सुरजे अपनी बड़ी लड़की की शादी के लिए लड़के की तलाश में एक दूसरे गाँव में अपने एक परिचित दलीप के पास गया और उससे कोई ठीक सा लड़का दिखाने के लिए कहा। दलीप ने अपने पड़ौस में एक लड़का दिखाया और उसके माँ-बाप से बातचीत भी करवाई। लड़का खेती-बाड़ी करता था और उसकी उम्र बताई गई थी पच्चीस साल। किन्हीं कारणों से यहाँ रिश्ते की बात पक्की न हो सकी। सुरजे की लड़की की शादी कहीं और हो गई।
सुरजे की एक और लड़की भी थी जो बड़ी लड़की से पाँच साल छोटी थी। पाँच साल बाद सुरजे छोटी लड़की की शादी के लिए लड़के की तलाश में फिर उसी गाँव में अपने परिचित दलीप के पास जा पहुँचा जहाँ बड़ी लड़की के लिए लड़का देखने गया था लेकिन बात नहीं बनी थी। सुरजे उस बात को भूल चुका था। इस बार फिर दलीप सुरजे को लड़का दिखाने ले गया और संयोग से उसी घर में जा पहुँचे जहाँ पाँच साल पहले भी गए थे। वहाँ जाकर सुरजे को याद आया कि ये तो वही लड़का है जिसे पाँच साल पहले बड़ी लड़की के लिए देखने आया था। बातचीत का दौर शुरू हुआ और लड़के के माँ-बाप ने बताया कि लड़का खेती-बाड़ी करता है और उम्र है पच्चीस साल।
सुरजे ने कहा, ''भई क्या माजरा है? मैं पाँच साल पहले आया था तब भी आपने लड़के की उम्र पच्चीस साल बताई थी और आज भी पच्चीस साल बता रहे हो।''
लड़के के बाप ने कहा, ''देखो भाई हम इस किस्म के आदमी नहीं है जो आज कुछ कहें और कल कुछ कहें। हम अपनी जबान के पक्के हैं और आप पाँच साल बाद भी पूछोगे तो भी लड़के की उम्र पच्चीस साल ही बताएँगे।''