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Vartmaan Sahitya ::March, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner कृति ’चिन्ता ः सहचिन्ता‘ का लोकार्पण समारोह
कमलेश कुमार
सुप्रसिद्ध-चिन्तक व आलोचक प्रोफेसर डॉ. विमल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित कृति ’चिन्ता-सहचिन्ता का लोकार्पण समारोह जोधपुर में सम्पन्न हुआ। इस कृति के लोकार्पण समारोह में गांधीवादी विचारक नेमीचंद्र जैन भावुक ने कहा कि प्रो. विमल ने देश के अराजक राजनीतिक परिदृश्य के बीच सक्रिय रहकर प्रतिरोधात्मक ताकतों को मजबूती प्रदान की। उनकी चिन्तन दृष्टि आदमी की तकलीफों से सहानुभूति रखती है। सुप्रसिद्ध कथाकार-कवि व न्यायवेत्ता मुरलीधर वैष्णव ने कहा कि समाज से सरोकार रखने वाली विचार दृष्टि ही सदैव महत्वपूर्ण रही है और ऐसे व्यक्तियों ने ही समाज को आगे बढाया है। राजस्थानी के कवि-आलोचक डॉ. आईदानसिंह भाटी ने कहा कि विचार-दृष्टि के साथ ही डॉ. विमल में एक संवेदनशील तडप है और इसी तडप को उन्होंने अपने शिष्य समुदाय में बांटा है। अपने अभिनन्दन-सम्मान के अवसर पर बोलते हुए प्रोफेसर विमल ने कहा कि मैंने सदैव प्र्रयत्न किया है कि साहित्य के माध्यम से हम समाज को बेहतर बनाने का श्रम करें। अपने सम्मान को ’विचारों‘ का सम्मान बताते हुए प्रो. विमल ने कहा कि यहीं पर उन महत्वपूर्ण कृतियों का संरक्षण हुआ है जिनमें कामायनी जैसी कृतियां प्रमुख हैं। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. लक्ष्मण सिंह राठौड ने कृति ’चिन्ता-सहचिन्ता‘ का लोकार्पण करते हुए कहा कि सार्थक और सरोकार दृष्टि सम्पन्न गुरुजन ही राष्ट्र और समाज के कर्णधार बनते हैं। इस अवसर पर कलिंगपोंग-कालेज की व्याख्याता कु. कंचन, सुप्रसिद्ध गीतकार दिनेश सिन्दल, वरिष्ठ कवि मदन मोहन परिहार व डॉ. कालूराम परिहार ने भी विचार व्यक्त किये।
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