Monday, 23 October 2017

उपभोक्ता मामलात निदेशालय को जल्दी ही मूर्त रूप दिया जायेगा-मुख्यमंत्री

श्रीमती राजे, शुक्रवार को यहां मुख्यमंत्री कार्यालय में बजट पूर्व बैठक के द्वितीय चरण में गैर सरकारी संगठनों, उपभोक्ता मंचों तथा संगठनों से बजट पूर्व चर्चा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहीं थीं।

जयपुर, २ नवम्बर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि राज्य में शीघ्र ही उपभोक्ता मामलात निदेशालय की स्थापना को मूर्त रूप दिया जायेगा।  उन्होंने बताया कि गत वर्ष बजट पूर्व चर्चा के दौरान आये सुझावों पर राज्य में इस वित्तीय वर्ष के बजट में निदेशालय की स्थापना की घोषणा की गई थी।
श्रीमती राजे, शुक्रवार को यहां मुख्यमंत्री कार्यालय में बजट पूर्व बैठक के द्वितीय चरण में गैर सरकारी संगठनों, उपभोक्ता मंचों तथा संगठनों से बजट पूर्व चर्चा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहीं थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का विकास सहभागिता से ही सम्भव है। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य का बजट बनाने से पूर्व विभिन्न वर्गों, संगठनों आदि से चर्चा कर उनके महत्वपूर्ण सुझाव लिये जा रहे हैं।
श्रीमती राजे ने कहा कि अप्रैल, २००७ से हमने स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं को उपभोक्ता संरक्षण से सम्बन्धित कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना प्रारम्भ की है। इस योजना के तहत अब तक सात प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने विश्वास प्रकट किया कि यह योजना सफल होगी।
बैठक में कंज्यूमर्स एक्शन एण्ड नेटवर्क सोसायटी ’’केन्स‘‘ द्वारा सुझाव दिये गये कि उपभोक्ता मंच में लगने वाली कोर्ट फीस गरीब लोगों के लिए राज्य सरकार द्वारा वहन की जानी चाहिये। करों में राहत एवं भूमि के नियमन राशि में कमी हो, प्रत्येक जिले में एक उपभोक्ता भवन बनाया जाए, जयपुर में दो और उपभोक्ता मंच गठित किये जाएं जिससे उपभोक्ता मामलों का त्वरित गति से निस्तारण सुनिश्चित हो सके।
मारूति सेवा समिति द्वारा सुझाव दिया गया कि जिला मुख्यालयों पर उपभोक्ता सूचना केन्द्र, परामर्श केन्द्र तथा उपभोक्ता हेल्प लाइन स्थापित की जाए। मिलावट की जांच के लिए सक्रिय उपभोक्ता संगठनों के माध्यम से जिला मुख्यालयों पर प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएं। गांवों में उपभोक्ता जागरण के लिए विभिन्न अवसरों पर लगने वाले मेलों में प्रचार-प्रसार सामग्री सुलभ करवाई जाए। उपभोक्ता संगठनों को विभिन्न समितियों में शामिल किया जाए।
उपभोक्ता सेवा समिति, टोंक के सुझाव थे कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुसंगठित एवं जनोपयोगी बनाया जाए। शिक्षा में गुणवत्ता के लिए शिक्षकों से कराए जाने वाले विविध कार्य राज्य के बैरोजगार युवकों से कराए जाएं ताकि शिक्षक अध्यापन पर अधिक ध्यान दें। योजना नीचे के स्तर पर तैयार की जाए तथा स्वायत्तशासी एवं पंचायती राज संस्थाओं को और अधिक सुदृढ किया जाए।
बैठक में अजमेर जिला ग्रामीण उपभोक्ता संस्थान मसूदा में सुझाव दिया कि सामुदायिक चिकित्सालयों को जवाजा, मसूदा, पुष्कर में नये रोगी वाहन उपलब्ध करवाए जाएं।  ग्रामीण क्षेत्र की कॉलेज जाने वाली छात्रओं को सरकार किराया वाउचर की सुविधा का लाभ दे।  अनेक प्रकरणों में ऐसे असहाय लोगों की देखभाल उनके पुत्र नहीं करते। इसके अलावा अन्य संस्थाओं ने भी सुझाव दिये। बैठक में वित्त राज्य मंत्री श्री वीरेन्द्र मीणा, जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष श्री एस.एन. गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव वित्त, श्री राजीव महर्षि, विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी तथा उपभोक्ता संगठनों, गैर सरकारी संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।