Tuesday, 24 October 2017

बसंत पंचमी पर चहुंओर सरस्वती का वंदन

होली पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का अभ्यास शुरू

बसंत पंचमी पर चहुंओर सरस्वती का वंदन

बीकानेर, गुप्त नवरात्रा की पंचमी बुद्धि, विद्या व ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ मनाई गई। वसंत पंचमी पर नागरी भंडार व पब्लिक पार्क परिसर स्थित सरस्वती माता के मंदिर में सुबह से शाम तक दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। दर्शनार्थियों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक थीं। देवी के पुष्पमाला, रेवड़ी सहित विभिन्न मिठाइयों का प्रसाद चढ़ाया गया । दोनों सरस्वती मंदिरों में विशेष श्रृंगार व पूजन किया गया, भक्ति संगीत के भी आयोजन हुए। 

वसंत पंचमी का अबूझ सावा होने के कारण व्यापारिक प्रतिष्ठानों के उद्घाटन, बच्चों के नामकरण, सगाई व विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रम हुए। शहर के विभिन्न मोहल्लों में होने वाली रम्मतों के पूर्वाभ्यास रम्मत के उस्तादों व सरस्वती की पूजा के बाद शुरू हुए। वसंत पंचमी से डफ वादन का सिलसिला शुरू हो गया। देव मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को इत्र व सुगंधित गुलाल से फाग खेलाई गई तथा विशेष पीले वस्त्र धारण करवाए गए। 

शिक्षण संस्थाओं में वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन व वार्षिकोत्स सहित विविध आयोजन हुए। बच्चों ने संस्कृत व हिन्दी में विद्या की देवी की स्तुति वंदना की। शिक्षण संस्थाओं में विद्यार्थियों व अध्यापकों तथा अनेक लोगों ने शुक्रवार को पीले वस्त्र पहन कर ऋतु परिवर्तन के पर्व का स्वागत किया। 

पंडितों व पुराणों के अनुसार वसंत पंचमी के दिन विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का अवतरण हुआ, इसलिए शास्त्रों में इसे अबूझ मुर्हूत बताया गया है। वसंत पंचमी को ब्रह्माजी के द्वारा पत्तों पर जल छिड़कने से देवी सरस्वती प्रकट हुई वसंत पंचमी के दिन ही संसार को अपनी वीणा से वाणी प्रदान की। 

बंगालियों ने सरस्वती की मिट्टी की  प्रतिमा की बांग्ला विधि अनुसार तथा बिहार के यहां प्रवास कर रहे लोगों ने बिहारी परम्परा के अनुसार वाग्देवी की पूजा की। देवी शारदा को रंग-बिरंगी गुलाल से फाग खेलाई गई तथा पारम्परिक गीत गाए गए। 


रम्मतों का पूर्वाभ्यास
होली पर आचार्यों के चैक में वीर व श्रृंगार रस प्रधान अमर सिंह राठौड़ की, बिस्सों के चैक में श्रृंगार रस के साथ जीवन में संयम रखने का संदेश देने वाली भक्त पूर्णमल की, बारह गुवाड़ व मरुनायक चैक में श्रृंगार रस प्रधान हेडाऊ मेहरी की तथा बारह गुवाड़ में शहजादी नौटंकी, ख्याल, चैमासा प्रधान और कीकाणी व्यासों के चैक में होने वाली रम्मतों का पूर्वाभ्यास उस्तादों के स्मरण व देवी, नगाड़ा, हारमोनियम की पूजा के बाद शुरू हुए। जस्सूसर गेट के अंदर, कीकाणी व्यासों का चैक, जूनागढ़ के पास, गंगाशहर, सुजानदेसर व भीनासर सहित शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में होली के रसियों ने डफ के पूजन के बाद उसका वादन शुरू किया। कसाइयों की बारी के अंदर डफ की दुकानें भी खुल गई। पारम्परिक डफ के साथ कृत्रिम प्लास्टिक से बने डफ विभिन्न साइजों में बिक्री का जा रही है।

प्रेरणादायक है सरस्वती का स्वरूप
शुभ्र वस्त्र धारण किए देवी सरस्वती के चार हाथों में वीणा, पुस्तक व माला तथा वाहन हंस है। सफेद वस्त्र मानव को तन, मन व विचारों को स्वच्छ रखने, सत्य, अहिंसा, क्षमा, सहनशीलता, शंाति, सद्भाव व प्रेम रखने तथा दुर्गुणों को दूर करने का संदेश देता है। दोनों हाथों में वीणा हर कार्य को करीने से करने, वीणा के तार की तरह किसी भी किसी भी कार्य-व्यवहार में आडिंग नहीं रहकर सादगी, सहजता तथा गहरे सोच के साथ कार्य करने तथा अपने में व्याप्त अवगुणों को दूर करने का संदेश देता है। विद्यादेवी के हाथ में पुस्तक ज्ञान को निरन्तर ग्रहण कर उसका सदुपयोग करने, सभी कार्य कलात्मक तरीके से करने व दूसरों को ज्ञान बांटने की सीख देता है। कहा भी गया है कि बांटने से ज्ञान बढ़ता है। देवी सरस्वती के हाथ की सफेद माला हर कार्य चिंतन मनन के बाद करने की सीख देता है। - रिर्पोट - हरिशंकर आचार्य, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारि, बीकानेर

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