प्यार एक एहसास जिस शब्द का लब पर आते ही सारे शरीर का रोम रोम थिरक उठता है। क्या है ये प्यार। किस बला का नाम है प्यार। वास्तव में किसे कहते हैं प्यार। बहुत बार सोचता ह कि आखिर क्या है प्यार। परन्तु उत्तर नहीं मिलता कभी लगता है कि आकर्षण है प्यार कभी लगता है कि खिंचाव है प्यार, लेकिन वास्तव में क्या है प्यार समझने की कोशिश करता ह तो समझ नहीं पाता और समझ भी जाता ह कि क्या है प्यार। आत्मा की गहराई है प्यार आस्था का पहाड है प्यार दिल की दिवानगी है प्यार। प्यार एक अहसास है प्यार एक आस है प्यार एक समर्पण है प्यार एक पूजा है, ईबादत है। क्या नहीं है प्यार। सब कुछ है प्यार। बयां नहीं कर पा रहा ह कि आखिर क्या है प्यार । पर मेरे यार वास्तव में बहुत कुछ है प्यार और सब कुछ है प्यार। सृष्टि के कण कण में रचा बसा है प्यार। जहाँ देखो वहीं नजर आता है प्यार। रोम रोम में है प्यार। महसूस करो तो जीवन के पल पल में है प्यार। किसी ने ठीक ही कहा है कि प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो, प्यार कोई खेल नहीं प्यार अहसास है। जी हाँ प्यार तो अहसास है दिल की गहराई से जाना जाता है कि प्यार क्या है। प्यार जीने की प्यास है, प्यार दिल की उमंग है, प्यार जज्बात की रौ है, प्यार आस्था की उचाई है, प्यार समुद्र की गंभीरता है, प्यार आग की तपन है, प्यार बारिस की पहली बद सी निर्मल है, मैं क्या क्या कह क्या नहीं है प्यार। मैं पीछे भागता ह तो आगे आगे दौडता है प्यार और मैं रूक जाता ह तो बुलाता है प्यार। मैं जब नहीं चाहता तो चिढाता है प्यार और जब मैं पाना चाहता ह तो तडफाता है प्यार। जब मैं पीछे होता ह तो आगे बढता है प्यार और तब मैं आगे आता ह तो पीछे धकेलता है प्यार। प्यार पूजा है, आराधना है, आस्था है, ईबादत है व्यक्ति जिसे प्यार करता है उसे भगवान की तरह पूजता है और पुजारी की तरह पूरे मनोयोग से अपने भगवान की पूजा करता है। प्यार का अर्थ है पूजना अपने भगवान को, अपनी आस्था को, अपने विश्वास को। सींचना अपनी मेहनत से अपने पोधे को बिना किसी फल की आशा के। जिस तरह पुजारी के मन में यही विचार रहता है कि उसे बस पूजा करनी है और बस पूजा करनी है अब भगवान को क्या करना है यह तो वही जाने। विश्वास का नाम है प्यार, बिना किसी फल की आशा के। समर्पण है प्यार, त्यागना है प्यार। प्यार में पाने की चाहत नहीं होती। मन करता है कि सब कुछ लूटा द प्यार में। बस जो है वो प्यार ही है। नहीं प्राप्त करना कछ बस देना ही देना है प्यार। प्रेमी पाने की आशा नहीं करता वह तो सिर्फ त्यागना जानता है, वह तो सिर्फ छोडना जानता है। दिनभर में कितने दर्शन करता है पुजारी अपने भगवान के उसी तरह प्रेमी सिर्फ अपने भगवान से प्यार करता है और हर वक्त उसे आशा रहती है कि उसे अपने भगवान के दर्शन हो जाए। ऑंखे तरस जाती है दर्शन को लकिन मन नहीं थकता। उम्मीद रहती है कि अगर है मेरा प्यार सच्ची पूजा तो भगवान को प्रकट होना ही पडेगा।
