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Vartmaan Sahitya ::February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner गांव जोकहरा के बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा
विजय भट्ट, महासचिव
ग्रामीण अंचल के अधिकांश बच्चों को शिक्षा अभाव, विपन्नता, हीनता की मार झेलनी पडती है जो उनकी अच्छी खासी प्रतिभा के चिथडे कर देती है। ऐसे विषम हालातों में जीते हुए ग्रामीण अंचल के बच्चों को यदि प्रोत्साहन, प्रशिक्षण व जागरूकता दी जाय तो ये सिद्ध कर सकते हैं कि वे किसी से, किसी भी क्षेत्रा में कम नहीं होंगे। इसकी एक झलक दिखाई दी जनपद-आजमगढ (उत्तर प्रदेश) के गांव जोकहरा में जहां चिल्ड्रेन फिल्म सोसायटी ऑफ इण्डिया द्वारा दो दिवसीय बाल फिल्मोत्सव का आयोजन किया गया। इसके अन्तर्गत कई बेहतरीन बाल फिल्मों का प्रदर्शन हुआ और फिल्म विशेषज्ञ द्वारा बाल फिल्म निर्माण की तकनीकें समझायीं गयीं। बाल फिल्म निर्माण प्रशिक्षण के उपरान्त कार्यशाला में जोकहारा के बच्चों द्वारा प्रदर्शित रचनात्मक प्रतिभा को देखकर फिल्म विशेषज्ञ श्री संस्कार देसाई व अन्य हस्तियां बहुत रोमांचित हुई और उन्होंने उम्मीद जताई कि इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जो फिल्म जगत में अपनी खासी पहचान बना सकते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश का गांव जोकहरा एक दशक पूर्व अन्य गांवों की तरह जातिगत व्यवस्था एवं सांस्कृतिक दरिद्रता से ग्रस्त था। आज इसमें काफी बदलाव आ चुका है। इसका श्रेय गांव में स्थापित श्री रामानन्द सरस्वती पुस्तकालय को जाता है। इस पुस्तकालय की स्थापना विख्यात साहित्यकार श्री विभूतिनारायण राय ने सन् १९९३ में छोटे स्तर पर ही की थी। पुस्तकालय ने आज काफी बडा रूप धारण कर लिया है। इसके माध्यम से जोकहरा व आस-पास के क्षेत्राों के लोगों को जहां समाचार-पत्रा, पत्रिाका व पुस्तकों को पढने की सुविधा दी गयी वहीं समय-समय पर साहित्य, कला व संस्कृति से जुडी विभिन्न गोष्ठी व कार्यशालायें आयोजित कर लोगों की रचनात्मक क्षमता के उजागर होने का अवसर दिया गया। दो वर्ष पूर्व राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली द्वारा यहां आयेाजित एक माह की थियेटर कार्यशाला ने तो यहां के लडके-लडकियों की प्रतिभा में ऐसे पंख लगा दिये कि वे नाटकों की दुनिया में काफी ऊंचाई तक उडने लगे। इस कार्यशाला में प्रशिक्षित बच्चों ने दिल्ली, इलाहाबाद व लखनऊ आदि महानगरों में नाटकों का सफल मंचन कर अनूठी पहचान बना ली है। पुस्तकायलय के माध्यम से संचालित विभिन्न गतिविधियों की सफलता से उत्साहित श्री वी.एन.राय ने इस वर्ष जोकहरा में एस.आर.एस.पी. फिल्म सोसायटी का गठन किया। यह सोसायटी प्रत्येक रविवार व शनिवार को चुनिंदा फिल्में दिखाकर गांववासियों की चेतना को संवारने का काम कर रही है। सोसायटी को और अधिक सार्थक बनाने के उद्देश्य से श्री राय ने चिल्ड्रेन फिल्म सोसायटी ऑफ इण्डिया की अध्यक्षा सुश्री नफीसा अली से सोसायटी द्वारा एक बाल फिल्मोत्सव जोकहरा में आयोजित करने के लिये अनुरोध किया था। चिल्ड्रेन फिल्म सोसायटी की ओर से मुम्बई से पधारे फिल्म विशेषज्ञ एवं फिल्मोत्सव प्रभारी श्री संस्कार देसाई ने बातचीत में स्वीकार किया कि सोसायटी के कार्यों में सुधार की आवश्यकता है। श्री देसाई ने कहा कि हमारे यहां सिनेमाहालों में जो फिल्में प्रदर्शित होती हैं उनके संचालन में मुख्य भूमिका वितरकों की होती है और वितरक उन्हीं फिल्मों में रुचि लेते हैं जिनमें मुनाफा अधिकतम दिखाई देता है। फिल्मकार श्री संस्कार देसाई ने एक सवाल के जवाब में कहा कि फिल्में बच्चों को अपराध के गर्त में धकेल रही है। उन्होंने कहा कि जो भी फिल्में बन रही हैं वे किसी आयु या वर्ग विशेष की जरुरतों को ध्यान में रखकर नहीं बन रही हैं। वे सभी लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने वाली होती हैं। बच्चे भी इन्हें फिल्मों को देखने के लिये विवश हैं। कच्ची उम्र में बच्चे वे सब कुछ देख रहे हैं जो परिपक्व उम्र में देखना चाहिये। वे ऐसे सपने देखने लगते हैं। इससे उनके तरह-तरह की आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने की सम्भावना बढ जाती है। १९५ ई/१ए, राजरुपुर, इलाहाबाद-२११०११
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