बीकानेर, जिला कलक्टर डॉ.पृथ्वीराज ने कहा कि 50 लाख की लागत से कोलायत में राजस्थान के पहले चाइना क्ले फर्नेस सेंटर स्थापित होने से क्षेत्र की पुश्तैनी मिट्टी से बर्तन बनाने वाले लोगों को नई तकनीक व ज्ञान मिलेगा। लोगों के आय के साधन बढेंगे तथा बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्र का विकास होगा। इस केन्द्र में स्थानीय मिट्टी व चाइना क्ले को मिलाकर विभिन्न तरह के उपयोगी बर्तन, खिलौने व सामान आदि बनाएं जाएगे।
डॉ.पृथ्वी शुक्रवार को बीकानेर से 50 किलोमीटर दूर जिला प्रशासन, पंचायत समिति व जिला उद्योग संघ की ओर से स्थापित चाइना क्ले फर्नेस सेंटर के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। इस सेंटर में इंजीनियरिंग कॉलेज के सिरमिक्स विद्यार्थी चाइना क्ले व मिट्टी के अत्याधुनिक कलात्मक डिजाइन के बर्तन बनाने का प्रशिक्षण देंगे।
जिला कलक्टर ने कहा कि हमें घर-घर में कुटीर व लघु उद्योग स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। इस संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों का स्वयं सहायता समूह का गठन किया जाएगा व इन्हें उत्पाद बनाने के लिए ऋण के रूप में आर्थिक इमदाद दी जाएगी तथा उत्पादों के बेहतर विपणन समुचित व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि बीकानेर के इंजीनियरिंग महाविद्यालय में सिरमिक्स इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के प्रशिक्षण से कुम्हार व अन्य पुश्तैनी मिट्टी का कार्य करने वाले कामगारों व हस्तशिल्पियों को बाजार की मांग को देखते हुए श्रेष्ठ मिट्टी के बर्तन बनाने का प्रशिक्षण मिलेगा। इससे उनका तकनीकी कौशल व बौद्घिक विकास होगा जिससे वे बेहतर कार्य कर सकेंगे।
जिला कलक्टर ने कहा कि सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत आयोजित इस चाइना क्ले फर्नेस सेंटर में मिट्टी के बर्तनों की रंगाई, फिनिसिंग व कला पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारम्परिक तकनीक व कौशल व आधुनिक तकनीक के मेल से ग्रामीण हस्तशिल्पियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने प्रशिक्षण में लगे इंजीनियरों से कहा कि वे मिशन के रूप में कार्य करते हुए इसकी विशिष्टताओं को आम लोगों तक पहुंचाएं। सिरेमिक्स इंजीनियरिंग के विद्यार्थी भी पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण दें। उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि केन्द्र में बनने वाले उत्पादों की बेहतर विपणन के लिए भी कार्य करें।
केन्द्र के सिरमिक्स सलाहकार इंजीनियर ए.के. गुप्ता ने कहा कि केन्द्र से हस्तशिल्पियों व पुश्तैनी कलात्मक कार्य करने वाले कामगारों की रचनात्मकता, ज्ञान व शक्ति बढेगी। प्रशिक्षण के बाद उत्पादों का प्रदर्शन व विक्रय से सीमांत क्षेत्र में ग्रामीण कला कौशल बढेगा । इस अवसर पर माइन्स ऑनर एसोसिएशन के श्रीधर शर्मा व गांव कोटडी की सरपंच श्रीमती गंगादेवी, जिला उद्योग अधिकारी प्रेम सिंह राठौड., मींगदास, जिला परिषद सदस्य गणपत राम, उप खंड अधिकारी व विकास अधिकारी आदि ने कलक्टर का स्वागत किया।
इंजीनियरिंग के छात्र इंटर्नशिप करेंगे : डॉ.पृथ्वीराज ने कहा कि इस सेंटर में ट्रेनिंग देने के कार्य एवं राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय के सिरमिक्स ब्रांच के छात्र इंटर्नशिप के दौरान यहां आकर प्रशिक्षणार्थियों को नई-नई डिजाइन और आधुनिक तकनीक से रूबरू करवाएंगे।
कॉलेज फैक्ल्टी भी आएंगे: डॉ.पृथ्वी ने कहा कि सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत दस्तकारों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञ के रूप में राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय की फैकल्टी की सेवाएं भी ली जाएगी। फैकल्टी यहां सप्ताह में एक दिन अथवा प्रशिक्षण अवधि के दौरान चार बार आकर नूतन तकनीक के बारे में दस्तकारों को बताएंगे।
शो रूम बनेंगे व पर्यटकों को जोडा जाएगा: डॉ.पृथ्वी ने कहा कि ट्रेनिंग सेंटर में बनने वाले उत्पादों के विपणन के लिए सेंटर के मुख्य दरवाजों से सटते हुए एक भव्य शो रूम बनाया जाएगा तथा इन उत्पादों को बीकानेर आने वाले देशी विदेशी पर्यटक खरीद कर सके इसके लिए जिले के पर्यटन विभाग के साथ मिलकर एक कार्य योजना के तहत प्रचार प्रसार किया जाएगा।
उत्पाद देश की राजधानी में : डॉ.पृथ्वी ने चाइना क्ले फर्नेस सेंटर मे ंप्रशिक्षण लेने वाले व इसके संचालकों से कहा कि इस सेंटर में बनने वाले कप प्लेट, कुल्हड, गमलों पर बी.ए.डी.पी., बीकानेर का नाम अंकित करें। उत्पादों को इतना बेहतर बनाए कि वे अंतरराष्ट्रीय कंपनी के उत्पादों के मानक पर खरे उतरे। यहां निर्मित उत्पादों को भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में भेजा जाएगा जहां ये अपनी गुणवता से बी.ए.डी.पी. व बीकानेर का नाम रोशन करेंगे।
कलक्टर ने बनाया मिट्टी का प्याला: जिला कलक्टर ने केन्द्र में स्वयं मिट्टी का कलात्मक प्याला बनाया तथा बनाने की तकनीक यथा फेबरिकेशन तकनीक(आकृति देना), कास्टिंग अंडर ग्रेविटी और लॉ प्रेशर, प्लास्टिक फार्मिंग, स्लेब, थ्रोविंग तथा केन्द्र में स्थापित फर्नेस, बोलमिल, एजिटेटर, स्क्रू प्रेस, मॉलिोगिड, जिगर जोली आदि उपकरणों के उपयोग के बारे में जानकारी हासिल की।
मिट्टी के गहने बनाएं : उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा सुश्री प्रीति व्यास की ओर से मिट्टी व मैटल के बनाए हुए गहनों की तारीफ करते हुए कहा कि अत्याधुनिक डिजाइन के गहने तैयार करें। कम कीमत के यह गहने देशी ही नहीं विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र बनेंगे।
पौध रोपण व सार संभाल: जिला कलक्टर ने सेंटर में पौध रोपण किया तथा प्रशिक्षण केन्द्र में अधिकाधिक वृक्षारोपण करवाने के लिए कोलायत के विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि सेंटर में लगने वाले पौधों को तीन वर्ष तक पंचायत समिति द्वारा पानी देने व सार संभाल करने का कार्य करना है। कोलायत सरपंच मंगेज कंवर ने जिला कलक्टर को विश्वास दिलाया कि आफ द्वारा जो आज पौधा लगाया उसकी सार संभाल वह व्यक्तिगत रूप से करेगी तथा यह पौधा एक बडे वृक्ष के रूप में पल्लवित होगा। |