प्रकृति के हर कण में प्यार है। रेगिस्तान की हवा में प्यार है, सागर की लहरों में प्यार है, झरने के गिरने में प्यार है नदी के बहने मे प्यार है। हिमालय की उचाईयों से पानी चल पडता है अपने प्यार को पाने में रास्ते की तमाम बाधाओं को तोडता हुआ, हिलोरे लेता हुआ बस में मन में एक उमंग की पाना है प्रियतम को, रास्ते में झरने के रूप में गिरता है, नदी के रूप में बहता है, लोगों के दोष अपने सिर लेता है और सिर्फ एक ही चाहत है कि मिलना है उस विशाल सागर से जहाँ पर जाकर सब एक हो जाएगा और वो अपने पूर्ण को प्राप्त कर लेगा लेकिन नहीं मिटती वहाँ भी प्यास, सागर में जाकर वह लहरों के रूप में उठता है, हिलोरे लेता है मानो अपने प्यार को पाकर फूला न समा रहा हो और पूरी दुनिया को बता रहा हो कि पा लो अपने प्यार को जी लो लहरों सी जिंदगी और हो जाओ पूर्ण। लहरें भी पाना चाहती है किनारों को दौडती है पत्थर से टकराती है, बिखर जाती है लेकिन फिर सिमटती है बार बार मिटकर अपने प्यार को गले लगताी है। जी हाँ यही है प्यार, मिटना है प्यार, एकाकार होना है प्यार, डर नहीं है प्यार, प्यार तो जीत है, जहाँ जीत भी जाकर समाप्त हो जाती है। शब्दों में नहीं बांधा जा सकता प्यार को। इसे तो सिर्फ महसूस किया जा सकता है। हवा का झोंका है प्यार, बसंत की बयार है प्यार, भरी गर्मी में टंडी हवा का अहसास है प्यार। इसे सिर्फ और सिर्फ जीया जा सकता है। जिसने चंद्रमा की शीतल चांदनी में कभी रात बिताई ही न हो वो कैसे बता सकता है कि उस रात का मजा क्या है। जिसने कभी गहरी रात में तारों के बीच में पूर्णिमा के चाँद को देखा न हो वो क्या जाने की चंद्रमा की चाँदनी कितनी धवल है। जिन खोजा जिन पाईयां जिसने खोजा उसी ने पाया है। प्यार किस्मत से मिलता है। मिल कर भी नहीं मिलता। खुशनसीब है वे लोग जो प्यार से प्यार करते हैं। जिन्हें प्यार से प्यार मिलता है। प्यार रास्ता दिखाता है, प्यार चलना सिखाता है। प्यार, प्यार, प्यार, प्यार क्या कहँ नहीं है और शब्द मेरे पास। शायद ऐसे ही किसी विषय पर कहा गया है कि सारी पृथ्वी का कागज बना लिया जाए और सातों समुद्रों के पानी की स्याही बना ली जाए और स्वयं गणेश भगवान भी लिखने बैठे तो नहीं लिखी जा सकती प्यार की कहानी।
haa ranga ji payar ek easas hai i respect u but love is in two part first hum pyar karte hai apne gharwalo se,bagwan se ok aur second is ladka ladki se aur ladki ladke se, so love is in only two part. jo aap kaha rehe ho na ki pyar mai sab kuch luta dena ka mann karta hai.ye sirf ladka ladki hi kar sakete hai ek dusre ke liye. so i tink proper love which we love our parents and god ok. and second love is only relative to opp.sex. ok i know u understand me. pyar sirf ek hi hota hai opp.sex ko chodkar sare love sahi hai.ye love sirf sexual hota hai where we can't cantrol our emotion ,desire etc. ok , tony brigenja (19/10/2007 16:00:18)
Well Written artical about Love..., Alok Kalla (29/10/2007 22:18:02)
nice thoughts very well said Keep it up.... :), Ranjeet (04/11/2007 19:01:17)
I think pyar ki jagar agar insan kisi ke prati cahat rakhe cahe wo koi bhi ho relative, love, god jo bhi ho agar insaan cahat rakhe to pyar apne aap panap jayega mera view hai ki pyar ishk aur mohabat ........... in teeno ko agar hindi mein likhe to pyar ka pehla word aadha hai , ishak ka dusra word aadha hai , mohabat ka teesra work aadha hai magar cahat mein sare word pure hai aur hum aapse cahat rakhte hai ok so cahat is best.............., Amit (04/11/2007 19:06:52)
Controversial Issue Depends On the Individual... But you have written too good.
