Monday, 22 July 2019
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युवा जगत मार्गदर्शन


द इन्स्टीट्यूट आॅफ कम्पनी सेकेट्रीज आॅफ इण्डिया, नई दिल्ली द्वारा कराया जाने वाले कम्पनी सचिव पेशेवर पाठ्यक्रम में किसी भी विषय में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण अपना पंजीकरण करवा कर यह कोर्स कर सकता है लेकिन इसकी विषय सामग्री को देखते हुए यह वाणिज्य स्नातकों के अधिक सहज और सुगम है क्योंकि इसमें उसके सीनियर सैकण्डरी से स्नातक स्तर तक की परीक्षा के बीच जिन विषयों का अध्ययन किया वे सभी किसी ने किसी रूप में विद्यमान है। इसलिये वाणिज्य स्नातक के लिये ये विषय नये रहते है। इन विषयों में अध्ययन में उसे अधिक कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता।
सी.एस. फाउण्डेशन की परीक्षा जो बहुविकल्पी प्रश्नों पर आधारित होती है उसमें एकाउन्टस स्टेट्रिक्स मैनेजमेंट, इथिक्स, स्टेटिस्टिक्स जैसे पेपर शामिल होते है। इन पेपर को विद्यार्थी ने अपनी सीनियर सैकण्डरी परीक्षा में अवश्य पढ़ा होता है। यह पढ़ाई उसे इन पेपरों को पढ़ने में सहायता करती है जिससे उन्हें पास होने में आसानी होती है। फाउण्डेशन मंे गणित का भगा कई लोगों के सीनियर सैकण्डरी परीक्षा में नहीं होता इसमें इन्हें थोड़ी बहुत परेशानी हो सकती है लेकिन समुचित कोचिंग आदि प्राप्त करके इस विषय को तैयार किया जा सकता है। अब बिजनेस मैथेमेटिक्स विषय सीनियर चुनने का विकल्प है। यदि विद्यार्थी इस विकल्प को चुनता है तो उसे सी.एस. फाउण्डेशन के मैथस में कठिनाई नहीं आती।
सी.एस. एक्जीक्यूटिव में कम्पनी एक्ट, टैक्सेसन, कोस्टिग, कम्पनी एकाउन्ट्स फाईनेशियल मैनेजमेंट जैसे विषयों को शामिल किया हुआ है। ये सभी विषय छात्र अपने तीन वर्षो के बी.काॅम के अध्ययन के दौरान अलग अलग वर्षो को पढ़ लेते है। इसलिये इनकी मूल बातों को सी.एस. पाठ्यक्रम के समय भी उन्हें पढ़ने में कठिनाई नहीं होती। बस सी.एस. के स्तर के अनुरूप इनका विस्तृत तथा गहन अध्ययन करना जरूरी हो जाता है। सी.एस. एक्जीक्यूटिव में कराधान, लागत लेखा तथा औद्योगिक सन्नियम और सामाजिक सुरक्षा से जड़े पेपर्स विगत वर्ष से बहुविकल्पी आने लनगे है। इनको तैयार करने तथा इनका प्रश्न हल करने मे विद्यार्थियाकें को ज्यादा कठिनाई नहीं आती। इसमें गलत प्रश्नों के अंक आधार पर माईनस मार्किंग भी नहीं होती अतः वि़ार्थी आॅप्सन से कुछ निकटतम उत्तर को सही बता सकता है और वह सही हो भी सकता है। विगत परीक्षाओं मे इन बहुविकल्पी प्रश्न पत्रों में काफी विद्यार्थी ने 60 से 85 प्रतिशत और यहां तक 90 प्रतिशत अंक भी मिले है।  इन प्रश्नों में मिले ज्यादा अंक शेष विषयों में पास कराने तथा औसत सुधारने में काफी सहायक हो जाते है।
गैर वाणिज्य स्नातक भी एक्ज्यूक्टिव परीक्षा में पास हो सकते है क्योंकि लाॅ आधारित पेपर्स कोयदि वे स्वयं सही ढंग से पढ़े तो आसानी से समझ सकते है। एकाउन्ट संबंधी पेपर्स की कुछ कोचिंग आदि लेकर तैयार कर सकते है। विगत वर्षो में विज्ञान तथा कला विषयों के विद्यार्थियों ने भी सी.एस. कोर्स किया है और सफल रहे है।
यदि आप सी.एस. कोर्स करना चाहते हैं तो अभी मौका है आप 31 अगस्त तक अपना पंजीयन करा लनेते है तो अगले वर्ष जून में होने वाली परीक्षा में आप एक्जीक्यूटिव के दोनों माॅडयूल्स की परीक्षा दे सकते है। इनमें पास होने पर आपको सीधे प्रोफेशनल में प्रवेश मिल सकता है।
इस कोर्स में पंजीयन हेतु आप अपने शहर या जिले के काउंसिलर से सम्पर्क कर सकते है जो आपके पंजीयन, अध्ययन, प्रशिक्षण तथा परीक्षा आदि में मार्गदर्शन करेगे। जहां संस्थान के चेप्टर कार्यरत है वे भी विद्यार्थी को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास के कार्यक्रम कराते है जिससे सी.एस. कोर्स कर चुके तथा अभी करने वाले प्रार्थियों का व्यक्तित्व विकास तथा पेशेवर विकास होता है।
वर्तमान में जब सरकार ‘मेक इन इण्डिया’ की मुहीम को तेज कर रही है तब नयी-नयी कम्पनियां देश में स्थापित होगी उन कम्पनी कानूनों के अनुशीन के लिये पेशेवर व्यक्तियों के रूप में भी भारी संख्या मेें कम्पनी सचिवों की जरूरत पड़ेगी। जिस कम्पनी की चुकता पूर्ण 5 करोड़ रूपये या अधिक है उसमें पूर्णकालिक कम्पनी सचिव नियुक्त करने तथा नहीं किए जाने की दशा में कम्पनी और उसके देशी संचालक पर भारी जुर्माना लगाने के नये प्रावधानों ने कम्पनी में सचिवों की नियुक्ति के व्यापक अवसर उत्पन्न किये है। इसलिये इस क्षेत्र में रोजगार नहीं मिलने जैसी समस्या नहीं है जो रोजगार है वह भी सम्मानजनक तथा अच्छे पैकेज वाले है। ये कम्पनी सचिव को आकर्षक रोजगार अवसर प्रदान करती है। नये कम्पनी कानून में सचिव को भी मैनेजरियल परसन के रूप में शामिल करने से भी उसका महत्व और उपयोगिता बढ़ी है। 
                                                                                - डाॅ. अजय जोशी