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यज्ञ सामग्री :
ब्राह्मण भोजन
(क) प्रतिदिन प्रातः ७.०० बजे १५०० ब्राह्मणों का जलपाल-चाय, मिष्ठान
एवं नमकीन।
(ख) प्रतिदिन दोपहर १२.३० बजे १५०० ब्राह्मणों का भोजन, दाल, चावल,
सब्जी, रोटी, नमकीन।
(ग) प्रतिदिन सांय ४.०० बजे १५०० ब्राह्मणों के लिए चाय ।
(घ) प्रतिदिन रात्रि ८.३० बजे १५०० ब्राह्मणों का रात्रि भोज-रोटी, दाल,
चावल, सब्जी, नमकीन, मिष्ठान एवं दूध।
अतिथि भोजन
प्रतिदिन अनुमानित ५००० व्यक्तियों का भोजन - दाल, चावल, रोटी, सब्जी,
मिठाई आदि।
यज्ञ सामग्री
७० क्विंटल तिल, ४० क्विंटल चावल, २० क्विंटल जौ, १० क्विंटल देशी
शर्करा, १०० टिन शुद्ध घी, १००० क्विंटल यज्ञ में लगने वाली लकडी की
समिधा, आवश्यक सुगंधि द्रव्य व औषधियां, वस्त्र एवं बर्तन।
ब्राह्मणवरण
१५०० गर्म शॉल, १५०० नग धोती, १५०० गमछे, १५०० नग लोटा, १५०० नग दुर्गा
सप्तशती पुस्तक, १५०० रूद्राक्ष मालाद्व १५०० जोडे चप्पल, १५०० आचमन
पंच पात्र तथा ९’’ गुणा १२’’ के १५०० लकडी के पाटे।
यज्ञ यजमान
महायज्ञ में १०० यजमान भाग लेंगे। उसमें आप भी यजमान बनकर पुण्य
प्राप्त कर सकते ह।
यज्ञ पूजन सामग्री
महायज्ञ में रोली, पान, सुपारी, नैवेद्य, पुष्प माला आदि प्रतिदिन पूजन
कार्य में लगेगा, इसके लिए सहयोग देने के इच्छुक धार्मिकजन पूजन सामग्री
की सूची कार्यालय से प्राप्त कर सहयोग प्रदान कर सकते हैं।
याज्ञिक ब्राह्मण दक्षिणा
महायज्ञ में १५०० ब्राह्मण सम्मिलित हो रहे हैं। उन ब्राह्मणों में से
जितने ब्राह्मणों को दक्षिणा देना चाहते हैं कार्यालय से सम्फ कर
दक्षिणा वितरण के समय अपने हाथ से दक्षिणा दे सकते हैं।
दुर्गा पूजा मण्डप
दुर्गापूजा मण्डप में १० महाविद्या की प्रतिमा सहित विशाल
महिषासुरमर्दनी की स्थापना होगी।
रामदरबारे
रामदरबार में भगवान राम के प्राकट्य से लेकर राज्याभिषेक तक की अनेकों
प्रतिमाएँ स्थापित होगी। भगवान राम के भक्तगण पूजन में सम्मिलित होकर
पूण्यार्जन करें।
आप यज्ञ में किस प्रकार सहयोगी बनकर
पुण्य लाभ कर सकते हैं।
यज्ञ शब्द तीन क्रियाओं द्वारा
पूर्ण होता है-देव पूजन, सत्संग और दान, इन तीनों के सम्मिलित स्वरूप
ही महायज्ञ है, अतः महायज्ञ के विभिन्न विभागों में सहयोगी बनकर
महायज्ञ का पुण्य फल किस प्रकार से प्राप्त कर सकते हैं उन उपायों का
विवरण प्रस्तुत है। आप मनोनुकूल उपाय का चयन कर अतिशय पुण्य का
लाभार्जन करें।
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