Wednesday, 13 December 2017

तैस्सीतोरी की १२४वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई

इटली मूल के राजस्थानी साहित्यकार डॉ एल.पी. तैस्सीतोरी की १२४वीं जयंती मंगलवार को बीकानेर में रथखाना स्थित समाधिस्थल पर पुष्पांजलि व काव्यांजलि कार्यक्रम के साथ मनाई गई।

 बीकानेर, इटली मूल के राजस्थानी साहित्यकार डॉ एल.पी. तैस्सीतोरी की १२४वीं जयंती मंगलवार को बीकानेर में रथखाना स्थित समाधिस्थल पर पुष्पांजलि व काव्यांजलि कार्यक्रम के साथ मनाई गई। राजस्थानी युवा लेखक संघ के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में नगर के साहित्यकारों, कवियों व न्यास अध्यक्ष हाजी मकसूद अहमद ने डॉ एल.पी. तैस्सीतोरी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। काव्यांजलि कार्यक्रम राजस्थानी की वरिष्ट साहित्यकार शिवराज छंगाणाी की अध्यक्षता में हुआ। इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा उपस्थित थे। इस काव्यांजलि कार्यक्रम में कवि सरदार अली पडहार ने ’बीती बाते भूल चुको, अधियारों को छोड‘ चलो प्रस्तुत कर जिंदगी की वास्तविकता को रखा। कार्यक्रम में शमीम बीकानेरी ने दो कौडी रो मोल, वली मोहम्मद ने बांधले हिवडे गांठ मोरिया व कमल रंगा ने मेरे घर की दिवारों से प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं की दाद बटोरी। कवि डॉ शंकर लाल स्वामी ने उणरै नी रोटी रो सरतन ईयां कियां, थारे घर चांदी रा बरतन इयां कियां प्रस्तुत कर आर्थिक असमानता को रेखांकित किया। काव्यांजलि में डॉ भगवान दास किराडू नवीन ने कांई करां जिंदगी जद जिंदगी छीन ल व साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा ने यह कैसी नई रवायत है की प्रस्तुति दी। राजस्थानी साहित्यकार शिवराज छगाणी ने अध्यक्षीय पीठ से दूर गगन री जड्या जड्या सूं, सरनाटै रै राजपाट में सैर सोयग्यो, हल्लो गुल्लो कैद हुयग्यो प्रस्तुत कर श्रोताओं की तालियाँ बटोरी। कार्यक्रकम में जब्बार साहब, जुगल पुरोहित, मुईनुदीन, लक्ष्मीनारायण आर्य, संजय पुरोहित ने भी प्रस्तुतियाँ दी। काव्यांजलि का संचालन आत्माराम भाटी ने किया। राजस्थानी युवा लेखक संघ के अध्यक्ष कमल रंगा ने बताया कि बुधवार को कल कला दीर्घा में पाँच भाषा पाँच अनुवाद कार्यक्रम आयोजित होगा।

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