Saturday, 18 August 2018
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राष्ट्र के ऊँट पालक एक साथ डॉ. पाटिल

ऊंट पालकों और वैज्ञानिकों के बीच हुए विचार आदान प्रदान

बीकानेर, राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में को चल रही वैज्ञानिक एवं भागीदार समन्वय  कार्यशाला में गुजरात की स्वयं सेवी संस्था ‘सहजीवन’ के प्रतिनिधि एव कच्छी नस्ल समिति के तीन सदस्य अमद हुसैन इस्माइल,  अमद ताजममुद एवं इस्माइल अमद पहुचे. केंद्र के निदेशक डॉ. एन. वी. पाटिल ने इस अवसर पर बताया गया की विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधियों के पहुचने से पुरे राष्ट्र के उष्ट्र पालको का  मनोबल बढा है एवं ये सभी कार्यशाला में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे है एवं अपने सुझाव भी दे रहे है  जिससे हम उम्मीद करते है की कार्यशाला अत्यंत सफल होगी. आज के सत्र की शुरुआत करते हूऐ कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. एस. सी. मेहता प्रधान वैज्ञानिक ने गुजरात से आये पशु पालको व स्वयं सेवी संस्था प्रतिनिधि डॉ. नाथानी का स्वागत किया एवम् बताया की रा. उ. अनु. के लिये आज का दिन ऐतिहासिक दिन है क्योकि आज गुजरात, उदयपुर, जम्मू कश्मीर, लेह लदाख व बीकानेर के आसपास  के गावों के पशुपालक व स्वयं सेवी संस्था के कार्यकरता सभी एक मंच पर हे एव  आपस में एक दूसरे से उष्ट्र पालन  की विधियों व विशिष्टताओ के बारे  में बातचीत कर रहे हे. डॉ. मेहता ने बताया की जम्मू कश्मीर से पधारे किसानों एवंम् युवाओं ने दूध निकालने का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया.  विभिन्न राज्यों से आये उष्ट्र पालको को  ऊँटो पर बनी फिल्म दिखा कर इस क्षेत्र में हो रहे से अनुसन्धान का परिचय कराया. साथ ही इन बाहर से पधारे उष्ट्र पालको की केन्द्र के साथ अनुसन्धान में सहयोग कर रहे है स्थानीय उष्ट्र पालको  के साथ एक मुलाकात गावों में करवाई जहां इन्होने विचारों का आदान प्रदान किये. आज के इस तकनीकी सत्र के अध्यक्ष डॉ. सज्जन सिंह प्रधान वैज्ञानिक थे. आज के तकनीकी सत्र में डॉ. एस. के घोरुई प्रधान वैज्ञानिक ने ऊँटो में पाई जाने वाली  विभिन्न अन्त: परजीवीयो व इनके निदान के बारे में विस्तार में बताया. डॉ. एफ. सी. टुटेजा ने फफूंद जनित रोग व इनके परम्परागत उपचार के बारे में जानकारी दी डॉ. सुमन्त व्यास वरिष्ट. वैज्ञानिक ने  ऊँटो में प्रजनन समस्याओं का निराकरण एव् निरन्तर प्रजनन कर तीन वर्ष मै दो बच्चे लेने पर जोर दिया. डॉ. निर्मला सैनी वरिष्ट. वैज्ञानिक ने सुक्ष्म पोषक तत्वों के उत्पादन व प्रजनन पर प्रभाव के बारे में बताया. इसके साथ ही पशु पालको को आहार उत्पादन इकाई पर विभिन्न प्रकार के चारा व दानो के समिश्रण कर ऊँटो की विभिन्न शारीरिक अवस्थाओं के आधार पर चारा गट्टी बनाने का प्रशिक्षण दिया 

NRCC   National Camel Research Center   Conference on Camel