रक्षा बन्धन( Raksha Bandhan)
Posted:
8/29/2007 10:36:34 PM |
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रक्षा बन्धन
रक्षा बन्धन भाई-बहन के अटूट प्रेम का परिचायक पर्व है! यह हमे एकता, त्याग, कर्त्तव्यपरायण का बोध कराता है! श्रावणी पूर्णिमा के दिन ही रक्षा बन्धन का यह पावन पर्व देश के कोने-कोने मे अत्यन्त श्रद्धा, भक्ति से मनाया जाता है!
१)इसी दिन भगवान विष्णु ने "वामन" अवतार धारण कर "राजाबलि" के हाथ मे "रक्षा सूत्र" बांधकर राजाबलि से तीन पग भूमि मांगी, तभी से "रक्षा सूत्र" हर मंगल कार्यो मे बांधते समय इस मंत्र का उच्चारण किया जाने लगा है जो इस प्रकार है "येन बद्धो बली राज, दान वेन्द्रो महाबलः ! तनेत्वां प्रति बध्नामि रक्षे माचल माचल" रक्षा बन्धन पर्व के साथ प्राचीन कथाओ का गहरा सम्बन्ध है!
२)देवासुर संग्राम मे "वृत्रासुर" का संहार करने के लिये जब "इन्द्र" प्रस्थान करने लगे तब उनकी पत्नी "इन्द्राणी" ने समाज की रक्षा के लिये संकल्प की याद बनाये रखने हेतु प्रतीक रुप मे "इन्द्र" की कलाई पर इसी दिन "रक्षा सूत्र" बांधा था!
३)इसी दिन जैन सन्त "श्री श्री अकम्पनाचार्य के संग ७०० मुनियो" पर हुए उपसर्ग को मुनि "श्री श्री विष्णुकुमार महामुनि जी" ने दूर किया ओर सब सन्तो को आहर करवा खुद आहर लिया!
४)इसी प्रकार चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने हुमायूं को, रानी दुर्गावती ने राजा अकबर को, द्रौपदी ने कृष्ण को, यमुना ने यम को, लक्ष्मी ने राजा बली को बांधी थी!
>> आज २८-०८-२००७ को रक्षा बन्धन के इस पावन पर्व पर सब दोस्तो, रिस्तेदारो, बहनो को शुभकाम्नाये ओर सब से आग्रह कि हम सब "रक्षा बन्धन" के इस मूलभूत उद्देश्यो को समझते हुए इसका पालन करने का दृढ़ संकल्प ले ताकि राष्ट्रीय गौरव की मर्यादाओं मे चार चांद लगाकर इन्हें गौरवान्वित कर सकें!!