Thursday, 21 February 2019
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ऊर्जा क्षेत्र में स्वावलम्बन की ओर अग्रसर राजस्थान की छवि प्रस्तुत करता राजस्थान मंडप

नई दिल्ली, २० नवम्बर। प्रगति मैदान में चल रहे २७वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में ’राजस्थान मंडप‘ प्रदेश की ऊर्जा क्षेत्र में स्वावलम्बन की ओर अग्रसर होते स्वरूप की छवि प्रस्तुत कर रहा है। राज्य सरकार का उदेश्य है कि सभी लोगो को वर्ष २०१२ तक पर्याप्त, विश्वसनीय और गुणवत्ता युक्त ऊर्जा प्रदान करे।
 राजस्थान मंडप के थीम एरिया में प्रदेश के विभिन्न तापघरों के मॉडल्स प्रस्तुत किए गए हैं। वर्तमान में राजस्थान की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता ६२२३ मेगावाट है जिसमें ५५.२३ प्रतिशत भाग राज्य द्वारा अपने संसाधनों से, २९.१३ प्रतिशत भाग केन्द्र द्वारा प्रदत्त और शेष १५.६४ प्रतिशत भाग मिले-जुले प्रोजेक्ट्स से प्राप्त किया जाता है। वर्ष २०११-१२ तक ऊर्जा उत्पादन क्षमता १२,००० मेगावाट से भी अधिक कर देने का लक्ष्य है।
 मंडप के थीम एरिया में गिरल लिग्नाइट प्रोजेक्ट का (यूनिट-२) सुंदर मॉडल प्रस्तुत किया गया है। जिसकी विद्युत उत्पादन क्षमता १२५ मेगावाट है।
 मंडप के थीम एरिया में ही राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम की उत्पादक योजनाओं के मॉडल्स भी दिखाए गए है। जहां एक तरफ धौलपुर की गैस आधारित योजना का मॉडल बडे सुंदर तरीके से दिखाया गया है, वहीं दूसरी तरफ छबडा थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट स्टेशन के प्रतिरूप को दर्शाया गया है, जिनकी उत्पादन क्षमता क्रमशः ११० मेगावाट और २५० मेगावाट प्रति यूनिट है।
 मंडप में प्रदर्शित गिरल लिग्नाइट थर्मल पॉवर स्टेशन का मॉडल यह बताता है कि यह केन्द्र १२५ मेगावाट विद्युत का उत्पादन करता है। राजस्थान मंडप में स्थान की सीमा के कारण कुछ पॉवर प्रोजेक्ट्स के मॉडल्स ही दिखाए गए हैं किंतु वहां उपस्थित पदाधिकारियों के अनुसार राजस्थान में कोटा व सूरतगढ सुपर पॉवर स्टेशन भी हैं जो विकास व गुणवत्ता की कहानी स्वयं कहते हैं।
 ये दोनो ही पॉवर स्टेशन उच्च प्लांट लोड क्षेत्र मे उत्पादन कर रहे हैं और अनेक बार राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ गुणवत्ता पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। जहां कोटा सुपर पॉवर स्टेशन (यूनिट ७) की उत्पादन क्षमता १९५ मेगावाट है वहीं सूरतगढ सुपर पॉवर स्टेशन (यूनिट ६) की उत्पादन क्षमता २५० मेगावाट है।
 राजस्थान ऐसा प्रदेश है जहां ऊर्जा संचार का तंत्र अत्यंत सुदृढ है, ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति बेहतर है तथा शहरी व औद्योगिक क्षेत्रों में पॉवर कट नहीं होता। यहां तक कि कृषि क्षेत्र को प्रतिदिन ६-७ घंटे विद्युत आपूर्ति की जाती है।
 उपर्युक्त प्रमुख योजनाओं के अतिरिक्त काली सिंध जवाहर सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट, छबडा सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट आदि योजनाओं को भी अनुमति मिली है।
 राजस्थान सरकार द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन के लिए हर जिला मुख्यालय पर ’कस्टमर कॉल सेंटर‘ खोला गया है जो कि चौबीसों घंटे उपभोक्ताओं के लिए खुले रहते हैं।
 राजस्थान मंडप के थीम एरिया में ऊर्जा क्षेत्र की प्रस्तुति यह बताती है कि राजस्थान गैर परम्परागत ऊर्जा क्षेत्र यथा पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा में भी उत्पादन की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है।

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