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झेंप मिटाने की कवायद

09 Jun 2007      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

बांग्लादेश पर जीत

India Bangladesh Seriesविश्व कप क्रिकेट में करोडों चहेतों की उम्मीदों व देश की प्रतिष्ठा को एवरेस्ट की ऊॅचाई से गर्त में धकेलने के बाद बांग्लादेश के विरूद्ध टेस्ट व एक रोजा सीरिज में भारत की जीत एक बार पुनः सर्वत्रा सुर्खियों में छाई है । माहौल में ऐतिहासिक जीत, दिव्य रिकॉर्डस व ढाका पर चढाई जैसे विशेषण यह आभास पैदा करते हुए कि गोया यह जीत विश्व कप विजय से भी बडी जीत है, असलियत पर पर्दा गिराने की साजिश रच रही है। वैसे भारतीय क्रिकेट में झेंप मिटाने का यह शगल पुराना है । वास्तविकता को पार्श्व में धकलेना, छोटी - मोटी जीत को बढा चढाकर प्रस्तुत करना व इसके सहारे फजीहत के दाग को छिपाकर क्रिकेट प्रेमियों को कृत्रिम गर्व में भटकाएं रखने की परम्परा सी पनप गई है । इस परम्परा का निर्वहन करना बोर्ड, मीडिया व क्रिकेट के व्यावसायिक पक्ष में अपना हित देखने वाले हर पक्ष की मजबूरी बन गया है। कहना न होगा कि मजबूरी के द्वारा रचे गये इस खेल ने देश के क्रिकेट प्रेमियों की संवेदनाओं को भी मृतप्रायः कर दिया है । अब आम क्रिकेट प्रेमी ऐसे माहौल का शिकार हो गया है, जहां क्रिकेट को अपने आर्थिक हितों के लिए भुनाने वाले इन लोगों के इशारों पर उसकी भावनाएं उबाल लेती हैं, शांत होती है या इस कृत्रिम माहौल में पुनः शरीक होकर गुणगान का राग अलापने लगती है ।
India Bangladesh Cricket Seriesक्रिकेट के व्यवसायवाद ने भारत में रोमांच, जूनून व खेल के प्रति चाह को कृत्रिमता के आचरण में कैद करके रख दिया है। अब तो हालात यहां तक आ पहचे है कि मीडिया जब रूलाता है तो क्रिकेट प्रेमियों के आंसू निकलते है तथा अगले ही पल जब मीडिया क्रिकेटरों पर पुनः सिर आंखों पर बैठाने लगता है तो लोग जख्मों को भूल कर जश्न में शरीक हो जाते हैं । जन भावनाओं व क्रिकेट के रोमांच के ठेकेदार बनते जा रहे पक्षों ने ही भारत में क्रिकेट का बेडा गर्क किया है । फजीहत व पराजय के हर मोड पर ये घडयाली आंसू बहाने के साथ - साथ उस पर पर्दा गिराने का अवसर ताकने लगते हैं ताकि क्रिकेट से जुडे उनके हितों की मौत न हो । बिल्लियों के भाग का छींका इस बार बडी जल्दी टूट गया है । उपमहाद्वीपीय परिस्थितियों में घर के शेरों ने बांग्लादेश को छकाकर उनकी मुराद सी पूरी कर दी है । वैसे देखा जाए तो बांग्लादेश को ऐसे दस दौरे में अनवरत इसी तरह हराने के बाद भी विश्व कप की उस एक हार व उससे भारतीय क्रिकेट की प्रतिष्ठा को हुई क्षति के दंश को नहीं भुलाया जा सकेगा। इस हकीकत को आत्मसात कर भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुधारने कर जज्बा अब शेष कहा दिखाई देता है ।

मनमोहन हर्ष, (खेल समीक्षक),
जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी, हनुमानगढ(राजस्थान)-३३५५१२
दूरभाष- 1552-265778(कार्यालय), 1552-264336(आवास), मो. 9928189590
e-mail: harshmanmohan@yahoo.co.in, diprhmh@gmail.com




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