किसी जुलाहे ंके खेत में हर रात देवराज इंद्र का हाथी ऐरावत आता था। वह आसमान से धरती पर उतरता और रात भर उसके खेत मे चरता। अपने खेत की हालत देखकर जुलाहे ंके कलेजे पर सांप लोट जाता। उसने समझदारों से पूछा कि उसके खेत को कौन बरबाद करता है। लोगों ने कहा यह गांव की चक्कियों की करतूत हो सकती है। उसके पाट रात को तुम्हारे खेत में आते जाते होंगे। जुलाहे ने यह सुन गांव की तमाम चक्कियों ंके पाट सांकज से बांध दिए। फिर भी उसके खेत की बरबादी नहीं रूकी। उसने घर बिरादरी वालों से सलाह ली। सभी ने कहा- यह धान कूटने की ओखलियों का काम हो सकता है। गांव वालों ंके सो जाने ंके बाद गांव की ओखलियां चुपक से तुम्हारे खेत मे चरने जाती होंगी। उसने गांव की सारी ओखलियों को रस्सी से बांध दिया। पर वही ढाक ंके तीन पात!
एक रात वह अपने खेत में जाकर सो गया और इंतजार करने लगा। वह देखता है कि एक हाथी उडता हुआ आया और फसल चरने लगा। जब हाथी वापस उडने लगा तो उसने पूंछ पकड ली। जुलाहा उसके साथ स्वर्ग चला गया। वहां इंद्र का दरबार लगा था। अप्सराएं नाच-गा रही थी। किसी ने जुलाहे की ओर ध्यान नहीं दिया। भूख लगने पर वह देवताओं की रेसोई में गया और जमकर दिव्य भोग जीमे। अगली रात जब ऐरावत पृथ्वी पर जाने लगा, तो उसकी पूंछ से लटक कर जुलाहा वापस गांव आ गया।
जुलाहे ने घर-गांवों वालों और मित्रों को अपनी रोमांचक यात्रा ंके बारे में बताया। वह बोला-मृत्युलोक जगह पर रहने से क्या फायदा! च्लो, सब इंद्रलोक चले! स्ब राजी हो गए। फसल चट करके ऐरावत वापस उडने लगा। जुलाहे ने फिर उसकी पूंछ पकड ली औश्र उसकी पत्नी ने पति ंके पांव पकड लिए। इसी तरह बाकी लोग भी एक-दूसरे ंके पांव पकड कर लटक गए। ऐरावत ने इस मानव श्रृंखला पर कोई ध्यान नहीं दिया। ऊपर उड गया। सभी काफी ऊपर आ गए। जुलाहे ने सोचा मैं भी कैसा मूर्ख ह! टपना करधा लाना ही भूल गया।
यह सोचते हुए उसने अफसोस से अपने हाथ मले। इस बीच हाथी की पूंछ उसके हाथों से छूट गई और सब वापस धरती पर धम्म से आ गिरे।
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