One ADvise/correction "Barrish ki pehli Boond main Acid Bahut hota hai bcoz of increasing pollution so take Care Buddy????" , Pankaj Ojha (04/11/2007 19:35:37)
Nice opportunity to narrating about love...nice similes.but i wanna some differ things..its usual comparision nd superficial also..i wish to say go deep in Sagar of love,then u can find the meaning of love..that love is blank.This article seems like poem nd hardly trying to give a rhymic manner which hv only simlies nd tautology but no passion no true feelings..so plz try to think about real love nd then express what is love.so plz dont take love as a article.express ur true nd own feeling which is written after closing the eyes, Rani (04/11/2007 20:51:11)
रंगा जी आप की कलम मे वो जादू है की आप जो लिख तै हँ वो एक सही घटना की तरह लग टी हँ प्यार का बार मे हर कोई जनता हँ लकिन आप न जो लिखा है वो लाजबाब है इसका बार मे कुछ कहने को कुछ बचा ही नहीं भैरु नाथ आप की कलम मे वो ताकत दे की आप हमेसा इस तरह से लिखे हम जसे नादान लोगो को ज्ञान दाता बना रहे, shankar (05/11/2007 11:21:43)
I feel for all this i read one word is more thatn enough "" MINDBLOWING "", Atul B (05/11/2007 11:59:52)
I say something that if u uncapable to say anybody that i love u. than no mean of love. dosn't matter those person ur parents, family member, lover, beloved etc so 1st u express ur emoitions ..... n dear kindly read my small but mean full story A CUTE LOVE STORY- A BOY HAD CANCER AND HE HAD ONE MONTH TO LIVE. HE LIKED A GIRL WORKING IN A CD SHOP VERY MUCH. BUT HE DID NOT TOLD HER ABOUT HIS LUV. EVERYDAY HE WENT TO THE CD SHOP AND BOUGHT A CD ONLY TO TALK TO HER. AFTER A MONTH HE DIED.
WHEN THE GIRL WENT HIS HOME AND ASKED ABOUT HIM, HIS MOM TOLD THAT HE DIED AND TOOK HER TO HIS ROOM..................................... SHE SAW ALL THE CD'S UNOPENED ............... THE GIRL CRIED N CRIED N FINALLY DIED. YOU KNOW Y SHE CRIED? ÇOZ SHE HAD KEPT HER OWN LUV LETTERS INSIDE THE CD PACKS.SHE ALSO LUVED HIM.............
moral of the story: if u love someone......say to him directly don't wait for the destiny to play the role.............otherwise u will lose that person.............. if any spell mistake n grammatical mistak. than sorry but undestand my feelings abt love. plz say hey dear I LOVE U - jitu Bikaner, JITENDRA KR. PUROHIT "OWEN" (05/11/2007 12:47:36)
"A COMPLETE DEFINITION OF LOVE THAT WIDELY DEFINES THE INNER AND INNER INNER AND VERY INNER MEANING OF LOVE", gouri shanker derasari (05/11/2007 21:00:51)
AAP KI LEKHNI MAI WO JADU HAI KI EK BAAR KISI NA PADHNA SURU KIYA TO USKO PURA KIYA BINA NAHI CHOD SAKTA AAP LAA-JABAB HO.SHYAMJI THODA JABAB NAHI,TUSSI LA-JABAB HO JI., DR.VIPIN KUMAR PAREEK MUMBAI/BIKANER. (05/11/2007 22:34:45)
this kind of love which is projected in this aricle is platonic love . but most of us use it to show our hormonal imbalance. coz true love is rare. mutual understanding make a relation love. but most of people use it to justify their desires. and only time is the true element which can justify it. this aricle shows that everything is love but what is love nobody knows ?, suresh bissa (13/11/2007 00:39:26)
are wha bhai Ranga ji aapne to bahut tuchable likha hai . halanki bahut bhari bharkam hai can't intricate but wordings are really very nice. par bas ek baar likhke hame iski aadat mat dena .jara continue plzzzzzzzzzzzzzzz.i m waiting for next touchable article., lucky (18/12/2007 21:32:21)
AAP KI LEKHNI MAI WO JADU HAI KI EK BAAR KISI NA PADHNA SURU KIYA TO USKO PURA KIYA BINA NAHI CHOD SAKTA AAP LAA-JABAB Shayam ji aap ka dwara likha lakh bhut hi jandar ho ta ha dil ko chulata ha , Shankar vyas (Bikaner) (19/12/2007 09:11:10)
pyar hi jine kiaasha hai,pyar paye n paye pyar ka ahsas hi pyar pane se badkar hai,pyar me na din n rat na desh n cast kuch bhi nahi pyar ho bhagwan hai,pyar ke bina jindagi banjar hai pyar jindagi ko hamesha mahkata hai, anil m (19/12/2007 10:17:43)
in one sentence i can say your thinking and resarch is great keep it up ., narayan das vyas (21/12/2007 22:57:57)
WAH JANAB PYAAR KI PARIBHASHA TO KOI AAPSE SHIKHE........SHUKHRIYA, SUNIL CHOUDHARY (26/12/2007 17:26:22)
i can not read it as the fonts r not up dated so i will comment afterwords,please don't mind., dr.vipin kumar pareek (22/02/2008 23:56:38)