Sunday, 08 December 2019
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कल तक थे खुद बेरोजगार : आज देते हैं लोगों को रोजगार

जयपुर,९ अगस्त, २००७ ‘‘मुझे खुली आंखों से सपने देखने की आदत है। सपने शत प्रतिशत सच न भी हों तो ६० प्रतिशत तो सच होंगे ही। जैसे मैने बेरोजगार रहते हुए लोगों को रोजगार देने का सपना देखा था। आज खुद का बिजनेस है और ८ लोगों को रोजगार दे रहा हूं।’’
सपना देखने और उसे साकार रूप देने की ये चाहत है उद्यमिता एवं प्रबंध संस्थान में प्रशिक्षित उन नव उद्यमियों की जो कभी बेरोजगार थे। उद्यमिता एवं प्रबन्ध संस्थान यानि ई.एम.आई. में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये नवउद्यमी स्वयं का ऐसा व्यवसाय कर रहे हैं जो लीक से कुछ हटकर है। ये मानते हैं कि  ई.एम.आई. में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ही इनमें कुछ कर गुजरने का हौसला पैदा हुआ। ई.एम.आई. ने उनकी क्षमताओं को पहचान कर उन्हें नई राह दिखाने का उपक्रम किया।
बेरोजगार युवा शक्ति से ई.एम.आई. के प्रशिक्षणार्थी और वहां से सफल उद्यमी तक के सफर के बारे में इन युवाओं ने पिछले दिनों अपने अनुभव बांटे।
इन उद्यमियों में कुछ समानताएं हैं। ये परम्परा से व्यवसाई नहीं हैं। ये युवा हैं। इनकी अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं होने के बावजूद इन्होंने सफलतापूर्वक व्यवसाय चलाया है। व्यवसाय की आधारशिला रखने से लेकर शिखर तक पहुंचने का कार्य इन्होंने केवल अपने बलबूते पर किया और ये सब ई.एम.आई. को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं।
कला के विद्यार्थी सुनील शर्मा पानी और बिजली का अपव्यय रोकने के लिए विविध इलेक्ट्रोनिक उपकरण वैज्ञानिक तरीके से बनाते हैं। इनके उपकरणों में सैंसर वाले नल, सैंसर वाले स्विच, ट्रेफिक रोबोट और इलेक्ट्रोनिक चिटखनी प्रमुख हैं। ब्रान्डेड कम्पनियों की कीमत से दस गुना सस्ते श्री शर्मा के ये उत्पाद लोकप्रियता की दृष्टि से देखें तो बहुत ही कम समय में लोगों की पसंद बन गए हैं। उद्यमिता एवं प्रबन्ध संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इस व्यवसाय से जुडे शर्मा अपनी उपलब्धियों का सारा श्रेय संस्थान को देते हैं। ये उत्पाद ऊर्जा और जल की बचत करने की दृष्टि से काफी उपयोगी हैं। शर्मा के सैंसर वाले स्विच प्रकाश होने पर स्वतः ही बंद होते हैं और अंधेरा होने पर स्वतः जल उठते हैं। इसी प्रकार सैंसर वाले नल भी हाथ आगे करने पर चालू होते हैं और हाथ निर्धारित क्षेत्र से बाहर आते ही बंद हो जाते हैं।
सुनील शर्मा अब भी नए नए प्रयोग करने में जुटे हैं। उनका व्यवसाय भी दिनोदिन प्रगति की ओर है। सिनेमाघरों, होटलों, कॉरपोरेट-ऑफिसों और धनाढ्य लोगों के घरों में उनके उत्पादों की काफी मांग है। शर्मा ई.एम.आई. में प्रशिक्षण हेतु आने वाले दूसरे युवा बेरोजगारों के लिए प्रेरणा स्त्रोत तो हैं ही वे उन्हें प्रशिक्षण देने के भी इच्छुक हैं।
