KhbarExpresswww.khabarexpress.com

EDA - School Accounting Software

Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now
Search Photo  
RSS Wednesday, February 15, 2012



Vartmaan Sahitya ::June, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner

स्त्री को दोयम दजेर् का मानना सहन नहीं
रूबी सरकार

More Articles

भोपाल के भारत भवन में आयोजित तसलीमा नसरीन प्रसंग में बांग्ला लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि स्त्री को दोयम दजेर् का मनुष्य मानना किसी भी तरह सहन नहीं होगा, क्योंकि वह मनुष्यता-विरोधी विचार है, चाहे यह विचार मजहब के नाम पर लाया जाये या किसी पुस्तक के नाम पर अथवा किसी अन्य नाम से।
अपने बचपन का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के जिला मैमनसिंह में जहाँ मेरा बचपन विकसित हुआ, हम बांग्ला भाषियों को अरबी में कुरान पढायी जाती थी, जिसका अर्थ हम किसी भी तरह समझ नहीं पाते थे, बाद में कुरान का बांग्ला में अनुवाद हुआ और मैंने पाया कि उसमें बहुत सारे ऐसे विचार है जो स्त्री-विरोधी हैं और मानवता विरोधी हैं। जूडो क्रिश्चियन विश्वासों में भी यही चीजें हैं। हिन्दू धर्म के नाम पर भी बहुत कुछ ऐसा सुनने को मिलता है। ऐसी स्थिति में हमें किसी भी मजहब या शास्त्र के नाम पर चलने वाली किसी भी ऐसी धारणा को अस्वीकार कर देना चाहिए, जो मानवता अथवा स्त्री के विरुद्ध हो। जो किताबें यह कहें कि स्त्रियाँ मर्दों की खेती हैं अथवा जो किताबें यह कहें कि स्त्री ऑफ्टर थॉट हैं या इविल हैं या केवल मर्दों के उपभोग के लिए हैं, ऐसी किसी भी बात को अस्वीकार करना होगा। अपने साथ बांग्लादेश में की गयी ज्यादतियों का विस्तार से वर्णन करते हुए तसलीमा नसरीन इस बात पर भावुक हो उठीं कि उनके अपने प्यारे देश से, प्रिय मातृभूमि से उन्हें सरकार द्वारा निकाल बाहर किया गया है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे मानवता-विरोधी, स्त्री-विरोधी प्रत्येक मान्यता और प्रत्येक कदम का डटकर विरोध करें। सत्र की अध्यक्षता करते हुए श्री अनिल माधव दवे ने तसलीमा जी की तुलना सुकरात, गाँधी और सावरकर से की। संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकान्त शर्मा जी ने तसलीमा जी का स्वागत करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के लोग शान्त और उदार हैं और भारत भवन में तथा मध्य प्रदेश में तसलीमा जी का बारम्बार स्वागत है। श्री मोहनकृष्ण बोहरा ने तसलीमा जी की रचनाओं का विश्लेषण किया।
दूसरे सत्र में सुश्री तसलीमा नसरीन ने अपनी कविताएँ पढीं और अपनी रचना-प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मैं पितृ-सत्तात्मक समाज और स्त्रियों पर लादी गयी अनुचित पाबन्दियों की प्रबल विरोधी हूँ, लेकिन मैं पुरुष की विरोधी नहीं हूँ। ऐसी बहुत सी स्त्रियाँ हैं, जो गलत मानसिकता के कारण अनुचित पाबन्दियों और अनुचित व्यवहार की समर्थक बन जाती हैं। इसी प्रकार, बहुत से पुरुष हैं, जो स्त्रियों के साथ प्रेमपूर्ण, मानवीय और न्यायपूर्ण व्यवहार के प्रबल पक्षधर हैं। श्री मोहनकृष्ण बोहरा ने उनकी सघन प्रेम वाली कविताओं के उद्धरण देते हुए, उनकी तुलना जायसी और मीरा से की।



Discuss this topic on KhabarExpress Forum 

Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 


October, 2006 <br> Sponsered by : Decor Home, BikanerOctober, 2006
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
January, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerJanuary, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
February, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerFebruary, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
March, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerMarch, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
April, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerApril, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
May, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerMay, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
June, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerJune, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ? | News Ticker
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Nagar Ek - Nazaare Anek, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares