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Vartmaan Sahitya ::May, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner कहानीकार मुरारी शर्मा की कहानी का एकल पाठ सुरेश सेन निशान्त
गतिषील लेखक संघ हिमाचल प्रदेष के तत्वाधान में कहानीकार मुरारी षर्मा की कहानी का एकल पाठ हुआ। प्रदेष के वरिश्ठ साहित्यकार प्रो. सुंदर लोहिया इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। रविराणा षाहीन ने गोश्ठी की अध्यक्षता की। प्रगतिषील लेखक संघ के महासचिव सुरेष सेन निषांत ने मंच संचालन करते हुए कहा कि मुरारी षर्मा हिमाचली परिवेष और आम आदमी के संघर्श को लेकर इस समय बेहतर कहानियाँ लिख रहे हैं। उनकी कहानियाँ विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाषित हो रही हैं।
इस अवसर पर मुरारी षर्मा ने अपनी ताजा कहानी गुफा-तंत्र का पाठ किया। कवि आलोचक सतीषधर ने कहानी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्म के नाम पर व्याप्त पाखंड का गुफा-तंत्र में भंडाफोड कर मुरारी षर्मा ने अपने प्रगतिषील चिंतन को पुख्ता किया है। इस तंत्र का पर्दाफाष करने में कहानीकार ने आत्मरक्षा के लिए हथियार उठने से भी गुरेज नहीं किया है। प्रकाष पंत ने कहा कि यह कहानी अपने आप में किस्सागोई षैली में है। अंधविष्वास और आस्था की आड में जो कुछ घटा उसका भंडाफोड भी कहानी में हुआ है।
प्रगतिषील लेखक संघ के राज्य अध्यक्ष व वरिश्ठ कवि दीनू कष्यप ने कहा कि हिमाचली कहानी में मुरारी षर्मा से काफी उम्मीदें हैं। गुफातंत्र पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें धार्मिक प्रपंच और वन्य प्राणियों की चिंता को बढया ढंग से उठाया गया है। वन्य प्राणियों की चिंताओं पर लिखी जाने वाली यह पहली कहानी है। सुरेष सेन निषांत ने इस कहानी की तुलना विजयदानदेथा की कहानियों से करते हुए कहा कि जिस तरह से लोक आख्यानों का सहारा लेकर कहानी को बुना गया है, वह अपने आप में सराहनीय प्रयास है। डॉ. विजय विषाल ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो आधुनिक कहानी में प्रयोग हो रहे हैं। मुरारी षर्मा की इस कहानी में भी पत्रकारिता के माध्यम से अंधविष्वास और पर्यावरण का मुद्दा रखा है। साहित्यकार कृश्णचन्द्र महादेविया ने कहा कि कहानी का कथानक बांधे रखता है। पांडवों का संदर्भ कहानी को गरिमा प्रदान करता है।
प्रो. सुंदर लोहिया ने कहा कि कहानी अपना षिल्प ढूंढती है। किस्सागोई कहानी की ताकत है। उनके मुताबिक आज की कहानियों में किस्सागोई खत्म होने से कहानी के पाठक कम हो रहे हैं। कहानी का कथानक इसकी ताकत है। अंधविष्वास का वातावरण कुछ और सघन होना चाहिए था। इसके बावजूद कहानी का सरोकार व्यापक है। इस अवसर पर भीम सिंह चौहान व केषवचन्द्र षर्मा व रविराणा षाहीन ने भी अपने विचार रखे। चर्चा में लवण ठाकुर, देषराज षर्मा व गुमान सिंह ने भी भाग लिया।
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