जारी जयपुर जिले की चौमू तहसील के ग्राम तिगरिया के छोटे से साधारण किसान परिवार के बाबूलाल गोस्वामी कृषि विज्ञान में रुचि रखते थे। एक दो साल बेरोजगार रहने के बाद वे ई.एम.आई. में प्रशिक्षण प्राप्त करने आए और तब से अब तक पीछे मुडकर नहीं देखा। बाबूलाल हर्बल उत्पादों एवं शर्बत, ठण्डाई आदि बनाने का कार्य करते हैं। वे कहते हैं - कहां तो मैं खुद बेरोजगार था आज मैं छह लोगों को रोजगार दे रहा हूं।
छोटी सी अमरजीत कौर। दावे बडे बडे। दावों के परीक्षण के लिए पूरी तरह तैयार। एक साल के रिसर्च के बाद, एक कमरे के अपने ऑफिस में उसने एक पौष्टिक ब्रेकफास्ट ‘‘पावर ब्रेकफास्ट’’ बनाया है। उसका दावा है - यह दूध के साथ लिया जाने वाला उत्पाद याददाश्त बढाता है, सभी प्रकार के दर्द से मुक्ति देता है। ताकत का अहसास कराता है और सभी पौष्टिक तत्वों से भरपूर है। बहरहाल अमरदीप अपने उत्पाद का परीक्षण करवाकर इसे देश भर में बेचने की तैयारी कर रही है, बडी जगह की तलाश में है और व्यवसाय को बढाने की तैयारी में है।
पिता के डायरी और फोल्डर व्यवसाय को नया रूप और नई ऊंचाइयां दे रहे हैं अनिल चन्देल। वे अब फोटो फ्रेम, पर्स, पासपोर्ट फोल्डर, चूडी बॉक्स आदि बनाने के बडे आर्डर लेने लगे हैं।
भरतपुर के अरविंद सिंह चौहान औषधीय पौधों का उत्पादन कर विभिन्न उत्पाद तैयार कर रहे हैं। पचास हजार रुपए से व्यवसाय शुरु करने वाले चौहान अब शहद उत्पादन कर उसके पैकेजिंग आदि का कार्य भी कर रहे हैं। इनका चार लाख का टर्न ओवर है और ये पांच लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
श्यामसुंदर शर्मा आर्गेनिक फूड उत्पादन से जुडे हैं। पचास हजार रुपए तक की आय वाले उनके व्यवसाय में पांच लोगों की टीम काम कर रही है।
बहरोड में मोबाइल रिपेयरिंग व्यवसाय से जुडे मुकेश यादव भी ४-५ लोगों को रोजगार दे रहे हैं जबकि वे पहले स्वयं नौकरी करना चाहते थे।
एयर कंडीशनर रेफ्रीजिरेटर माइक्रोवेव, कम्प्यूटर और अन्य इलेक्ट्रोनिक उत्पाद ठीक करने वाले मनोज कुमार कहते हैं कि पहले एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। नौकरी में बहुत जी हुजूरी करनी पडती है। व्यवसाय में ये सब नहीं है।
मनोज कुमार जीवन के प्रति सकारात्मक रुख रखते हैं और उसका श्रेय वे देते हैं जीवन शैली बदल देने वाले लेखकों और उनकी पुस्तकों को। वे कहते हैं ‘‘स्काई इज द लिमिट’’। महत्वाकांक्षाएं अनंत हैं उन्हें पूरा करने का हौंसला भी बहुत है।’’
ई.एम.आई. ने अब तक लगभग १५ हजार व्यवसाइयों को प्रशिक्षित किया है। हर वर्ष लगभग         ४ हजार युवा यहां प्रशिक्षण लेते हैं। सफलता की चाबी हर किसी को नहीं मिलती। कुछ लोग ज्यादा सफल हते हैं कुछ कम। परंतु ई.एम.आई. का मानना है कि सफलता के कुछ सूत्र होते हैं। युवा शक्ति को इन सूत्रों का ज्ञान होना चाहिए और ई.एम.आई. वहीं ज्ञान दे रहा है। ई.एम.आई. पहली पीढी के व्यवसाई तैयार कर रहा है तो ई.एम.आई. के ये होनहार भी अपने सपने साकार कर रहे हैं।

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