|
Vartmaan Sahitya ::February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner भारत ज्ञान विज्ञान समिति उत्तरांचल का तृतीय राज्य सम्मेलन
विजय भट्ट, महासचिव
प्रथम दिन ः उत्तरांचल ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य सम्मेलन के अवसर पर देहरादून में उत्तरांचल ज्ञान विज्ञान समिति का राज्य सम्मेलन संपन्न हुआ जिसमें आन्दोलन के संस्थापक दिवगंत श्री पुष्प राज चबाक को याद किया गया। उद्घाटन सत्रा में राष्ट्रीय समन्वयक श्री वी.के. जय सोमनाथन ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज असली मुद्दा विकास का है, रोजगार का है, महिला समानता का है। उन्होंने कहा कि साक्षरता आन्दोलन के साथ भारत ज्ञान विज्ञान समिति की स्थापना हुई। उन्होंने चर्चा को आगे बढाते हुए समाज में महिलाओं की स्थिति पर कहा कि देश में महिलाएं कुपोषण का शिकार है। महिलाओं की आधी आबादी होने के बावजूद संसद में कुल ४५ महिला सांसद ही है। उ.प्र. ज्ञान विज्ञान समिति की अध्यक्ष डॉ. नमिता सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि उत्तरांचल में लोक संस्कृति की वृहद विरासत है। इसको बचाने की जरूरत है। उत्तरांचल से नौजवानों का पलायन हो रहा है। यहां की स्त्रिायों की जिजीविषा प्रेरणादायी है। औरतों की समस्याएं और दर्द का रिश्ता हमें एक सूत्रा में बांधता है। जल जंगल जीवन पर अपने अधिकार की बात है। हम केवल मध्यवर्ग की औरतों की नहीं वरन् बडे समूह की बात करते हैं उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की बात करते ह। हमारे बीच जो जाति भेद की जो दीवारें हैं वो हमारी एकजुटता में बाधक हैं। अखिल भारती ज्ञान विज्ञान नेटवर्क के महासचिव डॉ. अमित सैन ने ’’साम्राज्यवादी भूमण्डलीकरण के दौर में ज्ञान विज्ञान आन्दोलन की भूमिका‘‘ विषय पर बोलते हुए कहा कि विज्ञान हमें प्रश्न करने पर मजबूर करता है। प्रश्न करने पर ही हम अपने समाज को समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज जिस स्थिति में मनुष्य पहुंचा है वह विज्ञान के कारण ही। ज्ञान और विज्ञान को हम अपने समाज की जिन्दगी को बदलने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। आज पैसे खर्च करने वालों की संख्या बढी है। किन्तु इसके साथ ही यह भी सत्य है कि इस दुनिया ने ऐसी गरीबी भी पहले नहीं देखी जैसी आज है। १० प्रतिशत अमीरों की दुनिया अलग है और ९० प्रतिशत की अलग। यह कहा जा सकता है कि हिन्दुस्तान प्रगति पर है। दुनिया के चार पांच देशों में शामिल है किन्तु शायद ही कभी किसी अखबार या न्यूज चैनल में जिक्र मिलेगा कि कि महाराष्ट्र में इस महीने किसानों ने आत्म हत्या नहीं की। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में डॉ. एस.के. कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सार्वभौमीकरण केवल प्राथमिक शिक्षा का ही नहीं वरन् अनौपचारिक शिक्षा का भी सार्वाभौमीकरण करें। उदय किरोला व उनके साथियों द्वारा ’जैता एक दिन तै आलो‘‘ गीत की प्रस्तुति से दूसरे दिन की कार्यवाही प्रारम्भ हुई। दूसरे दिन के पहले सत्रा में गोष्ठी का विषय था ’’आत्म निर्भर विकास की चुनौतियां और विकास के रास्ते‘‘। गोष्ठी प्रारम्भ करते हुए सत्रा के संयोजक प्रो. वी.के. जोशी ने पैनल के समक्ष विषय की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि हमें इस बात पर विचार करना होगा कि हम विकास का कौन-सा रास्ता अपनायें जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। राष्ट्रीय स्तर पर हमें आत्म निर्भर होना है किन्तु राज्य के संदर्भ में आज आत्मनिर्भरता उतना महत्व नहीं रखती। डॉ. प्रकाश झा, पर्यावरण सलाहकार इन्जीनियर, डॉ. अरुण कुकशाल सहायक निदेशक एस.सी.ई.आर.टी. उत्तरांचल, बी.आर. भट्ट ’वैज्ञानिक औषधीय वनस्पति‘, श्री गजेन्द्र वर्मा, शैलेन्द्र इन्द्रेश नोटियाल व देहरादून से ज्योति ने भी हिस्सा लिया। अन्त में प्रो. वी.के. जोशी ने सभी वक्ताओं का धन्यवाद देकर इस सत्रा को समाप्त किया। ’’समता मूलक समाज के निर्माण में महिला आन्दोलनों की भूमिका‘‘ सत्रा में चेतना थपलियाल, डॉ. अनिता दिघे अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की महासचिव इन्दु नोडियाल, महिला समाख्या की गीता गैरोला, दिशा समाजिक संस्था की जाह्ववी तिवारी व भारत ज्ञान विज्ञान समिति से पुष्पा किमोठी ने अपने विचार प्रस्तुत किये। सांगठनिक सत्रा में श्री एम.एल. थपलियाल की अध्यक्षता में सांगठनिक सत्रा प्रारम्भ हुआ। इस सत्रा में केन्द्रीय प्रर्यवेक्षक के रूप में राष्ट्रीय समन्वयक श्री वी.के. जय सोमनाथन उपस्थित थे तथा संचालन सचिव श्री कमलेश खन्तवाल ने किया। भारत ज्ञान विज्ञान समिति उत्तरांचल के महासचिव राकेश गैरोला ने एक लिखित रिपोर्ट प्रतिनिधियों के समक्ष चर्चा हेतु प्रस्तुत की। तीसरे व सम्मेलन के अंतिम दिन भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. कुलदीप तंवर तथा अखिल भारतीय ज्ञान विज्ञान नेटवर्क के संस्थापक डॉ. दिनेश अबरोल भी उपस्थित थे। साथ ही पडोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के ज्ञान-विज्ञान आन्दोलन के नेतृत्वकारी साथी श्री एस.एस. चन्देल, श्री जिया नंद तथा रमेश वर्मा भी सम्मेलन में बतौर अतिथि उपस्थित रहे। शैलेन्द्र घपोला, पुष्पा किमोठी, हेम पाठक, प्रकाश जोशी, जोध सिंह बिष्ट, नित्यांनद बहुगुणा, जीवन सिंह दानू, सुनील धमसाना, प्रिया उनियाल तथा सालिक राम प्रजापति ने तथा नैनीताल से लीला कोश्यारी ने बहस में हिस्सा लिया तथा अपने-अपने जिलों की रिपोर्ट एवं भविष्य कि कार्ययोजना प्रस्तुत की। राष्ट्रीय पर्यवेक्षक श्री बी.के. जयसोमनाथन ने नवगठित कार्यकारिणी व पदाधिकारियों घोषणा की। भारत ज्ञान विज्ञान समिति, उत्तरांचल
Discuss this topic on KhabarExpress Forum
|
|
October, 2006 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | January, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | March, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | April, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | May, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | June, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | |
|