वेस्टइंडीज में कि्रकेट के विश्वताज के लिए हो रही जंग में काम्याबी के झंडे गाढने के लिए राहुल की अगुवाई में भारतीय सेना कूच करने की तैयारी में है। भारतीय कि्रकेट के सबसे कमजोर माने जाने वाले कप्तान राहुल द्रविड ने चयनकर्ताओ और कोच के विरोध के बावजूद अपनी मनपसंद योद्धओ को टीम में शामिल करवाकर यह जंग लडले जा रहे है। राहुल ने इस प्रकार अपने योद्धाओ का विश्वास जीत कर आधी जंग जीत ली है। १९८७ के बाद विश्वकप की यह सबसे अनुभवी टीम है परन्तु इस टीम को १९८३ की कपिलदेव की टीम और २००३ की सौरव गांगुली की टीम से बेहतर साबित करने की चुन्नौत्ती है। टीम आंकडो के हिसाब से वर्तमान में भारत में उपलब्ध कि्रकेट खिलाडयों की बेहतरीन टीम है। विश्वकप रवानगी से पूर्व इस टीम के कप्तान के आक्रमक तेवरो ने जाहिर कर दिया है कि यह टीम १९८३ का कारनामा दोहराने का माद्दा रखती है और कि्रकेट की इस महाजंग को जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है। * * *विश्वकप कि्रकेट की जंग में* १९८३ का कारनामा दोहराने की चुन्नौत्ती लेकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही टीम की ताकत बल्लेबाजी है। सौरव गांगुली, राहुल द्रविड, सचिन तेंदुलकर और महेन्दंसह धोनी दुनिया के किसी भी गेंदबाज का सामना करने में सक्षम है। जहां तक वीरेन्द्र सेहवाग की बात है। यदि वे आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगे तो उनकी सफलता के बोर में कोई शक नहीं रहेगा। गत एक वर्ष से उनकी फार्म को लेकर उनके उपर व उनके चयन पर अंगुलिया उठती रही है। परन्तु भारतीय टीम के पास सेहवाग का कोई विकल्प नहीं है। इस कारण उनके अनुभव को तरजीह देना टीम की आवश्यकता है। दिनेश कार्तिक के पास मो. कैफ जैसी क्षमता है जो मध्यमक्रम द्वारा छोडे गये अधूरे काम को पूरा कर टीम को लक्ष्य तक ले जा सकता है। गेंदबाजी में जहीरखान, मुनाफ पटेल और अजीत अगरकर की जोरदार फार्म विश्वकप पर भारत के दावे को मजबूत बनाती है। अनिल कुम्बले और हरभजनसिंह भी अपनी फिरकी गेंदबाजी और अनुभव से भारतीय टीम को विश्वकप दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते है। भारतीय टीम पूरी तरह संतुलित है। सबसे बडी बात है कि भारतीय टीम में भरपूर उत्साह है और उच्च मनोबल के साथ अपने मिशन २००७ का आगाज करने जा रही है। इस टीम में सौरव गांगुली, सचिन तेदुलकर और अनिल कुम्बले के लिए यह अंतिम विश्वकप है और वे चाह्रेगे कि वे अपने कैरियर में विश्वकप विजेता टीम का हिस्सा बने । ग्रेग चैपल की सफलता भी इसी विश्वकप पर निर्भर करती है। यदि भारतीय टीम ये जंग जीतती है और चैपल के साथ जुडे सभी विवादो का अंत हो जायेगा। * * *भारतीय सेना की ताकत दूसरे मजबूत दावेदारो से आंकने पर भी भारतीय टीम कहीं भी कम नजर नहीं आती है। आस्ट्रेलिया की टीम इस विश्वकप में सबसे संतुलित मानी जा रही है। जहां तक बल्लेबाजी पक्ष की बात है, भारतीय टीम की बल्लेबाजी की ताकत आस्ट्रेलिया से बिलकुल भी कम नहीं है। रिकी पोंटिग का जवाब भारत के