Monday, 18 June 2018
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रेशम कीट पालन ने खोले स्वरोजगार के द्वार

1369 परिवारों ने काकून उत्पादन से कमाए 78 लाख

 

जिला में स्थापित किए गए हैं सात रेशम कीट पालन केंद्र 

 

 

हमीरपुर 8 सितम्बर (विजयेन्दर शर्मा)। हमीरपुर जिला में रेशम कीट पालन ने गरीब तथा निर्धन लोगों को स्वरोजगार की राहें दिखाई हैं। जिला में 1369 परिवारों ने रेशम कीट पालन के माध्यम से 78 लाख की आमदनी अर्जित की है। रेशम कीट पालन व्यवसाय से जुड़ कर गांव री-भलाणा की मीना देवी प्रति वर्ष 60-65 हजार तथा घलूं के अमर सिंह 50-55 हजार रूपये काकून उत्पादन और शहतूत की नर्सरी से आय अर्जित कर रहे हैं जबकि भड़ोली के विजेन्द्र सिंह , कांगू की राजेन्द्रा देवी , अमतर बेला के धर्म सिंह 12-20 हजार रूपये ककून उत्पादन से आय अर्जित कर रहे हैं। 

     सरकार द्वारा काकून उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्प्रेरित विकास योजना भी आरंभ की गई है इस योजना का हमीरपुर जिला के किसानों ने भरपूर लाभ उठाया तथा प्रतिवर्ष कानून उत्पादन में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। गत वर्ष जिला में 1355 किसान काकून उत्पादन के साथ जुड़े थे, यह आंकड़ा चालू वित्त वर्ष में बढक़र 1369 हो गया है।  

    केन्द्रीय रेशम बोर्ड द्वारा समय-समय पर  काकून उत्पादन के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है ताकि किसान इस रेशम कीट पालन के साथ जुड्कर बेहतर मुनाफा अर्जित कर सकें। 

उद्योग विभाग के महा प्रबन्धक, उद्योग राम पाल ने बताया कि रेशम कीट पालन में आधुनिक तकनीकों  का प्रयोग करने से उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जा सकती है। रेशम कीट पालन के लिए माह मार्च-अप्रैल और अगस्त-सितम्बर में सबसे उपयुक्त समय है। शहतूत के 300 पेड़ों से एक साल में तीन फसलें लेकर कम से कम 15 से 18 हजार रूपये की आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंंने बताया कि रेशम की फसल के लिये लगभग 20 दिनों तक परिश्रम करना पड़ता है। विभाग द्वारा कीट पालकों को  कीट पालन कक्ष  बनाने के लिये 75 हजार रूपये अतिरिक्त जाली, स्टैण्ड,स्प्रे पम्प, ब्लोअर और प्लास्टिक के टप-ट्रे आदि के अलावा आवश्यकता पर दवाईयां उपदान पर उपलब्ध करवाई जा रही  हैं। 

उन्होंने बताया कि जिला में 7 रेशम कीट पालन केन्द्र नादौन, कांगू, बल्ह-बिहाल, भलवाणी, बौहणी, सलासी और जंगलवैरी में स्थापित हैं और इन केन्द्रों के माध्यम से कीट पालकों को रेशम कीट बीज उपलब्ध करवाया जाता है तथा  उत्पादित ककून इन केन्द्रों पर एकत्रित किया जाता है। उन्होंने बताया कि काकून उत्पादन के साथ शहतूत की नर्सरी का व्यवसाय करने वालों से विभाग द्वारा मनरेगा  के तहत  4.5 रूपये प्रति पौधा क्रय किया जाता है जिससे उत्पादकों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।

विकास अधिकारी सेरीकल्चर राम स्वरूप शर्मा ने बताया कि वर्ष 2014-15 में 1355 कीट पालकों को 1021.5 औंस रेशम कीट वितरित किया और उनके द्वारा 40,545.21 किलो ग्रीन ककून  उत्पादन हुआ है। उन्होंने बताया कि इसी अवधि में 738 किसानों को 73,800 शहतूत पौधे वितरित किए गये।  चालू वर्ष में अब तक 1369 कीट पालकों को 772 औंस रेशम कीट वितरित किया गया और उनके द्वारा 33030 ग्रीन ककून का उत्पादन कर 78.17 लाख रूपये की राशि प्राप्त हुई । 

 

    उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर का कहना है कि सरकार द्वारा स्वरोजग़ार शुरू करने के लिये चलाई जा रही योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेशम कीट उत्पादन के लिये उत्प्रेरित विकास योजना शुरू की गई है, जिसके तहत किसानों को सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही काकून के विपणन के लिये समय-समय पर रेशम कीट केन्द्रों पर मेलों का आयोजन किया जाता है ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके।

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