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Vartmaan Sahitya ::May, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner प्रगतिशील लेखक संघ, बेगूसराय नरेन्द्र कुमार सिंह
बिहार प्रगतिषील लेखक संघ की बेगूसराय इकाई का ७वां जिला सम्मेलन कवि परषुराम सिंह ’परषु‘ नगर सदानंदपुर में २५ फरवरी, ०७ को संपन्न हुआ। प्रतिनिध सत्र का उद्घाटन दिल्ली विष्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. विष्वनाथ त्रिपाठी ने किया।
सचिव नरेन्द्र कुमार सिंह ने प्रतिवेदन पढा और कहा कि जागरुक साहित्यकार, बुद्धिजीवी को अपनी चुप्पी तोडना होगा और नये ढंग से, नयी षक्ति संचय कर बाजारवाद, आतंकवाद, साम्राज्यवाद के साथ सम्प्रदायवाद के विरुद्ध हमला बोलना होगा, विरोध करना होगा तभी हमारी साहित्य और संस्कृति बच सकती है।
प्रतिनिधित्व के पष्चात आमसभा में ’कबीर और उनकी परम्परा‘ विशय पर आलोचक डॉ. विष्वनाथ त्रिपाठी ने कहा कि ’’कबीर नारी विरोधी नहीं थे। यदि वे नारी विरोधी होते तो हरि जननी मैं बालक तोरा‘ कभी नहीं कहते। कबीर ने कहा कि ’जात जुलहामति का धीर।‘ कबीर ने वर्ग और वर्ण दोनों को चुनौती दी है।
दूसरे वक्ता थे युवा हिन्दी प्राध्यापक डॉ. वेदप्रकाष ने कहा कि इस देष में तीन ही आंदोलन हुआ। पहला-भक्ति आंदोलन, दूसरा-स्वाधीनता आंदोलन और तीसरा है-प्रगतिषील आंदोलन। लेकिन तीनों में अन्योन्याश्रय संबंध हैं। कोई भी आंदोलन तभी सफल होता है तब वह जनता का ख्याल रखती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. मदनेष्वरनाथ दत्त ने की। इस अवसर पर युवा कवि अभिरंजन की कविता पुस्तक ’उखडे हुए पौधे का बयान‘ का लोर्कापण डॉ. विष्वनाथ त्रिपाठी ने किया जबकि उसकी समीक्षा वरिश्ठ साहित्यकार डॉ. आनन्द नारायण षर्मा और राजेन्द्र ने की। अंतिम सत्र में कवि गोश्ठी का अयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. आनंदनारायण षर्मा ने तथा संचालन अनिल पतंग ने किया।
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