KhbarExpresswww.khabarexpress.com

Job Seeker from Rajasthan,Jaipur,Jodhpur,Ajmer,Bikaner,Mumbai,Delhi,

Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now
Search Photo  
RSSSunday, November 23, 2014
Search hindi - English word definition online at PleagianDictionary.com
News Flashविशेष बच्चों ने की राॅक क्लाइम्बिंग ओैर पदयात्रा | बीकानेर में आयोजित होगा अन्तर्राष्ट्रीय शाॅर्ट फिल्म फेस्टिवल | चायल ने जीता इन्टर काॅलेज बाॅक्सिंग गोल्ड | मेले में स्वच्छ भारत का संदेश | तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की नई कार्यकारिणी गठित | स्वच्छ भारत थीम पर प्रदर्शनी व मेले का आयोजन | रोटरी क्लब मरूधरा ने मनाया बाल दिवस | डूडी को जनघोषणा-पत्र की प्रतियां भेंट | पैरासेलिंग षिविर सम्पन्न | राजस्थान में प्रवासी राजस्थानियों के लिये अलग से मंत्रालय खोलने का प्रयास किया जायेगा : सर्राफ |

 KhabarExpress Forum >  Muddai
   ब्लू फिल्मों का कुटीर उद्योग

 
 Posting Rules
 Page 1
Post New Topic in Muddai
 AuthorMessege
Topicbikaneritiger
1 Star Rating
Post: 14
FavouritePhoto
Send Private Messege
ब्लू फिल्मों का कुटीर उद्योग
Posted: 9/27/2007 3:28:47 PM
Post Reply

आजकल तो न्यूज चैनल देखना मुहाल हो गया है, एक चैनल है स्टार न्यूज, इन्होने तो पूरा का पूरा ठेका ले रखा है, कि देश मे जितने भी बलात्कार होंगे उनकी ये क्लिपिंग टीवी पर जरुर दिखाएंगे। अब नाम जागरूकता का हो, या इन्सानियत का ठेका, ये चैनल अपनी क्लिपिंग परोसने के लिए बहाने ढूंढ ही लेता है।

वैसे एक बात तो माननी ही पड़ेगी, भारतीय युवाओं के नयी तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। मोबाइल मे कैमरा डालते समय नोकिया जैसी कम्पनी ने भी नही सोचा होगा कि इससे भारत मे बाकायदा ब्लू फिल्मों का कुटीर उद्योग चल निकलेगा। देश मे वैसे ही युवा वेल्ले घूमते है, कार किराए पर मिल ही जाती है, गर्लफ़्रेन्ड भी आजकल बनाना उतना मुश्किल नही रहा। सेक्स के बारे मे युवाओं के विचार काफी खुले है। कैमरे वाला फोन तो पिताजी ने पहले ही लेकर दे रखा है। बच्चे जोरशोर से फिल्म निर्देशक बनने की कोशिश कर रहे है। मौज की मौज और कैरियर का कैरियर। जब तक पकड़े नही गए, तब तक मौज, पकड़े गए तो रेप का केस बनना तय है। कभी कभी तो हमे इन युवाओं के हाथों मे कैमरे वाले फोन को देखकर एक कहावत याद आ जाती है बन्दर के हाथ मे तलवार, आजकल कंही ये लोग इसी को चरितार्थ तो नही करते फिर रहे? एक बात और हमे समझ मे नही आयी, आजकल गाडियों मे ही मौजमस्ती ज्यादा क्यों होती है? हमारे जमाने मे लोग बाग, बन्द कमरे मे छिप छिपाकर ये सब काम करते थे, आजकल का ट्रेन्ड कुछ समझ मे नही आता।

अभी पिछले दिनो झांसी मे चलती कार में एक रेप कांड हुआ, लड़कों ने बाकायदा वीडीयो बनाया, फिर सीडी बनायी, फिर एक बन्दे ने उसको स्टार न्यूज के संवाददाता को टिका दिया, काहे? अबे ये बिकाऊ चीज है, फास्ट मनी, समझे? चैनल ने भी बाकायदा पूरे दिन बाकी खबरें रोके रखी, इसी खबर को टिकाता रहा। अब इस क्लिंपिंग के सामाजिक, आर्थिक, मनौवैज्ञानिक, भौतिक और ना जाने कैसे कैसे पहलू पर विशेषज्ञों (?) की राय ली गयी। पुलिस को भी इन्वाल्व किया गया, पुलिस वैसे तो इन सभी मामलों पर मस्ती से टाइम लेकर काम करती है, लेकिन चूंकि मामला मीडिया का था, फिर बहिन जी सुशासन नारा दिए है इसलिए सभी ने दीवार पर टंगी वर्दी पर चढी धूल को साफ़ किया, पहना और निकल पड़े आरोपियों को पकड़ने। अब पुलिस अगर चाहे तो अपराधी पकड़ा ना जाए, ऐसा हो सकता है भला। इसलिए सारे के सारे आरोपियों को पकड़ा भी गया। चैनल से लेकर, सरकार, पुलिस के अफ़सरो,अर्दलियों ने अपनी पीठ थपथपाई। चैनल की तो निकल पड़ी, उसे बैठे बिठाए टीआरपी का फार्मूला मिल गया। ठीक उसी तरह जैसे इन्डिया टीवी को तान्त्रिक, भूतों के प्रोग्राम दिखाने से टीआरपी का फार्मूला मिला। अब तो स्टार टीवी के संवाददाता, दुनिया जहान की खबरे छोड़कर , सुबह शाम रेप वाले केस की तलाश मे जुटे दिखते है।देश मे मौजूद हर हिन्दी ब्लूफिल्म की क्लिंपिंग को जुगाड़ा जा रहा है, संपादित करके किसी तरह से दिखाने का जुगाड़ किया जा रहा है। अब ये लोग इस कार्य मे जुटें भी क्यों ना, आखिर टीआरपी का सवाल जो है।

लेकिन भाई कोई हमे ये बताए, कि भैया इस देश मे कोई साफ़ सुथरा न्यूज चैनल है क्या? हम तो पक गए है यार। यही सब देख देख कर। सारे चैनल मनोहर कहानियां, सत्यकथा और आजादलोक बनते जा रहे है, परेशान है तो सिर्फ़ दर्शक। क्या आपको नही लगता कि हमे बिना जांघिया के विज्ञापन वाला, एक साफ़ सुथरा, अप्रायोजित न्यूज चैनल चाहिए, भले ही उसके लिए ज्यादा पैसा देना पड़े। आपको कंही कुछ पता चले तो बताना दोस्‍तो!




 Page 1
Post New Topic in Muddai
Forum Jump
All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ? | News Ticker
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Nagar Ek - Nazaare Anek, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com | hubVilla.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares