|
Vartmaan Sahitya ::April, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner हिन्दी की हड्डियों में साम्राज्यवाद-विरोध की अस्थि-मज्जा है - सविता पाण्डे
वर्ष २००६ के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित लेखकों को कमानी सभागार में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष प्रो. गोपीचंद नारंग ने २० फरवरी को ’साहित्योत्सव २००७‘ के अन्तर्गत पुरस्कृत किया। ’संशयात्मा‘ के रचनाकार चर्चित कवि ज्ञानेन्द्रपति सहित २४ भारतीय भाषाओं के कवि-लेखकों को ५०,००० रुपये का चैक और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। २१ फरवरी की सुबह लेखक-सम्मेलन में रचनाकारों ने रचना-प्रक्रिया के अनुभवों और उद्देश्यों को रखा। ज्ञानेन्द्रपति ने अपने वक्तव्य में कहा कि नव-साम्राज्यवाद के इन रौबिले-सजीले दिनों में हिन्दी, कविता के घर में एक तरह की उदासी अटी हुई है। लेकिन हताशा नहीं। उन्होंने कहा कि परित्यक्त सच्चाइयों के बीच भी जीवंत-ज्वलंत सार्थक की तलाश में घुरबिनिया बच्चो की तरह घूमता रहता हू.ँ। उन्होंने ने कहा कि बाजार से बेजार होना हिन्दी कवि को हाशिये पर डालता है। लेकिन यही उसका गौरव भी है। हिन्दी कवि के यहाँ हाशिये की जन्दगी केन्द्रीयता पाती है। हिन्दी के महान समालोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल को उद्धृत करते हुये ज्ञानेद्रपति ने कहा कि बीसवीं शती के आरंभ में उन्होंने कवि-कर्म की कठिनता की बात कही थी, उन्हें इसका ठीक-ठीक अनुमान नहीं हो सकता था कि शती के अंत तक आते-आते एक ओर तो सभ्यता नृशंसता के नग्न रूप में खडी होगी और दूसरी ओर वह इतनी कुटिल होगी कि अधिसंख्य लोगों को अनुकूलित करने में कामयाब होगी। उनका कहना था कि आज हिन्दी कवि को आंखिन देखी कहने वाले कबीर से लेकर विश्व-चेतस् कवि मुक्तिबोध तक का ही साथ नहीं है, बल्कि अंग्रेजी के व्हिटमैन, रूसी के मायकोवस्की, जर्मन के बेख्त स्पेनिश के नेरूदा और तुर्की के नाजम हिकमत भी उसके सगे हैं।
Discuss this topic on KhabarExpress Forum
|
|
October, 2006 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | January, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | March, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | April, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | May, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | June, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | |
|