Monday, 16 July 2018
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हॉलीवुड फिल्म: मरकरी मैन

दुनिया को बचाने के लिए चाहे हम कितना भी प्रयास करें पर हमें हमेशा एक ऐसे चमत्कारी नायक की जरूरत तो रहती ही है

दो टूक: दुनिया को बचाने के लिए चाहे हम कितना भी प्रयास करें पर हमें हमेशा एक ऐसे चमत्कारी नायक की जरूरत तो रहती ही है जो न केवल साहस बल्कि जादुई, दैवीय, अमरता और वैचारिकता के तमाम उन तत्वों से लैस हो जिन्हें हम मानवीय तौर भी दरकिनार रखकर दुनिया को चला रहे हैं। स्पाइडर मैन, सुपरमैन और बैटमैन और मलेशिया के किकमैन जैसे कॉमिक नायकों की कड़ी में ही बनी लेकिन इस बार थाइलैंड से प्रदर्शित होने वाली निर्देशक बैंडिट थॉंग डी की नयी फिल्म मरकरी मैन इसी कहानी को थोड़े से अलग अंदाज से पेश करती है।
कहानी: फिल्म की कहानी वही अच्छे और बुरे के पुराने फार्मूले पर बनी मगर इस बार एक ऐसे नायक की कहानी को दिखाने वाली है जिसे दुनिया भर में आतंक का पर्याय बने ओसामा से लोहा लेने की की पहल से जोड कर कहा गया है । फिल्म की कहानी की शुरूआत कंबोडिया में एक ऐसे युवकों के समूह से होती है जो अंगकोर के मंदिरों में जुआ खेल रहे हैं और देश की चितां से दूर हैं। दूसरी तरफ अमेरिका पर हमला करने के लिए तैयार ओसामा बिन अली (एरन पफू थाइलैंड पर बम बरसा रहा है। ओसामा केवल साधारण आंतकवादी ही नहीं है बल्कि वह विज्ञान और चमत्कारों का जानकार भी है इसलिए वह चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण से पैदा होने वाली रहस्यमय शक्तियों पर भी परीक्षण कर रहा है। लेकिन एक दिन अचानक होने वाली खगोलीय दुर्घटना में जब आसमान से गिरे एक पिंड से एक रहस्यमय पारा मानव की उत्पति हो जाती है तो वह न केवल दुनिया भर के लिए बल्कि ओसामा जैसे आतंकियों लिए भी खतरा पैदा हो जाता है। लेकिन चान (वा सान खांतू) नामक इस मानव के अपने संकट भी है कि वह किसी की मदद तभी कर सकता है जब अपने खगोलीय श्राप से मुक्त हो जाए और तब तक उसे मरकरी यानी पारा मानव ही बने रहना होगा। पर इस मरकरी मैन बने रहने के बावजूद वह जिस साहस और दैवीय ताकतों का परिचय देकर अपने देश ही नहीं बल्कि दुनिया को भी ओसामा जैसे आंतकियों से निजात दिलाता है, मरकरी मैन इसी साहस और रोमांच की रोंगटे खडे करने वाली कहानी है। हालांकि यह अलग बात है कि इसकी थाई भाषा की दिक्कतों के चलते इसके उपशीर्षकों वाले संस्करण भी दुनिया भर के फिल्म बाजारों में उतारे गए हैं पर इसके बावजूद भारत में हिंदी और अंग्रेजी में इसे देखना अलग अनुभव तो है ही।
अभिनय-निर्देशन: यह कहने की जरूरत नहीं कि कॉमिक पात्रों को लेकर बनी फिल्मों में अभिनय की गुजांइश कितनी होती हैं पिफर अब तो स्पाइडर मैन भी अपने अभिनय की रीच दिखाने के लिए अपना नकाब उतारने लगा है तो ऐसे में चार्ल्टन कॉमिक के मरकरी मैन के लिबास में लिपटे वा सन के हिस्से में कितना प्रतिभा प्रदर्शन आएगा इसे भी हमें फिल्म में कंप्यूटर तकनीक, विशेष प्रभावों और ध्वनि के बेहतर और चौंकाने वाले अंदाज में हुए इस्तेमाल को ध्यान में रखकर ही देखना होगा। इसे भी निर्देशक की तकनीकी कुशलता ही कहा जाएगा कि विध्वंस के दृश्यों की अधिकता के बावजूद उन्होंने एक कॉमिक पात्र के चरित्र में अभिनय भावुकता और बैचेनी के बिंब तलाश लिए हैं, खासतौर से चान के उन दृश्यों में जब वे पोर्नोग्रापफी के चित्र देखते हुए विचलित हो जाता है या उनके उन दृश्यों में जब उनके घावों से रक्त नहीं पारा रिसता हुआ परदे पर दिखायी देता है। कुछ भी कहें पर एशियन परिदृश्य में निर्देशक बैंडिट थॉंग डी की हॉलीवुड की कॉमिक पात्रों और चरित्रों का मुकाबला करती १०१ मिनट की यह एक्शन फंतासी फिल्म हैरत में डालने वाली तो है ही।