Saturday, 24 August 2019
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पत्रकारों की सुरक्षा हेतू कानून की मांग

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम का ज्ञापन कलक्टर को सौंपा

बीकानेर,  नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्टस इंडिया एनयूजेआई व जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान जार की प्रदेश इकाई के आह्वान पर जार की बीकानेर इकाई की ओर से देश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिये कानून बनाने तथा मीडिया काउंसिल गठन करने सहित विभिन्‍न मांगों का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम का एक ज्ञापन बुधवार को जिला कलक्टर के माध्यम से भेजा गया।

Journalists associated with journalist union JAR hand overing gyapan to DMकलक्टर को ज्ञापन देने गए जार के प्रतिनिधि मंडल में जार की जिला इकाई के जिलाध्यक्ष श्याम मारू, एनयूजेआई की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा जार के प्रदेश उपाध्यक्ष भवानी जोशी, जार के बीकानेर संभाग के सचिव नीरज जोशी, जार बीकानेर जिला इकाई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद अली पठान, महासचिव विमल छंगाणी, पत्रकार रवि बिश्नोई, जार के संगठन सचिव नरेश मारु, उषा जोशी आदि शामिल थे। एनयूजेआई की राष्टÑीय कार्यकारणी के बीकानेर से निर्वाचित सदस्य भवानी जोशी ने बताया कि ज्ञापन में प्रेस परिषद अधिनियम का विस्तार करते हुए एक नया कानून बनाकर मीडिया काउंसिल का गठन की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि मीडिया काउंसिल के गठन से मीडिया के विस्तार के साथ इसमें पैदा हो रही अनेक प्रकार की चुनौतियों तथा अस्वस्थ परंपराओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

जोशी ने बताया कि प्रस्तावित मीडिया काउंसिल में ऐसे प्रावधानों की व्यवस्था करने की मांग की गई है जिससे न केवल मीडिया की गलत हरकतों पर नजर रखी जा सके बल्कि श्रमजीवी पत्रकारों के हितों की  भी रक्षा हो। उन्होंने बताया कि एनयूजेआई का साफ मानना है कि पत्रकार सुरक्षा कानून के अन्तर्गत ही इस प्रकार की एक प्रभावी व्यवस्था की जा सकती है। ऐसे में केन्द्र सरकार को इस संदर्भ में कदम उठाना चाहिये। ज्ञापन में गत कुछ वर्षां से देश के विभिन्न हिस्सों में पत्रकारों पर बढ़ते हिंसक हमलों से देशभर के श्रमजीवी पत्रकारों में हुई चिंता से अवगत कराते हुए बताया गया है कि आज देश में पत्रकारों की सरे राह ही नहीं, बल्कि उनके घरों एवं दफ्तरों में घुसकर उनकी नृशंस हत्याएं की जा रही हैं। इन हत्याओं के पीछे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ऐसे प्रभावशाली लोगों अथवा असामाजिक समूहों का हाथ होता है जिन्हें सदैव इस बात का डर सताता रहता है कि यदि मीडिया में उनके काले कारनामें उजागर हो गये तो उनके झूठे प्रभाव से आवरण हट जाएगा। इसलिए वे लोकतंत्र के पहरेदारों की आवाज को हमेशा के लिए बंद करने का दुस्साहस करने लगे हैं। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा के लिये भी देश में कानून बनाया जाना जरूरी है।

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