| यज्ञ
यजमान : लक्षचण्डी महायज्ञ में १०० कुण्ड होंगे। प्रत्येक कुण्ड
में एक भाग्यशाली यजमान यज्ञ कर्म हेतु बैठेंगे। इस प्रकार १०० यजमान
होंगे। सभी यजमानों से सामूहिक लक्षचण्डी का संकल्प कराया जायगा।
प्रकारान्तर से प्रत्येक यजमान के हिस्से में एक सहस्त्र चण्डी महायज्ञ
आएगा अतः महायज्ञ में सम्मिलित प्रत्येक यजमान अत्यन्त भाग्यवान होगा।
तब एक प्रश्न यह खडा होता है कि इस महायज्ञ का लाभ अन्य भक्तों एवं
सहयोगियों को कैसे प्राप्त होगा? ऐसा विराट महायज्ञ एक व्यक्ति द्वारा
सम्पन्न होना संभव नहीं, इसे सभी धर्मप्राण जनमानस के तन मन धन के
सहयोग से ही संभव किया जा सकता है। अतः सहयोगी एवं अपने हित में यज्ञ
के यजमानों द्वारा लिया गया संकल्प इस प्रकार होगा - ‘‘मैं
सम्पूर्ण समाज के प्रतिनिधि रूप से लक्षचण्डी महायज्ञ में सम्मिलित हो
रहा हूँ। महायज्ञ से उत्पन्न पण्यफल हमको हमारे इस्ट मित्रगण, कुटुम्ब
एवं महायज्ञ में सहयोग करने वाले सभी सज्जनों को प्राप्त हो। इस
महायज्ञ से विश्व कन्याण हो, आदि।’’ संकल्प के अनुरूप ही फल की उत्पत्ति होती है। संकल्प
का मतलब परमात्मा के समक्ष अर्जी हैं। इस प्रकार विश्व कल्याण की भावना
से सभी यजमान संकल्प करेंगे अतः लक्षचण्डी महायज्ञ सभी के लिए उत्तम फल
प्रद सिद्व होगा। प्रत्येक धर्मवान व्यक्ति अपने दैनिक जीवन से
सामर्थ्य के अनुसार समय और अर्थ निकालकर ईश्वरीय अराधना करता है। विशेष
पर्वों एवं अवसरो पर वह कुछ विशेष आराधना के द्वारा अपने अन्तर मन को
सन्तुष्ट करता है। महापुरूषों और संतों की कृपा से उसे जीवन में यज्ञादि
कर्मों में सम्मिलित होने का भी कदाचित अवसर प्राप्त होता है लेकिन
वर्तमान लघु कुम्भ सदृश समायोजित श्री लक्षचण्डी महायज्ञ जैसे विलक्षण
पूण्यकार्य में सम्मिलित होने वाले धर्मवान व्यक्ति को युग परिवर्तन के
महाप्रयोजन व दर्शन लाभ कर जीवन को सुखमय बनाने का सुअवसर मिलेगा। |