Friday, 20 October 2017

जिलों में सप्ताह में एक दिन महिला हाट लगेगा-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि जिला कलक्टरों को किसान बाजार की तर्ज पर प्रति सप्ताह एक दिन महिला हाट लगाने के लिए सुनिश्चित करने के निर्देश दिये

जयपुर, २ नवम्बर। स्वतंत्र महिला अधिकारिता विभाग की स्थापना की गई ।
उन्होंने कहा परिवार की समृद्धिमुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि जिला कलक्टरों को किसान बाजार की तर्ज पर प्रति सप्ताह एक दिन महिला हाट लगाने के लिए सुनिश्चित करने के निर्देश दिये जायेंगे, जिससे महिलाओं द्वारा उत्पादित वस्तुओं का बेहतर विपणन हो सके।
श्रीमती राजे शुक्रवार को बजट बनाने की प्रक्रिया से जोडा गया। उन्होंने कहा गत वर्ष महिलाओं के सुझाव पर ही राज्य में एक  प्रदेश यहां मुख्यमंत्री कार्यालय में बजट पूर्व बैठक में स्वयं सहायता समूहों तथा महिला संगठनों से चर्चा कर रही थीं । उन्होंने राज्य के विकास में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्हें के विकास और उत्थान में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। गत चार वर्षों से हमने महिलाओं के महत्वपूर्ण सुझावों को बजट में शामिल करने के लिए उनसे बजट पूर्व चर्चा की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वयं सहायता समूहों की बिक्री को कर मुक्त किया गया है। पिछले वर्षों में दिये गये सुझावों का ही यह परिणाम है कि महिलाओं द्वारा कृषि भूमि क्रय पर रियायती स्टाम्प दर लागू की गई है। उन्होंने कहा कि महिला सहायता समूहों के उत्पादों को राजस्थली में स्थान दिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें यहा के मापदण्डों के अनुरूप उत्पादन करना होगा।
श्रीमती राजे ने कहा कि जिला कलक्टरों को जिलों में किसान बाजार की तर्ज पर महिलाओं द्वारा उत्पादित वस्तुओं के विपणन के लिए प्रति सप्ताह महिला हाट लगाने के लिए कोई एक दिन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये जायेंगे। उन्होंने बताया कि लघु उद्योग के क्षेत्र में ब्याज दर में महिलाओं के लिए एक प्रतिशत की कमी की गई है।
बजट पूर्व चर्चा के लिए आयोजित इस बैठक में महिला संगठनों की पदाधिकारियों ने अनेक सुझाव दिये। इन सुझावों में प्रमुखतः गांवों में डेयरी की गतिविधियों से जुडी महिलाओं को पशु चिकित्सा की सामान्य जानकारी का प्रशिक्षण दिलवाएं, पशु आहार में अनुदान दिया जाये, महिला सशक्तीकरण दिशा में जागरूता बढाने के लिए शिविरों का आयोजन किया जाए। इसी प्रकार महिलाओं द्वारा घरेलू सभी प्रकार के उत्पादों के विपणन की व्यवस्था की जाए, बैंक में खाता खुलवाने के लिए ऋण प्राप्त करने में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए महिलाओं के लिए एक दिन सुनिश्चित किया जाना चाहिये। इसी तरह ब्याज दर भी समान होनी चाहिये।
चर्चा के दौरान यह भी सुझाव दिया गया कि वृद्ध महिलाओं के लिए और भी वृद्धाश्रम खोले जाएं। गांवों में किशोर बालिकाओं को नर्सिंग, पोषाहार, पेरा मेडीकल आदि के लिए प्रशिक्षण दिया जाए। राज्य सरकार द्वारा शुरू किये गये समूह संस्थानों में महिलाओं को प्रशिक्षण की पहल की गई है। इसे बढाते हुए ऐसे समूह ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर खोले जाएं जिससे महिलाओं को स्वरोजगार सुलभ हो सके।
विधायकों तथा सांसदों की निधि से महिला विकास से जुडी गतिविधियों पर तीस प्रतिशत व्यय किया जाना चाहिये। महिलाओं की उद्यमिता, क्षमता को बढाने के लिए उन्हें मशीन का प्रशिक्षण दिया जाये जिससे वे आन्टी चिप्स जैसे व्यवसाय को आगे बढा सकें। ग्रामीण पर्यटन के विकास के साथ महिलाओं को जोडा जाए ताकि वे अपने हुनर का उपयोग कर अपने उत्पादों का बेहतर विपणन कर सकें।
महिला-बालिका अधिकारों, इस वर्ग से जुडी कल्याण योजनाओं, शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षित यातायात जैसे महत्वपूर्ण विषयों के सन्दर्भ में अधिकाधिक प्रचार सामग्री सुलभ करवाई जाये।
बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्री कनकमल कटारा, वित्त राज्यमंत्री श्री वीरेन्द्र मीणा, जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष, श्री एस.एन.गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव वित्त श्री राजीव महर्षि सहित विभिन्न विभाग के उच्चाधिकारी, महिला संगठनों एवं स्वयं सहायता समूहों से जुडी महिलाएं उपस्थित थीं।