Sunday, 17 December 2017

राष्ट्रीय उष्ट्र दिवस बडे हर्षोल्लास से हुआ सम्पन्न

राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र द्वारा अपना 28 वां स्थापना दिवस समारोह

 

बीकानेर राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र द्वारा अपना 28 वां स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। केन्द्र द्वारा इस समारोह का आयोजन, आज दिनांक 05 जुलाई 2012 को प्रात:10.00 बजे  किया गया। केन्द्र में आयोजित इस समारोह में बीकानेर नगर के आईसीएआर संस्थानों के प्रभागाध्यक्षों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी शिरकत की। इस अवसर पर केन्द्र निदेशक डॉ.एन.वी.पाटिल ने केन्द्र परिवार को बधाई संप्रेषित करते हुए कहा कि केन्द्र की स्थापना करने के पीछे भाकृ अनुप की मंशा उष्ट्र प्रजाति के संरक्षण और विकास का मार्ग प्रशस्त करना रहा था। गत 27 वर्षों में केन्द्र ने ऊँटों की प्रजाति से जुड़े लगभग प्रत्येक पहलुओं पर कार्य कर उपलब्धियां प्राप्त की है, फलस्वरूप केन्द्र का नाम अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर उभर कर सामने आया। यद्यपि गत 2 दशकों में उष्ट्र प्रजाति का जो महत्व रहा था, इस दशक में जलवायु परिवर्तन, उपयोगिता में कमी आदि तमाम प्रभावों के बावजूद भी ऊँट आज ‘श्मानक आइकन के रूप में सबसे उपयुक्त प्राणी है। शुष्क क्षेत्र व ऊँट एक दूसरे के परिपूरक है। डॉ.पाटिल ने वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि परिवर्तित परिदृश्य में केन्द्र का दायित्व बढ़ा है तथा समाज एवं किसान की अपेक्षाओं को भी समझते हुए हमें कार्य करना होगा, केन्द्र इस हेतु किसी भी गैर सरकारी संगठन, निजी प्रतिष्ठान, आम नागरिक से जुड़ने हेतु तैयार है जिससे उष्ट्र एवं इससे जुड़े लोगों को फायदा पहुंच सके। डॉ.पाटिल ने उष्ट्र को एक डेयरी पशु के रूप में स्थापित किए जाने की बात करते हुए कहा कि हमारी खाद्य जरूरतों में उष्ट्र दुग्ध का भी नाम जुड़े, इस हेतु वैज्ञानिकों को इसके औषधीय गुणधर्मों एवं नूतन एवं स्वास्थ्यवर्धक दुग्ध उत्पादों के निर्माण हेतु अधिकाधिक अन्वेषण कर ऊँट को एक डेयरी पशु के रूप में स्थापित करना होगा। इस अवसर पर केन्द्र निदेशक डॉ.पाटिल ने बताया कि उष्ट्र जनसंख्या में भारत का 10 वां स्थान है परंतु उष्ट्र अनुसंधान के क्षेत्र में यह केन्द्र प्रथम स्थान पर है। डॉ.पाटिल ने परिषद द्वारा उष्ट्र के हितार्थ नूतन एवं महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी प्रकाश डाला। केन्द्र में मनाए गए स्थापना दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.ओ.पी.पारीक, संस्थापक निदेशक, केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर ने अपने अभिभाषण में केन्द्र निदेशक डॉ.पाटिल व एनआरसीसी परिवार को बधाई संप्रेषित करते हुए कहा कि ऊँट पालक समय परिवर्तन से आई उष्ट्र उपयोगिता को लेकर चिन्तित न हो, क्योंकि उष्ट्र का भविष्य सुखद व सुनहरा है, इसके दूध के विविध उपयोग एवं औषधीय गुणधर्मों आदि की विद्यमानता के कारण इसका महत्व बना रहेगा। डॉ.पारीक ने केन्द्र द्वारा विकसित ऊँटनी के दूध के विभिन्न उत्पाद विशेषकर दूध पाउडर, भविष्य में इसकी उपयोगिता को बनाए रखने में मददगार होंगे। इन विभिन्न उत्पादों की खपत व श्रृंखला के लिए एक बाजार की आवश्यकता है। मुख्य अतिथि ने आगे कहा कि शुष्क क्षेत्र में लम्बी अवधि के दौरान अजैविक दबाव जैसे ताप, ठण्ड और पानी हमेशा परेशानी का सबब रहेंगे परंतु ऐसी परिस्थिति में कम पानी वाली वनस्पतियां एवं ऊँट जैसे प्राणी ही कारगर सिद्ध होंगे। आज के इस स्थापना दिवस पर हमें भविष्य में क्या करना है और नए सिरे से उद्देश्यों को सोचने की आवश्यकता है। भाकृअनुप के बीकानेर स्थित संस्थानों के वैज्ञानिकों के समन्वय की आवश्यकता है जिससे अनुसंधान हेतु एक अच्छा वातावरण तैयार हो। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे डॉ.एस.के.शर्मा, केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर केन्द्र ने कहा कि केन्द्र के वैज्ञानिक एवं कर्मचारियों के अथक प्रयासों से इस संस्थान ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। अनुसंधान के साथ-साथ अन्य गतिविधियों का भी होना एक संतुलित वातावरण का निर्माण करने में सहायक है। उन्होंने कहा कि केन्द्र ने उष्ट्र प्रजाति को एक डेयरी पशु के रूप में स्थापित करने हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, यह एक सामाजिक पहलू भी है जिसकी आज के परिप्रेक्ष्य में महत्ती आवश्यकता है। हमें हर हाल में ऊँट को एक डेयरी पशु के रूप में आगे विकसित करना होगा क्योंकि समय के साथ स्वरूप-बदलाव प्रासंगिक है। उन्होंने ऊँट के कठिन समय की बात भी स्वीकारी परंतु जब तक रेगिस्तान रहेगा ऊँट रहेगा और इस पर अनुसंधान जारी रहेगा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के कर कमलों से केन्द्र द्वारा प्रकाशित दो लघु पुस्तिकाओं क्रमशः ऊँटनियों में थनैला रोग एवं परंपरागत चिकित्सा पद्वतियों द्वारा ऊँटों की बीमारियों का ईलाज व वैज्ञानिक आधार का विमोचन किया गया। केन्द्र द्वारा अपने स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर विभिन्न विभागीय खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया जिसमें कैरम में जमिल अहमद मुगल प्रथम, द्वितीय माणक लाल किराडू, बैडमिंटन सिंगल में कृष्ण कुमार  प्रथम एवं अशोक यादव द्वितीय एवं बैडमिंटन डबल्स में अशोक यादव व मोहन सिंह प्रथम एवं कृष्ण कुमार एवं मुंजाल द्वितीय रहे। टी.टी. में दिनेश मुंजाल प्रथम एवं डॉ.श्याम सिंह दहिया द्वितीय रहे। चेस प्रतियोगिता में कृष्ण कुमार प्रथम एवं अशोक यादव द्वितीय रहे। सभी विजेता प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा पुरस्कृत किया गया।

 

 

Center Director Do.anlvil Patil   Camel Festival   Biakner   Rajsthan