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Vartmaan Sahitya ::February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner तीन गजलें
चाँद शेरी
एक खुश्क मौसम रुत सुहानी ले गया चहचहाती जिष्न्दगानी ले गया मन्दिरों का मस्जिदों का आदमी बस्तियों की शादमानी ले गया नाग-फनियों का हमें देकर फश्रेब वो हमारी रात-रानी ले गया बन के दाता इक भिखारन का कोई चन्द सिक्कों में जवानी ले गया या खुदा कोई लुटेरा लूट कर मेरे दिल की राजधानी ले गया ख्ात का मज्ष्मूं भांपने वाला कोई प्यार के किश्स्से-कहानी ले गया अब कहां ’शेरी‘ वो मंजिष्ल के निशां आके तूफां हर निशानी ले गया
दो ’वहां पर अम्न क्या होगा सुकूं की बात क्या होगी, ’जहां बारिश लहू की हो वहां बरसात क्या होगी‘ कभी मेरठ कभी दिल्ली कभी पंजाब में कफ्र्यू भला इससे भी बिगडी सूरते-हालात क्या होगी जहां इंसाफश् बिकता हो जहां दौलत की पूजा हो वहां जिष्क्रे वफश इंसानियत की बात क्या होगी गष्रीबों को मय्यसर अब न रोटी न कपडा है ऐ आजषदी तेरी इससे बडी सौगात क्या होगी तुझे ’शेरी‘ लहू देकर भी इस की लाज रखनी है वतन की आबरू पर जान की औकशत क्या होगी।
तीन ले के ख्ान्जर निकला रहबर मंदिर -मस्जिद दिल के अन्दर आंखों में है सारा मन्जष्र बिन पानी के धरती बन्जर सच बोला तो खाऐ पत्थर तुझमें - मुझमें क्या है अन्तर ’शेरी‘ गष्जष्लें जादू मन्तर के-३०,आई.पी.आई.ए., रोड नं-१ कोटा-३२४००३ (राजस्थान)
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