|
Vartmaan Sahitya ::March, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner ’दिनकर का काव्य‘ विषय पर व्याख्यान
डॉ. सुनील विक्रम सिंह
तिलकधारी महाविद्यालय के बलरामपुर हाल में ’हिन्दी साहित्य परिषद‘ के तत्वाधान में प्रोफेसर प्रमोद कुमार सिंह का व्याख्यान हुआ। व्याख्यान का विषय था-’दिनकर का काव्य‘। बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में हिन्दी विभाग के भूतपूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर प्रमोदकुमार सिंह ने कहा कि दिनकर द्वन्द्वग्रस्त कवि नहीं अपितु द्वन्द्वों के कवि हैं। दिनकर के काव्य में हुंकार भी है और झंकार भी। दिनकर निश्चित रूप से शिरीष के फूल की तरह हैं। हिन्दी के अधिकांश विद्वान दिनकर जी की १९२९ में प्रकाशित कविता ’वारदोली विजय‘ को उनकी प्रथम कविता मानते हैं। लेकिन प्रोफेसर प्रमोद कुमार सिंह जी की स्थापना है कि १९२९ में प्रकाशित ’बागी‘ दिनकर पहली प्रकाशित कविता है। यह कविता महान क्रान्तिकारी यतीन्द्रनाथ दास की शहादत पर लिखी गई थी। ’कुरूक्षेत्रा‘ युद्ध के दाहक परिणाम से विषण्ण होरक भी युद्ध की अनिवार्यता को अस्वीकार नहीं करता है। यह न्याय के लिए होने वाले संघर्ष को उचित ठहराता है। दिनकर का झुकाव सशस्त्रा क्रान्ति के प्रति सदैव रहा है। एम.ए. ’हिन्दी‘ पूर्वार्द्ध की छात्राा तसलीमा ने सुन्दर कविता की प्रस्तुति की। मुख्य वक्ता का स्वागत डॉ. माधुरी सिंह और डॉ. अरुण कुमार सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सरोज सिंह ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनील विक्रम सिंह ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोग थे-डॉ. वशिष्ठ अनूप, डॉ. शीला ंसंह, डॉ. सुषमा सिंह, डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित, डॉ. पी.सी. विश्वकर्मा, डॉ. आर.एन. त्रिापाठी, सत्यप्रकाश अनाम, उमाशंकर काका, डॉ. रामलखन सिंह।
Discuss this topic on KhabarExpress Forum
|
|
October, 2006 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | January, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | March, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | April, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | May, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | June, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | |
|