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Nov
श्रेष्ठता से कुछ दूर
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Manish

संदर्भ - भारत-पाक सीरीज

पाकिस्तान के विरूद्ध सीरीज ३-२ से जीतने के बाद भारतीय टीम का शूमार दुनिया की सफल टीमो में होने लगा है। इससे पूर्व आस्ट्रेलिया को भी धोनी की टीम ने कडी टक्कर दी थी। इन दोनो सीरीज में पांच मैच हारने के बावजूद टीम कभी भी एक कमजोर टीम के रूप में नही उभरी है। टीम ने जहां हारे हुए मैचो में संघर्ष किया वहीं पाकिस्तान के विरूद्ध तीन मैचो में शानदार विजय हासिल की । टीम सफलता की राह पर है और श्रेष्ठता की मंजिल सामने दिखाई दे रही है। टीम इंडिया श्रेष्ठता से बस कुछ ही दूर है।

Indian Team Captain MS Dhoniमहेन्द्रसिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है और पिछली दो सीरीज में टीम इंडिया यदि मैच हारी भी है तो संघर्ष करते हुए हारी है। टीम कहीं भी आत्मसमर्पण करती नजर नहीं आई। इस साल की शुरूआत की भारतीय टीम और वर्तमान की भारतीय टीम में कोई ज्यादा अंतर नहीं है। परन्तु यह टीम अपनी पूर्ववर्ती टीम से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। निःसन्देह भारतीय टीम के युवा सदस्यो ने भारतीय सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है परन्तु भारतीय विजय का श्रेय भारतीय टीम प्रबंध की नई नीति और कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी है। धोनी के कप्तान बनने के बाद से भारतीय टीम एक गेम व्प्लान के साथ मैदान में उतरती है। यह गेम प्लान बल्लेबाजी, क्षेत्ररक्षण और गेंदबाजी सबके लिए होता है और यह गेम प्लान प्रतिपक्षी टीम की क्षमता एवं रणनीती को ध्यान में रखते हुए बनाया जाता है। भारतीय टीम पूर्ण गेम प्लान के साथ ट्वन्टी-२० विश्वकप में उतरी थी वहां यह प्रयोग बेहद सफल रहा था। गेम प्लान के बारे में सभी सदस्यो को बताया जाता है और पूरी टीम उसकी गेम प्लान के अनुसार खेलती ह इससे टीम स्वतः ही एकजुट होकर खेलती है तथा प्रत्येक सदस्य को अपनी जिम्मेदारी का अहसास रहता है। भारतीय टीम के गेम प्लान का ही परिणाम है कि भारतीय बल्लेबाजी कभी भी ढेर नहीं हुई है। मोहाली में विकेट जल्दी जल्दी गिरने के बावजूद भारतीय टीम ३२१ रनो का स्कोर बनाने में काम्याब रही और जयुपर में पहले चार विकेट ६२ रनो पर गिर जाने के बाद भी टीम के पुछल्ले बल्लेबाजो की मदद से स्कोर पाकिस्तान के ३०६ रनो के मुकाबले २७५ रन तक पहुंचा। पूरी सीरीज में भारतीय टीम के पहले तीन बल्लेबाजो ने एक बार भी मध्यमक्रम पर दबाव नहीं आने दिया। गोहाटी में गांगुली ओर गंभीर ने ८२ रनो की साझेदारी की,मोहाली में सचिन -गंभीर ने १७३ रनो की साझेदारी की और कानपुर में सचिन- सौरव ने शानदार शुरूआत की। यह भारतीय टीम के मैच से पूर्व गेम प्लान की नीति के कारण ही पूरी सीरीज में टीम एकजुट नजर आई।

इसके अलावा पूरी सीरीज में भारतीय बल्लेबाजी मजबूती के साथ उभरी। टीम के दिग्गज बल्लेबाजो मे राहुल द्रविड को छोड कर सभी ने शानदार प्रदर्शन किया। सचिन ने मोहाली मं ९९, कानपुर मेंSachin Tendulkar ३८ और ग्वालियर में ९७ रनो की पारियां खेलीं। सौरव गांगुली बडी पारियां भले ही न खेल पाये लेकिन टीम को मजबूत शुरूआत देने में काम्याब रहे। वीरेन्द्र सेहवाग ने भी छोटी किन्तु उपयोगी पारियां खेलीं। मध्यमक्रम में युवराज सिंेह , महेन्द्रसिह धोनी और उथप्पा ने फिनिशर की भूमिका निभाई। मोहाली को छोडकी सभी मैचो में युवराज और धोनी टीम को मंजित तक ले गये। गुवाहाटी और ग्वालियर में दोनो बल्लेबाजो ने शानदार साझेदारीयां कर टीम को जीत तक ले गये। युवराज बारे में पाकिस्तान के सितारा बल्लेंबाज मिस्बाह को कहना पडा कि युवराज विश्व में सबसे खतरनाक हिटर है।  युवराजसिंह ने इस सीरीज में चार अर्धशतक लगाये और मैन ऑफ द सीरीज का खिताब जीता। महेन्दसिंह धोनी ने गुवाहटी मं ६३ रन, कानपुर में ४९ और ग्वालियर में ४२ रनो  की उपयोगी पारियां खेली । इस प्रकार टीम पूरी बल्लेबाजी मजबूती के साथ उभरी। भारतीय टीम की बल्लेबाजी को देखकर आस्ट्रेलिया के गिलक्रिस्ट को भी कहना पडा कि भारतीय बल्लेबाजी क्रम इस समय विश्व के सबसे मजबूत बल्लेबाजी क्रम में से एक है। भारतीय टीम के आगामी आस्ट्रेलिया दौर में इस बल्लेबाजी क्रम की कडी परीक्षा होगी।

