Sunday, 17 February 2019
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चुनौतीपूर्ण क्षैत्रों में महिला उद्यमियों के प्रयास सराहनीय- प्रो. सुथार

राजकीय महिला पोलीटेक्निक महाविद्यालय में उद्यमिता जागरुकता शिविर का शुभारंभ

बीकानेर, अपनी परंपरागत छवी से उपर उठकर भारतीय महिलाऍ आज विभिन्न चुनौती पूर्ण क्षैत्रों में प्रयासरत है तथा सफलता अर्जित कर रही है। जैइसी पॉल, इंदिरा नूई, किरण मजूमदार, चंदा कोछड तथा नीलम धवन आदि भारत की महिला उद्यमियों ने अपनी वैश्विक पहचान बनाई है। उद्यमिता के साथ साथ इन्होंने अपने परिवार एवं केरियर के बीच में जबर्दस्त तालमेंल बिठाने का भी सराहनीय कार्य किया है। विश्व की सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में अब भारतीय महिलऍ भी अपना स्थान बना रही है। उक्त विचार सोम प्रकाश सुथार  ने राजकीय महिला पोलिटेक्निक बीकानेर में प्रारंभ हुए तीन दिवसीय उद्यमिता जागरुकता शिविर के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में रखें। सुथार ने बताया कि भारत में तकनीकी एवं प्राैद्योगिकी क्षैत्र प्रगतिशील है औेर आने वाले दशक में इसकी अपार संभावनाऍ है। सुथार ने कहा कि उद्यमिता का विकास पर्यावरणीय घटकों पर निर्भर काता है अतः विद्यार्थीयों को बचपन से ही उद्यमिता की आदत डालनी चाहिए। सुथार ने बताया कि जोखिम से खेलने वाले ही उद्यमिता का वरण करते है। सुथार ने उद्यमिता विकास केन्द्र  द्वारा विगत वर्ष आयोजित कार्यक्रम की सफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कार्यक्रम से प्रेरणा लेकर कुछ लडकियों ने देश और विदेश में अपने स्वयं के प्रतिष्ठान स्थापित किए है। 


कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि के रुप में बोलते हुए महाविद्यालय की व्याख्याता श्रीमती संगीता सक्सेना  ने कहा कि उद्यमिता हम मारवाडियों का वंशानुगत स्वभाव है। श्रीमती सक्सेना के अनुसार एक उद्यमी परिवर्तन का वाहक होता है जो शुरुआत में कठिनाईयों से सामना करते है तथा उत्तरार्द्ध में सृजन का आनंद प्राप्त करते है। श्रीमती सक्सेना ने प्रतिभागियों को कर्मयोगी बनने की प्रेरणा देते हुए कहा कि विचारों से कर्म बनते है अतः विचारों की शुद्धता द्वारा अच्छे कर्मो का निष्पादन किया जा सकता है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षा श्रीमती इंदू कश्यप ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा जिन पाठ्यक्रमों का निमार्ण किया जाता है विद्यार्थी उन्हीं में उलझ कर अपनी नैसर्गिक प्रतिभा को खो रहे है। सरकार द्वारा गरीबी उन्मूलन हेतु संचालित कार्यक्रमों में कौशल एवं उद्यमिता विकास पर ध्यान केन्दि्रत करने की आवश्यकता है जिससे शहरी एवं ग्रामीण बेरोजगारी से निजात पाया जा सकता है।   श्रीमती इंदू ने उद्यमिता के नये आयाम प्रस्तुत किए तथा बीकानेर की महिला उद्यमियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

मुख्य वक्ता के रुप में बोलते हुए श्रीमती दिप्ती कश्यप ने कहा कि टक्सटाइल्स, फैशन डिजाईन आदि क्षैत्रों में कम पूंजी के साथ अच्छी शुरुआत की जा सकती है। श्रीमती कश्यप ने महिला उद्यमियों द्वारा वहन की जाने वाली कठिनाईयों एवं उनके निवारण पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्रीमती कश्यप ने गृहणियों की सामाजिक भूमिका की प्रशंसा करते हुए उन्हें आर्थिक कि्रयाओं में शामिल होने का आह्वान किया।  

उद्यमिता विकास केन्द्र के वरिष्ठ संकाय सदस्य रवि कांत व्यास ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा केन्द्र की पृष्ठभूमि एवं आगामी कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों, राजकीय महिला पोलीटेक्निक महाविद्यालय प्रशासन तथा अभियांत्रिकी महाविद्याल बीकानेर प्रशासन के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर नियमित सत्रों का आयोजन किया गया। 

Polytechnic College of Bikaner, Giriraj Kiradoo, Ravi Kant Vyas,

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