Wednesday, 20 February 2019
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बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के आडम्बर का चक्रव्यूह तोडें- दुबे

उपभोक्तावादी संस्कृति को टेलीविजन ने इतना प्रभावी कर दिया है कि हम बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के आडम्बर के चक्रव्यूह में फंस चुके हैं और दुर्भाग्यवश यही आडम्बर हमारे आदर्श बन गए हैं।

 परतापुर के प्रभाशंकर पण्ड्या कॉलेज में उपभोक्ता चेतना कार्यशाला को संबोधित करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक दुबे। बांसवाडा, २२ दिसम्बर/उपभोक्तावादी संस्कृति को टेलीविजन ने इतना प्रभावी कर दिया है कि हम बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के आडम्बर के चक्रव्यूह में फंस चुके हैं और दुर्भाग्यवश यही आडम्बर हमारे आदर्श बन गए हैं। आम उपभोक्ताओं को शोषणमुक्ति के लिए इस आडम्बररूपी आदर्श से बाहर निकलना होगा।
 यह आह्वान न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक दुबे ने जिले के परतापुर कस्बे के प्रभाशंकर पण्ड्या महाविद्यालय में शनिवार को जिला रसद विभाग के निर्देशन में जनजाति महिला हितकारी संस्थान द्वारा महाविद्यालय के एनएएस शिविर के दौरान आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में किया।
 दुबे ने कहा है कि आज हम किसी भी चीज का चुनाव करने में स्वतंत्र नहीं हैं, हम विज्ञापनों से भ्रमित है। विज्ञापन में दर्शाये जाने वाले फिल्मी सितारों के चेहरों का फायदा कम्पनियां उठा रही हैं।
 इस अवसर पर उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण कानून प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जिला स्तर पर २० लाख, राज्य स्तर पर एक करोड तक एवं इससे अधिक के मामले राष्ट्रीय आयोग में ले जाये जा सकते हैं।
 कार्यक्रम में जिला रसद अधिकारी घनश्याम पारीक ने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम १९८६ में बना था। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के प्रयासों से अब उत्पादक एमआरपी रेट अंकित करने लगा है। सरकार ने उपभोक्ताओं का शोषण रोकने के लिए उपभोक्ता मंच की स्थापना है ।
 कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य एल.एन. पाटीदार ने कहा कि जानकारी के अभाव में उपभोक्ता शोषित होते हैं। उन्होंने कहा कि एनएसएस के छात्र सेवा का संकल्प लिये होते हैं अतः उनका कर्त्तव्य है कि वे शोषण की प्रवृत्ति के खिलाफ सशक्त आवाज उठायें।
 इस अवसर पर जनजाति महिला हितकारी संस्थान के सचिव दीपक श्रीमाल ने राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित जागृति पखवाडे के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें शोषण के खिलाफ एकजुट होना होगा।
 कार्यक्रम में महाविद्यालय के समन्वयक नरेन्द्र भट्ट, व्यवस्थापक विशेष पण्ड्या, हिमांशु, सत्येन्द्रसिंह, कौसर अली बोहरा, गजेन्द्र सुखवाल, डॉ. लक्ष्मण सरगडा, प्रवीण पटेल, संदीप जवेरी आदि व्याख्याताओं ने भी अपने विचार रखे।
 कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के उपाचार्य डॉ. आर.सी. मंगल ने किया। कार्यक्रम के दौरान छात्र छात्रओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

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