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ग्वालियर में ’प्राची‘ का चतुर्थ राज्य सम्मेलन सम्पन्न
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विगत १७-१८ फरवरी २००७ को बैंक-कर्मियों के साहित्यिक संगठन ’प्राची‘ का चतुर्थ राज्य सम्मेलन ग्वालियर में सम्पन्न हुआ। यह सम्मेलन विषेश तौर से ’समाज एवं साहित्य पर भूमण्डलीकरण के प्रभावों पर केन्दि्रत था।
उद्घाटन सत्र चैम्बर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के सभागार में दिनांक १७ फरवरी २००७ को सुप्रसिद्ध कवि, आलोचक एवं पत्रकार श्री विश्णु खरे के मुख्य आतिथ्य एवं विख्यात समालोचक श्री कमलाप्रसाद की अध्यक्षता में ’भूमण्डलीकरण और समतावादी समाज का स्वप्न‘ विशय पर केन्दि्रत था। अ०भा० स्टेट बैंक ऑफ इन्दौर अधिकारी समन्वय समिति के महासचिव श्री सत्येन्द्र बिन्दल ने स्वागत भाशण देते हुए कहा कि भूमण्डलीकरण के प्रभावों ने समाज के सामने गंभीर संकट पैदा कर दिया है। इतिहास का अंत, विचार का अंत, उत्तर आधुनिकता और सभ्यता के संघर्श के जुमलों द्वारा चेतना को कुंद करने के प्रयास किये जा रहे हैं। वैचारिक आंदोलन ही विचारहीन का जवाब है।
’’भूमण्डलीकरण तथा समतावादी समाज का स्वप्न‘ पर विचार व्यक्त करते हुए श्री विश्णु खरे ने कहा कि समाज का राजनीति से विमुख होना ठीक नहीं है। राजनीति को गंदा कहने से काम नहीं चलेगा। तटस्थता सबसे घातक है। साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, प्रबुद्ध नागरिकों, को सार्थक व गंभीर हस्तक्षेप करना होगा। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री कमलाप्रसाद ने कहा कि बगैर स्वप्न देखे समाज को बदला नहीं जा सकता। स्वप्न ही संघर्श की प्रेरणा देते हैं।
अंत में इप्टा अषोकनगर के साथियों द्वारा कबीर पदों का प्रभावी गायन किया गया। सत्र का संचालन ’प्राची‘ के अध्यक्ष श्री कुमार अम्बुज ने किया।
सम्मेलन के दूसरे दिन १८ फरवरी २००७ को प्रातः १० बजे कविता पोस्टर प्रदर्षनी का षुभारम्भ श्री विश्णु खरे ने किया। तत्पष्चात् ’साहित्य का स्वप्न‘ विशय पर विचार सत्र श्री कमलाप्रसाद की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। श्री विश्णु खरे, श्री मोहनकृश्ण षुक्ला, श्री विनीत तिवारी, श्री महेष अनघ, श्री पवन करण, श्री महेष कटारे व श्री ब्रजेष कानूनगों ने परिचर्चा की में अपने विचार व्यक्त किए। सत्र संचालन प्राची के सचिव श्री सुरेष उपाध्याय ने किया।
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