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लडकियाँ
जिनकी उँगलियाँ पकडकर
पार की थीं हमने सदियाँ
वे लडकियाँ पता नहीं कहाँ चली गयीं
जरा से स्नेह से
भीग जाते थे जिनके मन
महकने लगती थीं रातरानी सी।
जरा से स्पर्श से
छूने लगती थीं आसमान।
जरा सी बारिश में भीग कर
लहलहाने लगती थीं फसलों सी
बिखेरने लगती थीं हरापन
जीवन की खुशी।
पता नहीं कहाँ खो गईं वे लडकियाँ
जिनकी संगत में
खिल जाते थे पेडों के भी चेहरे
भूल जाते थे हम
पतझर की उदास थकान।
हमारी बहुत सी मधुर यादें
उन्हीं के पास थीं सुरक्षित।
हमारे बहुत से प्रेम
उन्हीं के पास थे रेहन।
हमारी बहुत सी जिज्ञासाएँ
उन्हीं की आँखों में थीं कैद।
हमारी बहुत सी खुशियाँ
उन्हीं की मासम मुस्कराहट में छुपी थीं।
पता नहीं कहाँ खो गईं वे लडकियाँ।
सुई जितनी छोटी तो नहीं थीं
कि खो जाने पर नहीं मिलतीं
फिर भी लडकियाँ हैं कि नहीं मिल रहीं
उन भूरी घरू चिडयों की तरह
जो विलुप्त हो गईं हैं
गंगा के आस पास वाले इलाकों से।
पर वे चिडयाँ नहीं थीं
वे आकाश गंगा का कोई तारा भी नहीं थीं
कि दूसरे किसी ग्रह से टकराकर
ख्ात्म हो गया हो जिनका वजूद।
वे काँटे भी नहीं थीं कि उन्हें हटा कर
साफ हो गई हों हमारी राहें
वे फूल सी कोमल लडकियाँ थीं
जिनके होने से
महकती थी हमारी साँसें
दमकता था जन्दगी का चेहरा।
उनकी बोल चाल का ढंग
गोर्की की माँ‘ जैसा था
असद जैदी की ’बहनों‘ की तरह
डरी-डरी चलती थीं वे सडकों पर
आलोक धन्वा की कविता से निकली लडकियाँ थीं वे
जो बार-बार आती छतों पर
हमारे लिए प्यार लेकर।
कभी-कभी वे कचरे के ढेर के पास
दिख जाती थीं भगवत रावत की
कचरा बीनने वाली लडकियों की तरह।
कभी-कभी वे यतीन्द्र मिश्र की
कविता में खडी मिल जाती थीं
उन उदास ’वैश्यायों‘ सी सिसकते हुए
सुनाती हुई अपनी व्यथा
दिखाती हुई देह और मन के जख्म।
पता नहीं कहाँ खो गईं वे सभी?
कहीं हम पाखण्ड तो नहीं कर रहे हैं
लडकियों को ढढने का?
बेचारी लडकियाँ तो हमारे डर से
रुख्ासत हो गई हैं कभी की
माँ की कोख से ही
किसी दूसरी अंधेरी दुनिया के लिए।
जिन लडकियों को अभी-अभी देखने की
बात हम कर रहे हैं
वे कहीं उनकी माताएँ तो नहीं थीं
जिनकी कोख में चुभोये हैं हमने
न जाने कितने नश्तर।
और अब हम पुकार रहे हैं उन लडकियों को
जो आई ही नहीं हैं कभी इस धरती पर।
फिर हम क्यों बेचैन हैं उन लडकियों के लिए?
कहीं खत्म तो नहीं होने लगा है
हमारी देह का नमक
दिखने लगी है
साक्षात खडी अपनी मृत्यु।
और बचने के लिए
पुकारने लगे हैं लडकियों को।
क्योंकि हमें पता है
लडकियों की देह में है
नमक का विशाल समन्दर
जो बचा सकता है
हमें असमय मरने से।
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