Monday, 20 November 2017
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विभिन्न कैटेगेरी में फिल्में हुई पुरस्कृत

सेण्ड ड्यून्स अन्तर्राष्ट्रीय लघु फिल्म फेस्टिवल का समापन

विभिन्न कैटेगेरी में फिल्में हुई पुरस्कृत

बीकानेर, 20 दिसम्बर। दूसरे सेण्ड ड्यून्स अन्तर्राष्ट्रीय लघु फिल्म समारोह रविार को श्रेष्ठ फिल्मों को पुरस्कार वितरण और सूफी संगीत के तरानों के बीच वेटरनरी आॅडिटोरियम में सम्पन्न हो गया। दो दिवसीय फेस्टिवल के बडे़ स्क्रीन पर 14 अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मों सहित भारतीय और राजस्थानी भाषाओं की  में कुल 87 लघु फिल्मों का दर्शकों ने भरपूर आनंद उठाया। 
इस अवसर पर वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने कहा कि वेटरनरी विश्वविद्यालय और लोकायन का दो दिवसीय फेस्टिवल अपने मकसद में कामयाब रहा है। देश-विदेश की भाषाओं में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सम-सामयिक विषयों पर बनी लघु फिल्मों से बीकानेर का दर्शक और विद्यार्थी वर्ग लाभान्वित हुआ है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर रूस, स्पेन, कनाडा, ईरान, न्यूयार्क, ग्रीस, इंग्लैण्ड, आयरलैण्ड और ईटली देशों की लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। भारतीय लघु फिल्मों में भोर, मैरिज बाजार, पूप आॅन पार्वटि, पापा के सपने, रान्ग वे, नीबू पानी, ख्वाहिश, शिप आॅफ डेजर्ट, जैसी प्रमुख फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। राजस्थानी कैटेगेरी में सौदो-2, पोटली, माँ, रंगीलो सजीलो जोधाणों फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि बीकानेर रेल मंडल के महाप्रबंधक राकेश सक्सेना, नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक सरिता अरोड़ा, प्रो. ए.के. गहलोत, कुलपति राजुवास ने फेस्टिवल की विभिन्न कैटेगेरी में प्रथम स्थान पर रही फिल्मों के निदेशकों को 11 हजार रूपये और द्वितीय को 5 हजार रूपये के नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किये। 
अतिथि रूप में भारत विकास परिषद् की अध्यक्ष अरूणा गहलोत, लोकायन के महावीर स्वामी, हंसा गेस्ट हाउस के हंसराज डागा और अवीनाश व्यास उपस्थित थे। फेस्टिवल निदेशक डाॅ. रजनी जोशी ने सभ का आभार व्यक्त किया। 
संजय पुरोहित ने कार्यक्रम का संचालन किया। लोकायन के  गोपाल सिंह चैहान ने बताया व  सुनील जोशी ने बताया कि विदेशी भाषा की कैटेगेरी में प्रथम पुरस्कार रूसी फिल्म “स्प्रिट टू दि पास्ट” (निदेशक सेल्फिन फैडोर) को दिया गया। दूसरा पुरस्कार ग्रीस की फिल्म व्हाइट काॅलर ( निदेशक नटालिया लाम्प्रोपाउलो) को मिला। भारतीय शाॅर्ट फिल्मों का पहला पुरस्कार क्रिकेट ( निदेशक कबीर शाह) को, दूसरा पुरस्कार पान्धरिया (संदीप माने निर्देशित) को प्रदान किया गया। राजस्थानी फिल्म में डी.डी. दाधीच द्वारा निर्देशित सौदो-2 को पहला और पूजा निर्देशित रंगीलो सजीलो जोधाणों को मिला। विद्यार्थी कैटेगेरी में अमित कुमार की मेट्रो और इरान के सामन होसेनपोर निर्देशित “आॅटम लीव्ज” को क्रमशः प्रथम और द्वितीय पुरस्कार से नवाजा गया। एनीमेशन कैटेगेरी में स्पेन की “दी आईडिया थीफ” (निदेशक दानी अल्वा) को प्रथम और राहुल शर्मा के निर्देशन में बनी “एम बू लान्स” को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। डाॅक्यूमेन्टरी कैटेगेरी अमित-कविता निर्देशित “बवाई” को पहला और विजय कुमार की “मैरिज बाजार” को दूसरा पुरूस्कार मिला। राज्य कृषि/महाविद्यालयों की कैटेगेरी में अरावली वेटरनरी काॅलेज, सीकर की झोलारो झूल को प्रथम और वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर की पशु आपदा प्रबंधन को दूसरा पुरस्कार दिया गया। पब्लिक अवेयरनेश कैटेगेरी सुरेश एरियात निर्देशित फिल्म “इन्टरगेलेक्टिक पेस्ट कंट्रोल” को प्रथम और सुरभि पुरोहित निर्देशित “उपाय” फिल्म को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। रत्नामल शिवाजी गायकवाड़ द्वारा निर्देशित नीबू पानी को विशिष्ट जूरी अवार्ड से नवाजा गया।


वेटरनरी विश्वविद्यालय ने भी राजुवास प्रोडक्शन के बैनर तले प्रदर्शित की जनजाग्रति फिल्में
इस दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में वेटरनरी विश्वविद्यालय ने भी राजुवास प्रोडक्शन के बैनर तले कई जनजाग्रति फिल्में प्रदर्शित की। इन फिल्मों में नेशन फस्र्ट, सपनों की उड़ान, दिशा-द डायरेक्शन, सोशल फिवर, बायोमेडिकल वेस्ट-ए हैल्थ हैजार्ड, चूल्हा, नई उम्मीद, लक्ष्मी समाज रो गौरव, पशु आपदा प्रबंधन,  आपणी कामधेनू राठी, एवं एन्टी रैगिंग विषय पर प्रदर्शित फिल्मों ने दर्शकों की वाह-वाही लूटी। 
 

जूरी की कार्यशाला
फेस्टिवल के दूसरे दिन भी मंगलवार को जूरी के सदस्यों ने एक कार्यशाला में अपने विचार रखे और जिज्ञासुओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। इस कार्यशाला में लगभग 200 विद्यार्थियों, शिक्षको और दर्शकों ने भाग लिया। 


सूफी संगीत के तराने गूंजे
दो दिवसीय फेस्टिवल के समापन अवसर पर नई दिल्ली के सूफी गायक हरप्रीत सिंह ने बुल्लेशा, फैज, निराला की सूफी रचनाओं के साथ स्वरचित सूफी गीतों के तराने छेड़कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके साथ वरूण गुप्ता ने संगत की। हैदराबाद के नीलकंठ और साथियों ने भी अपनी स्वर लहरी में सूफी गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने को मजबूर कर दिया। गिटार पर फिरोज खान और ठोलक पर सद्दाम हुसैन ने संगत की।
 

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