Wednesday, 03 June 2020
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एमजीएसयू शुरू करेगा राजस्थानी भाषा विभाग

साहित्यकारों, शिक्षको की मांग पर स्वपोषित्त योजना के तहत  होगा संचालित  

एमजीएसयू शुरू करेगा राजस्थानी भाषा विभाग

बीकानेर 15 मई । मुक्ति संस्था बीकानेर के तत्वावधान में महाराजा गंगासिंह विश्वविध्यालय में राजस्थानी विषय प्रारम्भ करने हेतु संस्था के सचिव एवं कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी के संयोजन में मंगलवार को लेखकों के प्रतिनिधि मंडल ने कुलपति डॉ.भागीरथसिंह बिंजारणिया को आग्रह पत्र कुलपति सचिवालय में प्रस्तुत किया । कुलपति सचिवालय में प्रतिनिधि मंडल की मांग को विस्तार से कुलपति ने सुना । आग्रह पत्र सौंपते हुए मुक्ति के सचिव कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता हेतु  वर्ष 2003 में राजस्थान विधानसभा से सर्वसम्मत संकल्प प्रस्ताव पारित किया गया था । राज्य सरकार ने इस हेतु केन्द्र को पत्र भी लिखा था । जन गणना 2011 में भी राजस्थान के 4000083 (चार करोड तेंयासी लाख)  लोगों ने अपनी मातृ भाषा राजस्थानी दर्ज करवाई है । उन्होंने कहा कि वर्तमान में अमेरिका के सिकागो, रुस के मास्को, लन्दन के केम्ब्रिज सहित विश्व के अनेक विश्वविध्यालयों में राजस्थानी का अध्ययन करवाया जा रहा है ऐसे में महाराजा गंगासिंह विश्वविध्यालय मे राजस्थानी भासा विभाग का होना अति आवश्यक है ।

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प्रतिनिधि मंडल की मांगों को सुनकर महाराजा गंगासिंह विश्वविध्यालय के कुलपति डॉ.भागीरथसिंह बिंजारणिया ने साहित्यकारों के शिष्टमंडल के समक्ष यह घोषणा की कि आगामी शैक्षणिक सत्र में विश्वविध्यालय में स्ववित्तपोषित योजना के तहत राजस्थानी विभाग आरम्भ कर दिया जाएगा । कुलपति ने कहा कि वे प्रारम्भ से ही इस विश्वविध्यालय में राजस्थानी भाषा का विभाग खोला जाए इस हेतु प्रयासरत्त रहे हैं एवं राज्य सरकार को भी ज्ञापन की भावना अनुसार विभाग प्रारम्भ करने हेतु अभिशंसा करेंगे । उन्होंने कहा कि यहां के लोगों में राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति के प्रति गहरा लगाव है । वे चाहते हैं कि यहां की युवा पीढी भी राजस्थानी की समृद्ध साहित्य परम्परा से रुबरु हो तथा उसमें अध्ययन करके शैक्षवणिक योग्यता प्राप्त करें । उन्होंने कहा कि राजस्थानी विषय़ शुरु होने से सबको लाभ मिलेगा ।

व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि बीकानेर सम्भाग, जहां राजस्थानी भाषा में आरम्भ से ही सर्वाधिक सृजन किया जाता रहा है इसिलिए सरकार ने बीकानेर में राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी स्थापित की है । आग्रह पत्र का वाचन करते हुए कवि-कथाकार कमल रंगा ने राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति के इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी दी । कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि इस मांग का पूरा होने से रोजगार के अनेकों रास्ते खुलेंगे । उन्होंने बताया कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संस्था नवम्बर 2016 से राजस्थानी भाषा संकल्प यात्रा का संचालन कर रही है ।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार ओमप्रकाश सारस्वत, डॉ.उमाकांत गुप्त एवं डॉ.मदन सैनी ने भी अपने विचार रखे । इस अवसर पर महारानी कॉलेज के प्राचार्य डॉ.उमाकांत गुप्त, डूंगर कॉलेज के प्राध्यापक डॉ.ब्रजरतन जोशी एवं विश्वविध्यालय के उपकुल सचिव डॉ.बिट्ठल बिस्सा भी उपस्थित थे । प्रतिनिधि मंडल में डॉ.प्रशांत बिस्सा, डॉ.गौरीशंकर प्रजापत, डॉ.नमामीशंकर आचार्य, हरीश बी.शर्मा, नगेन्द्र किराडू, योगेन्द्र पुरोहित, डॉ.दिनेश सेवग, मांगीलाल भद्रवाल, विष्णुदत्त शर्मा, बाबुलाल हटीला, हरिराम बिश्नोई सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित थे ।

मुक्ति के सचिव राजेन्द्र जोशी ने आभार प्रकट करते हुए कहा कि कुलपति महोदय ने तत्काल विश्वविध्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग प्रारम्भ करने का निर्णय लेकर इसी सत्र से अध्ययन-अध्यापन शुरु करने की घोषणा कर यहां के लोगों की भावनाओं का सम्मान किया है जो सराहनीय है । 

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