करते हैं तो बहुत सावधान रहना पडता है क्योंकि भाषा में थोडी सी गलती से बहुत अर्थ परिवर्तन हो जाता है। संस्था के संस्थापक सदस्य एवं भूतपूर्व अध्यक्ष प्रो. बी.डी. मिश्र ने कहा कि जिस संस्था का हम लोगों ने बीजारोपण किया था, आज वह काफशी ऊंचाई पर है। संगोष्ठी का प्रथम सत्रा प्रो. बी.डी. मिश्र की अध्यक्षता में ’अंतिम दो दशक का हिन्दी साहित्य‘ विषय पर सम्पन्न हुआ। प्रो. परमानंद श्रीवास्तव ने ’कविता का विस्थापन अर्थात् हिन्दी कविता के बीस साल‘ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए त्रिालोचन की कविता से अपनी बात शुरू की। इस कडी में उन्होंने धूमिल, केदारनाथ सिंह, शमशेर बहादुर सिंह आदि कवियों की कविताओं के वैशिष्ट्य पर प्रकाश डाला। डॉ. शोभा वेरेंकर एवं श्रीमती भारती परब ने क्रमशः ’दशवें दशक के हिन्दी उपन्यास की प्रवृत्तियां‘ एवं ’औपन्यासिक परिवेश‘, श्रीमती मॅग्डालिन डिसूजा और श्रीमती उमा प्रियोळकर ने ’नवें और दशवें दशक की हिन्दी कहानियों पर तथा डॉ. रवीन्द्रनाथ मिश्र ने ’अंतिम दशक का हिन्दी नाटक ः समय और समाज‘ विषय पर आलेख प्रस्तुत किए। दूसरा सत्रा (२ः३० बजे से ५ः०० बजे) प्रो. परमानंद श्रीवास्तव की अध्यक्षता में मलयालम, मराठी एवं उर्दू साहित्य पर सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. रेाहिताश्व शर्मा (डीन, भाषा संकाय, गोवा विश्वविद्यालय) उपस्थित थे। प्रो. मोहनन (हिन्दी विभाग, कोचीन विश्वविद्यालय) ने ’मलयालम साहित्य‘, डॉ. इशरत खान ने ’उर्दू साहित्य‘, डॉ. वृषालीमान्द्रेकर एवं डॉ. अशोक मणगुतकर ने क्रमशः मराठी आत्मकथा‘ और ’मराठी कविता‘ पर लेख पढे। प्रो. रोहिताश्व शर्मा ने संस्था द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों की प्रशंसा की। अंत में अध्यक्ष महोदय ने हिन्दी साहित्य पर विस्तार से चर्चा की। सुश्री किरण पोपकर ने कार्यक्रम का संचालन एवं डॉ. वृंदा माधव केळकर ने आभार व्यक्त किया। चौथा सत्रा श्री गुरुदास सावळ (अध्यक्ष, मराठी अकादमी, गोवा) की अध्यक्षता में ’मराठी एवं कन्नड साहित्य‘ विषय पर सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मराठी विभाग, गोवा विश्वविद्यालय के डॉ. वासुदेव सावंत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। प्रो. टी.वी. कह्विमधि (हिन्दी विभागाध्यक्ष, कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड) ने ’कन्नड साहित्य‘, प्रो. विद्याप्रभुदेसाय और डॉ. बालकृष्ण कानोलकर ने क्रमशः ’मराठी कथा साहित्य‘ और ’मराठी नाटक साहित्य‘ पर आलेख पढे। सावंतजी एवं अध्यक्ष महोदय ने भी अपने विचार विस्तारपूर्वक रखे। श्रीमती आशा गहलोत ने संचालन और डॉ. सोनिया सिरसाट ने आभार प्रदर्शन किया। समापन समारोह प्रो. मोहनन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। प्रो. टी.वी. कह्विमधि एवं श्री मोहनदास सुर्लेकर (उपाध्यक्ष, आई.एम.बी., पणजी) क्रमशः मुख्य अतिथि एवं सम्मानीय अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद थे। अंत में डॉ. रवीन्द्रनाथ मिश्र ने सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। हिन्दी विभाग, गोवा विश्वविद्यालय, गोवा-४०३२०६
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