KhbarExpress www.khabarexpress.com
Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now | My Favourites (new)
Search any word's definition online at pelagiandictionary.com
Search Photo  
RSS 22 November 2009
Forum | Wallpapers | Photo Gallery | Business | Entertainment | Education | Sports | Article | City | Cartoon | Video News |
Free News on your website
3
Mar
क्या कल्याण को माफी जायज है?
Add comment    Mail     Print    Write to Editor

भदोही उपचुनाव में बसपा के खाते से सीट झटककर समाजवादी पार्टी गदगद है और उसके बडे नेता अब फतवा जारी कर रहे हैं कि प्रदेश की जनता बसपा से छुटकारे के लिए सपा को वोट करेगी और कल्याण सिंह से दोस्ती का मुसलमान वोट पर कोई असर नहीं पडा है।
 एकबारगी तो लगता है कि सपा का सोचना सही है। लेकिन इतिहास बताता है कि राजनीति के सवाल उतने सीधे होते नहीं जितने दिखाई देते हैं। अगर भदोही का उपचुनाव बैरोमीटर है तो बलिया संसदीय उपचुनाव बैरोमीटर साबित क्यों नहीं हुआ? बलिया चुनाव के बाद प्रदेश में दो बार उपचुनाव हुए और दोनों उपचुनाव में सपा का बहुत बुरा ही हाल हुआ केवल मुलायम द्वारा रिक्त की गई गुन्नौर सीट ही सपा बचा पाई और वहां भी उसका प्रत्याशी बहुत कम अन्तर से जीता।
 इस सबसे परे लगता है कि उत्तर प्रदेश में दलित के बाद सबसे बडा वोट बैंक समझे जाने वाला मुसलमान पशोपेश में है कि लोकसभा चुनाव में किधर जाए! उसकी प्राथमिकता आज भी भाजपा को हराना है, लेकिन पिछले दह दशक से जिस तरह से उसे छला गया है उससे वह आहत है। इसका फायदा उठाकर मुस्लिम कट्टरपंथियों की तरफ से भी अपनी पार्टी का राग अलापा जा रहा है।
 १९८४ के लोकसभा चुनाव तक मुसलमान उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का वोट बैंक हुआ करता था जिसके बल पर कई दशक तक कांग्रेस ने देश पर राज किया। लेकिन राजीव गांधी के शासनकाल में कांग्रेस ने हिंदू कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेकते हुए जब बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाया और अयोध्या में राममंदिर का शिलान्यास कराकर अयोध्या से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की तब यह वोट कांग्रेस से खिसकने लगा। बाद में जब नरसिंहाराव ने बाबरी मस्जिद गिरवाने में अप्रत्यक्ष सहयोग दिया तो मुसलमान पूरी तरह से उससे दूर हो गया और मुलायम सिंह के साथ १९९३ के विधानसभा चुनाव में चला गया।
 छह फीसदी यादव मतदाताओं के बल पर समाजवादी पार्टी नाम की प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी चलाने वाले मुलायम सिंह ने पन्द्रह बरस तक मुसलमानों को भाजपा का खौफ और बाबरी मस्जिद की शहादत की याद दिलाकर छला। छह दिसम्बर १९९२ के बाद से लगातार मुलायम सिंह मुसलमानों के हीरो थे, भले ही उनकी कैबिनेट में मौ. आजम खां के अलावा किसी दूसरे मुसलमान को स्थान नहीं मिलता था। परंतु सपा में अमर सिंह का प्रकोप बढने के साथ मुलायम का ग्राफ विगत ५-६ वर्षों में गिरने लगा था, और अब बाबरी मस्जिद के कातिल कल्याण सिंह से हाथ मिला लेने के बाद मुसलमान स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
 यहां यह याद दिलाना आवश्यक है कि १९९६ के आसपास वह समय था जब उत्तर प्रदेश के मुसलमान ने तमाम कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं के फतवे के बावजूद समाजवादी पार्टी को वोट दिया था। निश्चित रूप से इस स्थिति के लिए बहुत बडा श्रेय सपा के फारब्राण्ड नेता मौ. आजम खां को जाता है। यह आजम खां के सहारे का सम्बल था कि मुलायम सिंह ने एक समय में शाही इमाम को चुनौती के अंदाज में कहा था कि इमाम साहब इमामत कर और राजनीति हमें करने दें।
