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Vartmaan Sahitya ::April, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ हमारी रुचि बदल रही हैं, विश्वनाथ त्रिपाठी - विनय कान्त मिश्र
समाज के साहित्यिक-सांस्कृतिक विकास के लिए सिद्धार्थनगर में ’फ्री थिंकर्स सोसायटी‘ का गठन किया गया। ’फ्री थिंकर्स सोसाइटी‘ सिद्धार्थनगर के प्रगतिशील सोच के बुद्धिजीवियों की संस्था है। समाज के परिवर्तन में विचारों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। ’फ्री थिंकर्स सोसाइटी‘ का प्रमुख उद्देश्य किसी भी विषय पर निष्पक्ष राय से समाज को अवगत कराना है। सामाजिक विषयों पर निष्पक्ष राय के लिए ’फ्री थिंकर्स सोसाइटी‘ गोष्ठियाँ आयोजित करता है और ज्वलन्त विषयों पर आमराय और जन-सहमति बनाने का प्रयास करता है। ७ नवम्बर २००६ को सिद्धार्थनगर के जिला पंचायत सभागार में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी तथा डॉ. वेद प्रकाश, रीडर, अ.मु.वि. अलीगढ मुख्य वक्ता थे। गोष्ठी का विषय ’सामाजिक विघटनः कारण व निवारण‘ था। डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने, देश में एक बडा सांस्कृतिक आंदोलन चलाये जाने पर बल दिया। आज हमारे आदर्श भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद आदि महापुरुष नहीं रह गये हैं बल्कि नई पीढी के आदर्श अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर ह जो धन हासिल करने के लिए कोका-कोला जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रचार कर रहे हैं। हमें अपनी अभिरुचि भारतीयता के अनुरूप बदलनी होगी, इसके लिए देश में सांस्कृतिक आंदोलन चलाये जाने की जरूरत है। एकता का अर्थ एकरूपता नहीं है। दुर्भाग्य से अमरीकी साम्राज्यवाद हम में एकरूपता पैदा कर रहा है। हमें इसके विरुद्ध लडना होगा। परिचर्चा में अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. वेद प्रकाश ने सामाजिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रेम-विवाह पर हत्याएं भी होती हैं और समर्थन भी होता है। वस्तुतः हमारा लगातार संवेदनहीन होना विघटन का प्रमुख कारण है। टेलीविजन चैनल जिस तरह से दर्दनाक घटनाओं को हंसी के माहौल में सहजता से परोस रहे हैं उससे भी हमारी संवेदना मरती जा रही है। इस अवसर पर डॉ. सच्चिदानंद मिश्र ने वर्ण-व्यवस्था जैसी दरार को सामाजिक विघटन का मुख्य कारण बताया। इस दरार को बिना पाटे सामाजिक एकता नहीं हो सकती। परिचर्चा में भाग लेते हुए श्री रमित शर्मा ने अतीत के बिखराबों का हवाला देते हुए कहा कि फिलहाल प्रगति के साथ समाज जुडाव की ओर अग्रसर है। संसाधन सही ढंग से बँटेगे तो विघटन घटेगा। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी राजकुमार श्रीवास्तव व अपर जिलाधिकारी प्रदीप कुमार ने सामाजिक विघटन रोकने के लिए शिक्षा को बढावा देने की वकालत की तथा विकास की गति बढाये जाने पर बल दिया। पूर्व पालिका अध्यक्ष एस.पी. अग्रवाल ने कहा कि विघटन हमें विरासत में मिला है। जिसे वोट की राजनीति व हमारी स्वार्थपरता ने विकराल रूप देने का काम किया है। परिचर्चा में डॉ. ए.एस. सिद्दीकी ने ’इस्लाम एवं दहशतगर्दी‘ विषय पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। विषय-प्रवर्तन करते हुए विनय कांत मिश्र न कहा जब तक दलित, अल्पसंख्यक और स्त्रियों को समाज की मुख्यधारा में शमिल नहीं किया जायेगा तब तक सामाजिक विघटन को रोका नहीं जा सकता। अमेरिका ने दुनिया के तमाम मुस्लिम राष्ट्रों पर जिस तरह से बमबारी की है, वह जघन्य अपराध है। स्त्री को कभी स्त्री नहीं समझा गया। जब तक स्त्री को स्त्री नहीं समझा जायेगा तक तब विघटन नहीं रुकेगा। परिचर्चा का संचालन सोसाइटी के संरक्षक नजीर मलिक ने किया। इस अवसर पर डॉ. राम नरेश मिश्र, डॉ. आद्याप्रसाद मणि त्रिपाठी, रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी, एम.एस. अब्बासी, प्रीति दुबे, रीता दुबे, अनुराधा श्रीवास्तव, अर्चना मिश्रा और जया मिश्रा सहित अब्दुल मोइन खाँ उर्फ चुन्ने भाई, सत्य प्रकाश गुप्त, सन्तोष श्रीवास्तव, सलमान आमिर, जितेन्द्र पांडेय, अरुण गोरखपुरी, विजय कांत मिश्र, अजय कांत मिश्र, शशिकांत उपाध्याय सहित जिले के तमाम पत्रकार और प्रबुद्ध नागरिक मौजूद थे।
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