जब कंस ने वासुदेव-देवकी के छः पुत्रो का वध कर दिया तो सातवे गर्भ के रूप में शेषनाग के अवातार बलराम जी आये जो रोहीणी के गर्भ में स्थानान्तरित होकर प्रकट हुए । जब आठवा गर्भ में श्री कृष्ण भगवान प्रकट हुए। उसी समय गोकुल में यशोदा जी के गर्भ से योगमाया का जन्म हुआ वासुदेव जी कृष्ण को गोकुल छोड आये और बदले में योगमाया को वहाँ से ले गए। जब कंस ने कन्या रूपी योगमाया को पटककर मारना चाहता वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में चली गयी और देवी का रूप धारण कर लिया । आगे चलकर इसी योगमाया ने कृष्ण के हाथो योगविद्या और महाविद्या बनकर कंस, चांणुर आदि शक्तिशाली असूरो का सहार कराया ।
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