स्वतन्त्रता दिवस पर विशेष्
Posted:
8/13/2007 5:19:06 PM |
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सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है,
देख्नना है जोर कितना, बाजुए कातिल में है,
करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत,
देख्रता हूँ मैं जिसे, वो चुप मेरी महफिल में है।
ऎ शहीदे मुल्क मिल्लत मैं तेरे उपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफिल में है।
वक्त आने दे बता देंगे तुझे आसमां,
हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है।
खींच कर लायी है सबको कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूचा ऎ कातिल में है।
देख्नना है जोर कितना, बाजुए कातिल में है
सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है