Monday, 23 October 2017

अनुसंधान उपायों से बढेगी दुग्ध उत्पादकता

उपमहानिदेशक पाठक ने किया वेटरनरी विवि के पशुधन अनुसंधान केन्द्रो का अवलोकन

बीकानेर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के उपमहानिदेशक (पशुविज्ञान) प्रो. के.एम.एल. पाठक ने रविवार को राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कोडमदेसर और बीछवाल पशुधन अनुसंधान केन्द्रो का अवलोकन करके देशी गौ वंश और बकरियों की नस्ल सुधार और विविध कार्यों को उच्च कोटि का बताकर सराहना की। प्रो. पाठक ने कहा कि थारपारकर, राठी, कांकरेज, गिर और साहीवाल नस्लों के उन्नयन की महत्वपूर्ण परियोजना और भेड़-बकरियों पर अनुसंधान से राज्य के पशुपालकों की आर्थिक दशा में आमूलचूल परिवर्तन लाने के वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रयास सराहनीय है। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने बताया कि राजस्थान कृषि प्रतिस्पद्र्धा परियोजना के तहत राज्य में मारवाडी और सिरोही बकरियों की श्रेष्ठ नस्ल संवद्र्धन के लिए कोडमदेसर और चित्तौडग़ढ़ में एक-एक मेगा बकरी फार्म को मंजूरी मिली है। विश्वविद्यालय इस परियोजना के तहत पोषित बकरी पालकों को प्लाज्मा तकनीकी ज्ञान प्रशिक्षण भी देगा। उपमहानिदेशक प्रो. पाठक ने कोडमदेसर में मारवाड़ी बकरियों, मगरा भेड़ों तथा कांकरेज नस्ल की गायों का अवलोकन कर उनकी दुग्ध क्षमता की जानकारी ली। इस केन्द्र पर कांकरेज नस्ल की गाय से प्रतिदिन 17 लीटर तक दूध प्राप्त किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत साहीवाल प्रजनन की नई परियोजना के कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. गहलोत ने बताया कि 15 करोड़ रूपये लागत की परियोजना में 250 साहीवाल गायें और 10 प्रजनक सांडों का फार्म स्थापित किया जा रहा है। राज्य में पशु नस्ल संवद्र्धन कार्यों से दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किये जा सकेगें। उपमहानिदेशक ने बीछवाल पशुधन अनुसंधान केन्द्र पर थारपारकर नस्ल संवद्र्धन के अलावा मारवाड़ी बकरी से शुष्क क्षेत्र में मांस उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। केन्द्र पर हरा चारा उत्पादन, ग्रीन हाउस, पॉलीहाउस आदि का भी निरीक्षण किया। कोडमदेसर में सेवण घास विकास, चारा संरक्षण कार्य के साथ साथ एमू प्रजनन फॉर्म स्थापित किया जाना भी प्रस्तावित है। परिषद् के पूर्व सहायक महानिदेशक (पशुविज्ञान) डॉ. जे.एस. भाटिया ने भी पशुधन अनुसंधान केन्द्र की गतिविधियों का अवलोकन कर परियोजनाओं की सराहना की। अतिथियों ने दोनों पशुधन अनुसंधान केन्द्रो पर पौधारोपण भी किया गया। इस अवसर पर वेटरनरी कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. बी.के. बेनीवाल, फॉर्म प्रभारी प्रो. विजय चौधरी और प्रो. सुभाष गोस्वामी भी उनके साथ थे। 

 

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