  मुलायम की अवसरवादिता तब काफी कुछ खुली जब परमाणु करार पर वे अपने समाजवाद, लोहिया के सिद्धान्त और साम्राज्यवाद विरोध की नीतियों की ऐसी तैसी करके मनमोहन और अमरीका की बगल में खडे हो गए। करार पर ही मुलायम को लग गया था कि अब मुसलमान उनसे दूर हो गया है। इसीलिए ठीक डेढ दशक पहले जो मुलायम सिंह चुनौती के अंदाज में कह रहे थे कि इमाम साहब इमामत करें वही मुलायम सिंह करार पर उन्हीं इमाम के दरवाजे पर गिडगिडाने गए।
 करार पर मुलायम सिंह की उलटबांसी से तय हो गया था कि उन्हें अब मुस्लिम वोटों की दरकार नहीं है और कल्याण सिंह से हाथ मिलाकर उन्होंने भविष्य की अपनी राजनीति का साफ संकेत दे दिया है। आज मुलायम सिंह ने कल्याण सिंह को बाबरी मस्जिद के कत्ल के इल्जाम से बरी कर दिया है। लेकिन वो हिंदुस्तानी बाबरी मस्जिद के उस कातिल को कैसे माफ कर दे जिसके कारण ६ दिसम्बर १९९२ के बाद पूरे दो माह तक चले साम्प्रदायिक दंगों में देश भर में चुनचुनकर मुसलमानों का कत्ल किया गया हो, मुंबई, सूरत और अहमदाबाद की सडकों पर औरतों और लडकियों को निर्वस्त्र करके कांच की बोतलों पर नचाया गया हो और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई हो, सडकों पर टायर जलाकर जिंदा आग में झोंक दिया गया हो। इन हादसात के लिए मुलायम सिंह तो कल्याण सिंह को माफ कर सकते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश का मुसलमान कैसे करे?
 तमाशा यह है कि मुलायम ने एक बार फिर दांव चला और कल्याण से माफीनामा जारी कराया। लेकिन इस माफीनामे में कहीं भी ’बाबरी मस्जिद‘ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया। कहीं भी बाबरी मस्जिद गिराने के लिए माफी नहीं मांगी गई। कल्याण ने कहा कि उन्होंने तो ६ दिसम्बर १९९२ को ही घटना की जिम्मेदारी लेनी थी। अगर ऐसा ही था तो कल्याण सिंह भाजपा में अब तक क्या कर रहे थे? ६ दिसम्बर १९९२  की जिम्मेदारी लेकर एक बार फिर से स्वयं को हिंदू आतंकवादियों का कर्णधार साबित करने का ही प्रयास किया है। लिब्रहान आयोग के समक्ष गवाही में भी उन्होंने कोई खेद प्रकट नहीं किया है, बल्कि हर साल ६ दिसम्बर को शौर्य दिवस मनाया है। क्या अगली ६ दिसम्बर को कल्याण फिर से शौर्य दिवस नहीं मनाएंगे?
 उधर मुलायम सिंह ने यह कहकर कि अगर भाजपा ’यूनिफाइंग सिविल कोड‘ और धारा ३७० को छोड दे तो वे उससे भी समझौता करने को तैयार हैं, अपनी भविष्य की राजनीति तय कर ली है। अगर जरूरत पडी तो सत्ता के लिए भाजपा इन दो मुद्दों को तिलांजलि भी दे देगी और मुलायम भाजपा की गोद में बैठ जाएंगे! लेकिन यह याद रखना होगा कि जब नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में कत्ल-ए-आम कराया तब भाजपा के एजेंडे में ३७० और यूनिफाइं्रग सिविल कोड और राम मंदिर नहीं थे!् आखिर कहना क्या चाहते हैं मुलायम?
 अगर मुलायम की कल्याण से दोस्ती हो सकती है, अपनी चालीस साल की कांग्रेस विरोध की राजनीति और डॉ. लोहिया के गैर कांग्रेसवाद को तिलांजलि देकर एक दलित महिला से घबराकर मुलायम कांग्रेस के साथ जा सकते हैं तो क्या लोकसभा चुनाव के बाद मुलायम सिंह के लिए भाजपा पाक साफ नहीं हो सकती?


-- अमलेन्दु उपाध्याय
( लेखक राजनीतिक समीक्षक हैं और पाक्षिक पत्रिका ’प्रथम प्रवक्ता‘ के संपादकीय विभाग में हैं)




Discuss this article on KhabarExpress Forum  

Comments to this Article

Be the first to comment on this Article

 Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 
Search hindi - English word definition online at PleagianDictionary.com
Top Story of The Day
Breaking News
Latest Articles
Artilces
Hindi To English and Enlish to Hindi Dictionary Developed by Pelgian Softwares, Bikaner (Rajasthan) India
Education Special

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ?
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares