Tuesday, 24 October 2017

राजे ने जाना इतिहास के पन्नों का संरक्षण

मुख्यमंत्री ने राजस्थान अभिलेखागार देखी चित्र प्रदर्शनी व पुस्तक जारी

राजे ने जाना इतिहास के पन्नों का संरक्षण

बीकानेर, गणतंत्र दिवस समारोह मनाने बीकानेर आई मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्थान राज्य अभिलेखागार मे जोधपुर राज्य की ऐतिहासिक बहियों, मारवाड़ का अपुरालेखिय ऐतिहासिक बहियों, मारवाड़ का अपुरालेखीय इतिहास तथा किशनगढ़ राज्य के 5.08 लाख पृष्ठों का बटन दबाकर आॅनलाईन किया। मुख्यमंत्री ने 55 लाख ऐतिहासिक अभिलेखों की आॅनलाईन प्रक्रिया तथा बीकानेर संभाग के डिजिटाईज्ड पट्टा अभिलेखों का अत्यंत सुक्ष्मता से निरीक्षण किया।
मारवाड़ के डिजिटाइज्ड हो रहे अभिलेखों तथा विभागीय प्रकाशन को देखने के पश्चात शोध कक्ष में शोधार्थियों से शोध विषयों पर बात-चीत की। अभिलेखों को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखने के लिये बनायी गयी माइक्रोफिल्मों को देखकर wonderful और amazing  कहा। यही शब्द सुव्यवस्थित विभागीय पुस्तकालय की दुर्लभ पुस्तकों को देखकर भी कहे।
राजे ने  स्वतंत्रता सेनानी दीर्घा में स्वतंत्रता सेनानियों के संस्मरण व प्रकाशन भी सुने तथा टेस्सीटोरी कक्ष में इटेलियन विद्वान एल.पी. टेस्सीटोरी के हस्तलिखित हिन्दी व अंग्रेजी के पत्रों को पढ़कर खुशी व आश्चर्य व्यक्त किया तथा उनके शोध कार्य की प्रशंसा की।
इस दौरान विभाग की ओर से लगायी गयी “बीकानेर राज्य की गंगा रिसाला” प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया और ऊँटों के सम्बन्ध में दुर्लभ जानकारियां भी प्राप्त की।
विभागीय अभिलेख भवन में रखें सुव्यवस्थित अभिलेखों तथा साफ-सफाई  को देखकर निदेशक अभिलेखागार से कहा-1953 से पहले के अभिलेखों तथा इतिहास को आपने सुरक्षित कर दिये 1953 ई. के बाद के कौन करेगा ? अभिलेख भवन में ही मुख्यमंत्री ने विश्व प्रसिद्ध 22 फुट लम्बी “पुरन्धर की संधि” का फारसी से हिन्दी व देवनागरी में अनुवादित डा. महेन्द्र खड़गावत द्वारा संपादित पुस्तक का विमोचन किया। वही “फारसी फरमानों के प्रकाश में मुगलकालीन भारत एवं राजपूत शासक, भाग-3” का भी विमोचन किया। इस पुस्तक में मुगल शहजाद,े शहजादियों व बेगमों द्वारा राजपूत मनसबदारों को लिखे गये 117 फारसी फरमानों का मूल पाठ सहित हिन्दी व देवनागरी में अनुवाद किया गया है। 

मुख्यमंत्री ने इस दौरान  राजस्थान में फैमिन, गंग कैनाल तथा स्टेट टाईम के व वर्तमान लैण्ड रेवेन्यू सिस्टम पर शोध के लिये निर्देश के साथ साथ बीकानेर में देश का प्रथम अभिलेख म्यूजियम के लिए भी अपनी सहमति जताई ।

अन्त में प्रमुख शासन सचिव कला एवं संस्कृति श्री शैलेन्द्र अग्रवाल तथा निदेशक डा0 महेन्द्र खड़गावत ने मुख्यमंत्री को फारसी फरमानों के प्रकाश में मुगल कालीन भारत एवं राजपूत शासक के तीनों वाॅल्यूम तथा राजस्थान थ्रू दी एजेज के तीनों वाॅल्यूम व विभाग के एतिहासिक मोन्यूमेन्ट को प्रतीक चिन्ह के रूप में भेंट किये।