Tuesday, 12 December 2017

भंवर थारी बाट तकत मैं तो हारी...

माड के विभिन्न रंगो को समेटे सम्पन्न हुआ \'माड समारोह

बीकानेर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान को विशिष्ट पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली माडÓ राग को ऊंचाईयों तक पहुंचाने वाले व्यक्तित्व संगीत मनीषी डॉ. जयचंद्र शर्मा, सितार वादक पं. जसकरण गोस्वामी एवं माड कोकिला अल्लाह जिलाई बाई को समर्पित \'माड समारोह शनिवार को टाऊन हॉल में श्रोताओं को सराबोर कर गया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र इलाहाबाद, जिला प्रशासन एवं अनुराग कला केन्द्र बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय समारोह का समापन मुम्बई से आये श्रीडूंगरगढ़ के लोक कलाकार मो. रमजान के सुमधुर स्वरों में राजस्थानी की विभिन्न क्षेत्रों की माड गीतों से हुआ। रमजान ने अपने गायन की शुरूआत हेलो म्हारी नाव रोÓ से करते हुए झीलों की नगरी में नाव की सवारी का वर्णन किया। उन्होंनेb चालो चालो नागाणा रै देसÓ व \'बादिला भी प्रस्तुत किया। उनके साथ तबला संगत राजूदीन ने की। 
कार्यक्रम में उदयपुर की गायिका एवं वनस्थली विद्यापीठ में प्रोफेसर पद पर कार्यरत डॉ. चेतना बनावत ने अपने स्वरों में माड के रसभरे रंग बिखेरे। डॉ. बनावत ने अपने गायन की शुरूआत म्हारा सांचोड़ा मोती से करते हुए, भंवर थारी बाट तकत मैं तो हारी, बिदेसिया रै थांरी ओळूड़ी आवै नी रै तथा \'म्हारी आंखड़ली फड़कै छै इत्यादि गीत सुनाये। 
समारोह में राजकीय महाविद्यालय अजमेर में संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. नासिर मोहम्मद मदनी ने  केसरिया बालम से अपनी प्रस्तुति की शुरूआत की। इस अवसर पर उन्होंने  नैण कटारी एवं माड पर आधारित $गज़ल \'यूं ना रह-रह कर हमें तरसाइये.. सियाले खाटू भली तो उनले अजमेर  जोधानो नितरो भलो तो कोई सावन बीकानेर.. . द्वारा श्रोताओं की खूब वाह-वाही बटोरी।  इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत राजस्थान की संस्कृति, शौर्य, भक्ति का वर्णन मूमल के सौंदर्य के साथ नृत्य प्रस्तुतिकरण के द्वारा किया गया। डॉ. मुरारी शर्मा एवं सुदेश व्यास की नृत्य परिकल्पना एवं डॉ. कल्पना शर्मा के नृत्य निर्देशन में अंकित सोनी व प्रियंका सुर चौधरी ने नृत्य को अधिक प्रभावी बना दिया। मूमल गायन वसुधा मूंधड़ा व सह निर्देशन डॉ. वंदना शर्मा का था। तबले पर मदन मोहन स्वामी एवं हारमोनियम पर पुखराज स्वामी ने संगत की।  कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए बीकानेर (पश्चिम) विधायक डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने कहा कि अलग-अलग अंदाज, स्वरों, विशेषताओं के बावजूद माड राग में निबद्ध गायन-वादन में कलाकार के साथ साथ श्रोताओं में भी अद्भुत उल्लास-आनंद की अनुभूति जुड़ी होती है।  कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए किशोर सिंह राजपुरोहित (किशोर सर) ने कहा कि संगीत की शब्द-बारीकियां चाहे समझ आये ना आये, मगर यदि इसे दिल की गहराईयों से महसूस किया जाये, तो निश्चित तौर पर खुदा की इबादत हो ही जाती है। कार्यक्रम में डॉ. अजीज अहमद सुलेमानी, डॉ. हनुमान सिंह कास्वां, मुरलीमनोहर के माथुर, चंद्रशेखर जोशी, खुशालचंद रंगा, आर के शर्मा, अशफाक कादरी, राजाराम स्वर्णकार, राजकुमारी मारू, अकबर खान, प्रदीप माथुर, इकबाल हुसैन, विपिन पुरोहित सहित संगीत-कला प्रेमी बड़ी तादाद में उपस्थित थे। अंत में आभार कार्यक्रम प्रभारी सांस्कृतिक केन्द्र इलाहबाद के राजेन्द्र ने व्यक्त किया।

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