Sunday, 08 December 2019
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पुरातत्व काम मे कठिनाईया है, लेकिन इतिहास को सही समझने का फल भी हैः डाॅ नारायण व्यास

सिस्टर निवेदिता कन्या महाविद्यायल मे  मे पुरातत्वविद् डाॅक्टर नारायण व्यास का व्याख्यान

पुरातत्व काम मे कठिनाईया है, लेकिन इतिहास को सही समझने का फल भी हैः डाॅ नारायण व्यास

बीकानेर 17 अगस्त।  राजस्थान आॅर्कियोलाॅजी व एपिग्राफी संस्था तथा तथा सिस्टर निवेदिता कन्या  महाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा इतिहास एवं पुरातत्व पर व्याख्यान आयोजित किया गया।  
महाविद्यालय की निदेशक सीमा पुरोहित ने बताया कि उज्जैन के अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरातत्वविद् डाॅक्टर नारायण व्यास ने व्याख्यान मे मुख्यवक्ता के रूप मे उद्बोधन देते हुए विद्यार्थियों को देश मे हुई महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं नयी खोज कीजानकारी दी एवं बताया की प्रागैतिहासिक काल मे पाषाण की सँस्कृति मे मनुष्य ने किस प्रकार पाषाण के हथियार निर्मित हुए एवं उनके उपयोग बताया एवं बताया की हमारी सँस्कृति का विकास कैसे हुआ। 
डाॅ व्यास ने कहा कि राजस्थान की बनास सँस्कृति एवं चँबल घाटी क्षेत्रों की सँस्कृति मध्यप्रदेश मे पहु्ँची। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि पुरातत्वविद् किस प्रकार सभ्यता की खोज करते हैं एवं कठिनाइयों का सामना करना पडता हैं। नदी किनारों पर टीले से मिट्टी के पात्र,सिक्के, खिलौने, इत्यादि मिलते है उनका परिक्षण कर समय निर्धारित किया जाता है। ब्राह्मी लिपि केविकास एवं उससे देवनागरी लिपि निकली की जानकारी देते हुए यूगयुगीन इतिहास का वर्णन किया। उन्होंने अपने व्याख्यान के अन्तर्गत सौ के नोट पर छपी रानी की वाव बावडी पर प्रकाश डाला और बताया कि सात वर्ष तक वहां उत्खनन किया एवं वहां की प्रतिमाओं पर पीएचडी की। काम करते समय तीन बार उपर नीचे गिरने से बचे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता के रूप मे बोलते हुए प्राचार्य डाॅ रितेश व्यास ने विद्यार्थियों को धरोहर के प्रति जागरूकता एवं रखरखाव के विषय की जानकारी देते हुए कहा कि राजस्थान आॅर्कियोलाॅजी व एपिग्राफी संस्था द्वारा इस हेतु एक कार्यशाला का आयोजन शीघ्र ही आयोजित किया जायेगा जिसमे इतिहास के छात्रों के साथ साथ इस विषय पर जागरूक लोगों को पुरातत्व महत्व के स्थल खोज प्रणाली के बारे मे जानकारी मिलेगी तथा वे स्वयं इस विषय पर कार्य कर सकेंगें।
राजस्थान आॅर्कियोलाॅजी व एपिग्राफी संस्था से जुड़े आनन्द आचार्य ने कहा संस्था और इनसे जुड़े लोगों को खोजी क्रियाकलापों को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर लाने के लिये दस्तावेजों को  वेबसाइट के माध्यम से आॅनलाइन उपलब्ध करवाया रहा है।

गौरतलब है कि डाॅ नारायण व्यास द्वारा गुजरात के पाटन स्थित रानी का वाव पुरातत्व स्थल की खोज को नये सौ के नोट मे स्थान मिला हुआ है।

इस अवसर पर वरिष्ठ चित्रकार राकेश किराडु, सेरेन इंस्टीट्यूट के हेमंत रंगा, सीमा व्यास सहित महाविद्यालय के व्याख्याता व छात्राओं ने शिरकत की।
 

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