Saturday, 25 November 2017
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तकनीक के साथ बढ़ी फोटोग्राफी की चुनौतियां एवं प्रतिस्पर्धा

माॅडर्न स्टूडियो के 60वंे स्थापना दिवस पर ‘वर्तमान में फोटोग्राफी की दिशा और दशा’ विषय संगोष्ठी आयोजित

तकनीक के साथ बढ़ी फोटोग्राफी की चुनौतियां एवं प्रतिस्पर्धा

बीकानेर, 4 नवंबर। माॅडर्न स्टूडियो का 60वां स्थापना दिवस शनिवार को मनाया गया। इस अवसर पर स्टूडियो के संस्थापक स्वर्गीय मदन गोपाल बिस्सा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया गया तथा ‘वर्तमान में फोटोग्राफी की दिशा एवं दशा’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।   

       संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश सरकार के सेवानिवृत पुलिस उपाधीक्षक केएल आचार्य ने कहा कि वर्तमान में फोटोग्राफ की नई-नई तकनीकें इजाद हुई हैं। इन तकनीकों के साथ, फोटोग्राफी में प्रतिस्पर्धा एवं चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय मदन गोपाल बिस्सा, बीकानेर में फोटोग्राफी एवं प्रेस फोटोग्राफी के पितामह थे। उन्होंने फोटोग्राफी को नए आयाम दिए। युवा पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से सीख लेनी चाहिए। यूको बैंक के पूर्व प्रबंधक लक्ष्मीनारायण बिस्सा ने कहा कि फोटोग्राफी एक कला है तथा स्व. मदन गोपाल बिस्सा ने इस कला सिद्धहस्त व्यक्तित्व थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद से अटल बिहारी वाजपेयी के विभिन्न कार्यक्रमों को कैमरे में उतारा।

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार सुरेन्द्र कुमार पुरोहित ने कहा कि गत साठ वर्षों में फोटोग्राफी में अनेक परिवर्तन हुए हैं। माॅर्डन स्टूडियो इन बदलावों का साक्षी है। उन्होंने कहा कि तीसरी पीढ़ी इस परम्परा का निर्वहन कर रही है। यह एक मिसाल है। सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी हरि शंकर आचार्य ने कहा कि डिजीटल कैमरों ने फोटोग्राफी को आसान बना दिया है, हालांकि प्रेस फोटोग्राफी सदैव चुनौतीपूर्ण होती है। प्रेस फोटोग्राफर की निर्णय क्षमता एवं एंगल का चयन उसकी सबसे बड़ी खूबी होती है।

सेवानिवृत कार्यालय अधीक्षक जेठमल बिस्सा ने कहा कि स्व. मदनगोपाल बिस्सा ने मुंबई में फिल्मी पत्र-पत्रिकाओं के लिए फोटोग्राफी के साथ अपने कॅरियर की शुरूआत की। उनके द्वारा 1957 में स्थापित किया गया यह स्टूडियो आज वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है। एपीथ्रीआई के पूर्व अध्यक्ष बसंत व्यास ने कहा कि आज से तीन-चार दशक पूर्व फोटोग्राफी में अनेक मुश्ेिकलें थीं। फोटो बनाने की प्रक्रिया जटिल थीं। धीरे-धीरे परिस्थितियां बदलीं और आज मोबाइल कैमरे ने इसे नए रूप में ढाल दिया है।

इस अवसर पर रैनोसिस के निदेशक देवकीनंदन व्यास, जागृत जनमत समाचार पत्र के संपादक विजय आचार्य, सनार्क टैक्नोलाॅजी के सीइओ रजनीश व्यास तथा धरणीधर पर्यावरण समिति के सचिव जितेन्द्र आचार्य तथा धर्मेन्द्र बोहरा ने स्व. बिस्सा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विचार रखे। इस दौरान माॅडर्न स्टूडियो की संचालक सरला देवी बिस्सा, गोल्डन सेंड प्रोडक्शन के सीइओ हिमांशु व्यास, युवा अभिनेता अनुराग व्यास, जय गोपाल बिस्सा, बृज गोपाल बिस्सा, अंकित, शरद आदि मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने वर्ष 2018 के कलैण्डर का विमोचन किया। बृज गोपाल बिस्सा ने बताया कि इस कलैण्डर में सरकारी छुट्टियों का संकलन किया गया है। इससे पहले स्व. मदन गोपाल बिस्सा एवं स्व. रामगोपाल बिस्सा के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की गई।

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