Wednesday, 18 October 2017

अर्न्तराष्ट्रिय महिला दिवस विषयक कार्यक्रमों का किया भव्य आयोजन

प्राचीन काल से आधुनिक युग तक नारी शिक्षा के विकास तथा उत्थान पतन व इससे जुड़ी समस्याओं पर व्यक्त किये विचार

 महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग तथा महिला प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्ववाधान में अर्न्तराष्ट्रिय महिला दिवस विषयक कार्यक्रमों की श्रृंखला में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में मंचस्थ अतिथियों ने विद्या की देवी मां सरस्वती के समक्ष पुष्पांजली अर्पित कर दीप प्रज्जवलिक कर पूजा अर्चना की।  संतोष कंवर शेखावत ने विशिष्ट अतिथियों का परिचय करवाया। इसके बाद मंच पर उपस्थित मुख्य वक्ता प्रो. दिलबाग सिंह, विशिष्ट अतिथि एडवोकेट विमला सरोलिया तथा अन्य अतिथियों को शाल, पुष्पाहार तथा प्रतीक चिन्ह भट कर सम्मानित किया गया। इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शिवकुमार मनोत ने अपने स्वागत भाषण में अर्न्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी उपस्थितों तथा महिला सदस्यों का अभिनन्दन कर बधाई एवं शुभकामनायें दी तथा कार्यक्रम में पधारे सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के संयोजक डा. नारायण सिंह राव ने विषय प्रवर्तन करते हुए प्राचीन काल से आधुनिक युग तक नारी शिक्षा के विकास तथा उत्थान पतन व इससे जुड़ी समस्याओं पर अपने विचार व्यक्त किये। बीकानेर शहर की वकील एडवोकेट विमला सरोलीया ने महिला दिवस पर सभी बहिनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं दी तथा महिलाओं से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तृत चर्चा करते हुए महिला सशक्तिकरण म महिला जागरूकता पर बल दिया। उन्होंने महिलाओं को धेर्य, दृढता, साहस से समस्याओं का मुकाबला करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. दिलबागसिंह ने मध्ययुगीन राजस्थान में शासन का स्त्रियों के प्रति दृष्टीकोण व नीती की विस्तार से चर्चा की तथा बताया कि मध्ययुग में स्त्रियों के दो वर्ग थे एक तो वो स्त्रियां जो राज परिवारों, जमीदारों, जागीरदारों ऊंचे व्यापारियों व अच्छा वर्ग से जुड़ी थी। हालांकी इस वर्ग की स्त्रियों को सब प्रकार के ऐशो आराम तथा भोग विसा के साधन उपलब्ध थे पर इस वर्ग की स्त्रियों को कई प्रतिबन्धों में रहना पड़ता था। जनानी ड्योढ़ी में रहने वाली महिलाओं को कई सामाजिक कुरितियों जैसे सती, बहु विवाह, पर्दा, विधवा विवाह पर रोक, कन्या वध तथा राज्यों के आपसी संघर्षो तथा हिंसा आदि की पीड़ा को झेलना पड़ता था। उन्हें वो आजादी नहीं थी जो किसी खेतीहर कृषक या मजदूर परिवार की महिला को थी।  कार्यक्रम की संयोजक डा0 प्रगती सोबती, अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ ने अपनी ओर से सभी महिला संगठनों व तमाम नारी समाज को हार्दिक शुभकामनायें देकर क्रान्तिकारी अभिवादन किया। डा. प्रगति सोबती ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. चन्द्रकला पाडिया, रजिस्ट्रार एवं सभी अतिथियों, उपस्थित आगन्तुकों, पत्रकारों, महिला संगठनों, संकाय सदस्यों, समाचार पत्रों के समुहों विश्वविद्यालय के छात्रों कर्मचारियों व प्रशासनिक अधिकारियों को धन्यवाद दिया जिनके सहयोग से यह कार्यक्रम सफल रहा।इस कार्यक्रम में प्रो. एम.एम. सक्सेना, वित्त नियन्त्रक अरविन्द सिंह शेखावत, डा. जसवन्त सिंह खीचड़, डा. अनिल छंगाणी, डा. राजाराम चोयल, डा. अनिल दुलार, डा. गौतम मेघवंशी, डा. ज्योती लखानी, डा. अम्बिका ढाका, डा. मेघना शर्मा, डा. बिठ्ठल बिस्सा, डा. एस.के. गोदारा, डा. मंजू सिखवाल, डा. सीमा शर्मा, डा. धर्मेश हरवानी के अलावा कई वकील, पत्रकार, महाविद्यालयों के छात्र, शिक्षक, पुलिस तथा कई शासकीय विभागों के प्रतिनिधि तथा महिला प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, समाजसेवी व गण्मान्य नागरिक शामिल थे।