जहां तक भारतीय गेंदबाजी का सवाल है। हर एक गेंदबाज ने अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन किया। हरभजन और कार्तिक ने पूरी सीरीज में पाक बल्लेबाजो को बांधकर रखा और आरपीसिंह एक बार फिर स्ट्राईक गेंदबाज के रूप में उभरे। आर पी सिंह ने आवश्यकता पडने पर टीम का ब्रेक थ्रु दिलवाये। कानपुर में उसने ३ विकेट लेकर पाक टीम को पवेलियन भेजने ने में महत्वूपर्ण भूमिका निभाई। जयपुर में उनको बाहर रखने का असर टीम पर दिखाई दिया। इस सीरीज में तेज गेदबाजो और स्पिन गेंदबाजो ने सम्म्लिति रूप  से टीम को सफलता दिलाने में महत्वूपर्ण भूमिका निभाई। जहीर, पठान और श्रीसंत ने भी पाक बल्लेबाजो पर अपना दबावने में काम्याब रहे। महेन्द्रसिंह धोनी ने भी अपने गेंदबाजो का बुद्धिमतापूर्वक उपयोग किया और गेंदबाजो भी अपने कप्तन की कसौटी पर खरे उतरे । भारतीय टीम का स्पिन और तेज गेंदबाजो का यह संयोजन आने वाली श्रंखलाओ में महत्वपूर्ण साबित होगा। महेन्द्र सिंह धोनी की पसंद मुरली कार्तिक ने आस्ट्रेलिया के बाद पाकिस्तान के विरूद्ध भी अपनी उपयोगिता सिद्ध की। मुरली कार्तिक की विविधतापूर्ण गेंदबाजी ने पूरी सीरीज में पाक बल्लेबाजो को परेशान करके रखा। मुरली इस सीरीज में सबसे किफायती गेंदबाज रहे। अंतिम मैच में यदि जहीर और आर पीसिंह को आराम नहीं दिया गया होता तो सीरीज ४-१ से भारत के पक्ष में होती।

पाकिस्तान टीम जब भारत आई तो पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटरो द्वारा यह कहा गया कि यह भारत आने वाली पाकिस्तान की अब तक की सबसे कमजोर टीम है। हकीकत यह है कि पूर्व क्रिकेटरो ने भारत से हारने सूरत में पहले से ही बहाना तैयार कर लिया था। टवन्टी-२० विश्वकप की उवविजेता टीम को कमजोर नहीं माना जा सकता। इस टीम ने मोहाली और जयपुर में भारत को पराजित कर अपनी ताकत का अहसास कराया। जिस टीम में शाहिद अफरीदी और शोएब अख्तर हो उस टीम को कमजोर नहीं कहा जा सकता है। अफरीदी ने मोहाली में पाकिस्तान टीम को विजय दिलाने में महत्वपूर्ण निभाई। इसके अलावा शोएब मलिक ओर मिस्बाह ने भी सीरीज ने उपयोगी पारियां खेली। शोएब अख्तर इस सीरीज में जरूर प्रभावहीन रहे । वे अपनी ख्याति के अनुरूप  प्रदर्शन नही कर पाये। पूरी सीरीज में पाकिस्तानी टीम बिखरी हुई नजर आई। फिर भी पाकिस्तान टीम के श्कप्तान शोएब मलिक ने अपनी टीम युवा टीम के साथ भारतीय टीम को टक्कर देने का प्रयास किया।  इस समय पाकिस्तान टीम युवा प्रतिभाशाली खिलाडयो से युक्त होने के बावजूद खराब दौर से गुजर रही है। परन्तु पाकिस्तान की यह क्रिकेट टीम भविष्य की टीम है।

भारतीय टीम संतुलित एवं संगठित नजर आ रही है। यह टीम दुनिया की किसी भी टीम का मुकाबले करने के लिए तैयार है। आने वाली एकदिवसीय श्रंखलाओ में उसका मुकाबला दुनिया की श्रेष्ठ टीमो से होगा और उनके विरूद्ध सफलता प्राप्त कर भारतीय टीम श्रेष्ठता की मुहर लगा सकती है। सफलता के रथ के सवार भारतीय टीम के लिए श्रेष्ठता से थोडी ही दूर है।


मनीष कुमार जोशी




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Comments to this Article

hgh, vincentraj (01/09/2008 09:47:12)


etna lamba,koi nahi padhega, shubham (10/09/2008 17:32:29)


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