पास सचिन तेंदुलकर के रूप में मौजूद है। गिलकि्रस्ट के जवाब के रूप में भारत के पास महेन्द्रसिह धोनी है। मैदान और आंकडो दोनो में भारतीय बल्लेबाजी आस्ट्रेलिया से कहीं भी कम नहीं है। गेंदबाजी के मामले में भारत आस्ट्रेलिया से थोडा कमजोर है। परन्तु स्पिन गेदबाजी के मामले में भारत आस्ट्रेलिया से मजबूत नजर आ रहा है। आस्ट्रेलिया के बाद श्रीलंका की टीम विश्वकप की सबसे संतुलित टीम नजर आ रही है। लेकिन बल्लेबाजी के मामले में भारत को श्रीलंका से ऊपर रखा जा सकता है। गेंदबाजी में भारत के पास श्रीलंका से ज्यादा विविधता है। दूसरे दावेदारो में पाकिस्तान से भारत की टीम ज्यादा संतुलित है। पाकिस्तान के लिए निम्न मध्यमक्रम कमजोरी साबित हो सकता है जबकि इस मामले में भारत के पास महेन्द्रसिंह धोनी, दिनेश कार्तिक और अजित अगरकर के रूप में मजबूत स्तम्भ है। दक्षिण अफ्रीका से यदि तुलना करे तो भारत को उसके बराबर माना जा सकता है। पाकिस्तान की तरह दक्षिण अफ्रीका का निम्न मध्यमक्रम कमजोंर है और भारत इस मामले में मजबूत साबित हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका का उच्च मध्यमक्रम मजबूत है। लेकिन यदि स्पिन गेंदबाजी की आवश्यकता पडी तो भारत दक्षिण अफ्रीका से बेहतर साबित हो सकता है। कुल मिला कर मिशन ०७ की भारतीय टीम अन्य टीमो की तुलना में कमजोर नहीं साबित होती है। * * *मिशन २००७ के लिए महाजंग में उतर रही भारतीय टीम पूर्व में विश्वकप में भाग ले चुकी दूसरी भारतीय टीमो के मुकाबले बेहतरीन टीमो में से एक माना जा सकता है। विश्वकप इतिहास में १९८३ की कपिलदेव की टीम और २००३ में सौरव गांगुली की टीम को विश्वकप की बेहतरीन टीम माना जाता है। इस टीम में कपिल की टीम की तरह अनुभवी खिलाडी मौजूद है। परन्तु कपिलदेव की टीम में विख्यात आलराउण्डरो की भरमार थी। परन्तु राहुल की टीम में आलराउण्डर के नाम पर अजित अगरकर,युवराज सिंह और विरेन्द्र सेहवाग को माना जा सकता है। इस मामले में राहुल की टीम कपिल की टीम से कमजोर पडती है। यह भी उल्लेखनीय है कि कपिल की टीम को विश्वकप दिलाने में आलराउण्डर खिलाडयों का विशेष योगदान था। जहॉ तक २००३ की सौरव की टीम की बात है। उस मामले में टीम थोडी बेहतर दिखाई देती है। सौरव की टीम का गेंदबाजी पक्ष कमजोर था जबकि इस टीम की गदबाजी मजबूत और नवप्रतिभायुक्त मानी जा रही है। कुल मिलाकर राहुल की टीम अब तक विश्वकप में भाग ले चुकी भारतीय टीमो में तीसरी सबसे बेहतरीन टीम है। * * *राहुल की टीम में आलराण्डरो की कमी भले ही हो परन्तु उसकी टीम में सचिन, सौरव और सेहवाग ऐसे खिलाडी है जो जरूरत पडने पर आलराउण्डर की भूमिका निभा सकती है। इस टीम में विश्वकप जीतने की जज्बा है। इस टीम में अपना आखिर विश्वकप खेल रहे खिलाडी इस विश्वकप को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाने के लिए तैयार है। यही बात इस टीम के पक्ष में जाती है। राहुल आक्रमक तेवरो के साथ इस जंग में उतर रहे है और अपनी टीम के साथ सीना तान कर कह रहे है तैयार है हम।